ट्विशा शर्मा मौत केस: आरोपी पति समर्थ सिंह की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज, CBI की चार्जशीट को कोर्ट ने माना वैध

भोपाल। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। भोपाल की एसीजेएम शोभना भालवे की अदालत ने समर्थ सिंह की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से तय समय सीमा के भीतर दाखिल की गई चार्जशीट को वैध माना है।
ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 को अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर लटकी मिली थीं। मामले की जांच CBI कर रही है। जांच एजेंसी ने समर्थ सिंह को हिरासत में लेने के 87वें दिन, 17 अगस्त को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 25 अगस्त को कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
बचाव पक्ष ने चार्जशीट को बताया था अधूरा
डिफॉल्ट जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि CBI की चार्जशीट अधूरी है और इसमें कई महत्वपूर्ण जांच अभी बाकी हैं। वकीलों ने फॉरेंसिक रिपोर्ट और दहेज प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की जांच लंबित होने का हवाला देते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(3) के तहत डिफॉल्ट जमानत का लाभ देने की मांग की थी।
वहीं, CBI और शिकायतकर्ता पक्ष ने इस दलील का विरोध किया। शिकायतकर्ता परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर पांडे और CBI के अभियोजक ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसी ने कानून में निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर मुख्य जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आगे की जांच जारी रहने से समय पर दाखिल की गई चार्जशीट अधूरी नहीं हो जाती।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने CBI और शिकायतकर्ता पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के CBI बनाम कपिल वाधवान मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया।
अदालत ने माना कि केवल इस आधार पर कि जांच एजेंसी की आगे की जांच लंबित है, तय समय सीमा के भीतर दाखिल की गई चार्जशीट को अधूरा नहीं माना जा सकता। इस आदेश के साथ समर्थ सिंह को डिफॉल्ट जमानत नहीं मिल सकी।





