Sheopur News: गंगा आरती का वीडियो वायरल, जूते पहने नजर आए आयुक्त संकेत भोंडवे; सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Sheopur News: गंगा आरती का वीडियो वायरल, जूते पहने नजर आए आयुक्त संकेत भोंडवे; सोशल मीडिया पर उठे सवाल
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर में धार्मिक आस्था से जुड़े एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो में संकेत भोंडवे मां गंगा की आरती करते हुए नजर आ रहे हैं और उनके पैरों में जूते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे धार्मिक परंपरा और मर्यादा से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्रशासनिक अधिकारी से अपेक्षित संवेदनशीलता के नजरिए से देख रहे हैं।
जूते पहनकर आरती का वीडियो वायरल
वायरल वीडियो में संकेत भोंडवे अन्य लोगों के साथ मां गंगा की आरती करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान उनके पैरों में जूते नजर आ रहे हैं। वीडियो की अवधि और इसके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
धार्मिक स्थलों और पूजा-अनुष्ठानों में जूते-चप्पल उतारना कई परंपराओं में धार्मिक मर्यादा का हिस्सा माना जाता है। इसी वजह से वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि आरती के दौरान जूते पहनने की क्या वजह थी।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे लेकर अलग-अलग टिप्पणियां की हैं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं और परंपराओं से जोड़ते हुए आपत्ति जताई है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि किसी वीडियो के आधार पर अधिकारी की मंशा या आस्था को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस मामले में अभी तक संकेत भोंडवे की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि आरती के दौरान जूते पहने होने की वजह क्या थी।
चूक या कोई परिस्थिति? जवाब का इंतजार
वीडियो के सामने आने के बाद मुख्य सवाल यही है कि आरती के दौरान जूते क्यों पहने गए थे। क्या यह अनजाने में हुई चूक थी या कार्यक्रम से जुड़ी कोई ऐसी परिस्थिति थी, जिसकी वजह से जूते नहीं उतारे गए—इसका जवाब संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति के अलावा अधिकारी की मंशा या धार्मिक आस्था के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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