जिले के सारे टेंडर पति को देने में लगीं कलेक्टर मैडम : एसपी साहब ने ऑफिस में लिखवाया अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है : कलेक्टर ने तीन लाख रुपये में स्टेनो को किया बहाल

जिले के सारे टेंडर पति को देने में लगीं कलेक्टर मैडम : एसपी साहब ने ऑफिस में लिखवाया अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है : कलेक्टर ने तीन लाख रुपये में स्टेनो को किया बहाल

1 जिले के सारे टेंडर पति को देने में लगीं कलेक्टर मैडम छोटे से जिले में पदस्थ एक प्रमोटी आईएएस कलेक्टर मैडम इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर खासा सुर्खियों में हैं। मैडम पर आरोप है कि जिले के टेंडरों में अपने पति को फायदा पहुंचाने के लिए वे जमकर दखल दे रही हैं। महकमे में तो यहां तक कहा जा रहा है कि जिले के ज्यादातर कामों के टेंडर मैडम की पसंद के हिसाब से ही तय हो रहे हैं। बताया जाता है कि जो अधीनस्थ अधिकारी मैडम के निर्देशों पर चलने से इनकार करता है, उसे शो-कॉज नोटिस से लेकर निलंबन तक का सामना करना पड़ जाता है। इसके बाद बहाली के लिए भी अलग तरह की सेटिंग होने की बातें सामने आ रही हैं। बतौर कलेक्टर यह मैडम का पहला जिला है, लेकिन पद संभाले अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ और उनकी कार्यशैली को लेकर जिले में असंतोष की खबरें आने लगी हैं। पिछले दिनों कर्मचारियों ने मैडम के खिलाफ हंगामा किया और बाद में हड़ताल तक कर दी। आरोप है कि दबाव बनाकर हड़ताल खत्म करवा दी गई। मैडम इसके पहले भी जिन विभागों या संस्थानों में पदस्थ रहीं तब भी उनको पति को उपकृत करने के आरोप लगे थे।

2 एसपी साहब ने ऑफिस में लिखवाया अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है बड़े जिले की कमान संभाल रहे एक सीधी भर्ती के IPS साहब इन दिनों अपने ऑफिस के बाहर लगे एक बोर्ड को लेकर चर्चा में हैं। बोर्ड पर साफ-साफ लिखवाया गया है—“अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है। अब सवाल यह है कि साहब के हिसाब से अधिकृत कौन है और अनाधिकृत कौन? इसका कोई अलग से विवरण बोर्ड पर नजर नहीं आता। दिलचस्प बात यह भी है कि इस फरमान की जरूरत क्यों महसूस हुई, इसकी वजह भी साफ नहीं है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि ऑफिस के दरवाजे पर ही प्रवेश की सीमा तय करने की जरूरत पड़ गई? साहब का जिला हाल ही में बाढ़ की मार झेल चुका है। उस दौरान पड़ोसी राज्य के एक जिले के एसपी के अपने जिले में पहुंचकर राहत और रेस्क्यू में मदद करने की खबरों ने भी खूब ध्यान खींचा था।

3 कलेक्टर ने तीन लाख रुपये में स्टेनो को किया बहाल एक बड़े जिले में पदस्थ युवा आईएएस कलेक्टर साहब कभी राजनीतिक वजहों से तो कभी अपने फैसलों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार साहब की चर्चा एक स्टेनो को पहले निलंबित करने और फिर बहाल करने को लेकर हो रही है। महकमे में तो यहां तक कहा जा रहा है कि बहाली के पीछे तीन लाख रुपये की कथित डील हुई है। दरअसल, कुछ महीने पहले एक स्टेनो पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था और उसे रंगे हाथ पकड़े जाने की बात सामने आई थी। मामले की जांच के दौरान सामने आए वीडियो और एडीएम की रिपोर्ट में स्टेनो के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सवाल खड़े हुए। जांच में वह निर्दोष पाया गया, जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर ने उसे बहाल कर दिया था। नए कलेक्टर साहब ने पद संभालते ही उसी पुराने मामले में स्टेनो को फिर निलंबित कर दिया। इसके बाद स्टेनो ने एडीएम की जांच रिपोर्ट और वीडियो कलेक्टर के सामने रखे। मामला पलटा और स्टेनो को दोबारा बहाल कर दिया गया। अब महकमे में इस बहाली को लेकर अलग ही कहानी चल रही है—दावा है कि तीन लाख रुपये

4 युवा आईएएस ने सेकंड हैंड खरीदकर पूरा किया मर्सिडीज चलाने का सपना एक युवा आईएएस साहब को महंगी और लग्जरी गाड़ियों का खासा शौक बताया जाता है। जितना शौक गाड़ियां चलाने का है, उतना ही उन्हें अपनी लग्जरी गाड़ियों को विला के सामने खड़ा कर रखने का भी है। साहब का सपना था कि बड़े लोगों की तरह वे भी मर्सिडीज की सवारी करें। आखिरकार सपना पूरा करने के लिए कुछ दिन पहले साहब दिल्ली पहुंचे और वहां से सेकंड हैंड मर्सिडीज लेकर लौटे। बताया जा रहा है कि जिस मॉडल की मर्सिडीज साहब ने खरीदी है, उसकी नई कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास बताई जाती है। वहीं, साहब ने सेकंड हैंड कार के लिए करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए हैं। गाड़ी अब बाकायदा साहब के विला के सामने अपनी जगह बना चुकी है। खास बात यह है कि साहब से मिलने पहुंचने वाले लोगों को भी नई गाड़ी की खूबियों से परिचित कराने का मौका साहब नहीं छोड़ते। यानी मर्सिडीज सिर्फ विला के बाहर खड़ी नहीं है, उसकी चर्चा भी साहब के साथ चल रही है। वैसे, कुछ समय पहले ही सरकार ने साहब को एक जिले की कलेक्टरी से हटाकर लूप लाइन माने जाने वाले संस्थान में पदस्थ किया है। कलेक्टरी गई तो क्या हुआ, साहब ने मर्सिडीज के साथ अपनी नई सवारी जरूर खोज ली।

5 संभागीय कमिश्नर पर भारी पड़ रही विवादित आरटीओ अक्सर विवादों में रहने वाली एक आरटीओ मैडम इन दिनों अपने ही संभाग की कमिश्नर मैडम पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं। मामला इतना आगे बढ़ चुका है कि संभागीय कमिश्नर ने आरटीओ मैडम को निलंबित करने के लिए विभाग के प्रभारी प्रमुख सचिव को पत्र तक लिख दिया था। लेकिन करीब सात महीने बीतने के बाद भी न तो आरटीओ मैडम निलंबित हुईं और न ही उनका तबादला किया गया। मामला यहीं खत्म नहीं होता। क्षेत्र की विधायक ने भी आरटीओ मैडम को हटाने के लिए मंत्री से लेकर सरकार तक पत्र लिखकर गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। आरटीओ मैडम पर आरोप है कि सरकारी काम समय पर पूरे नहीं किए जाते और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का भी अपेक्षित पालन नहीं होता। इसके अलावा भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें भी सरकार तक पहुंचने की बात सामने आई है, लेकिन इन शिकायतों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। बताया जाता है कि इससे पहले मैडम एक बड़े जिले में पदस्थ थीं, जहां उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा था। बाद में वे एक बार फिर दूसरे बड़े जिले में पोस्टिंग हासिल करने में सफल रहीं। अब सवाल यही है कि जब संभाग की कमिश्नर से लेकर क्षेत्र की विधायक तक आरटीओ मैडम को हटाने की पैरवी कर चुकी हैं, तो आखिर विभागीय कार्रवाई की फाइल किस मोड़ पर अटकी हुई है?

6 सचिव साहब की वापसी से मौज काटने वाले अफसर परेशान तकनीक वाले विभाग में सचिव का प्रभार एक ऐसे आईएएस साहब को दिया गया है, जो पहले भी इसी विभाग की कमान संभाल चुके हैं। फर्क इतना है कि पिछली बार साहब विभाग के प्रभारी प्रमुख सचिव हुआ करते थे, जबकि इस बार सचिव के तौर पर वापसी हुई है। साहब के आने की एक वजह विभाग की सुस्त रफ्तार को भी माना जा रहा है। मौजूदा प्रमुख सचिव का विभाग में मन नहीं लगने की बातें सामने आती रही हैं और इसका असर कई प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर भी पड़ा। एक बार तो बड़े साहब ने भी प्रमुख सचिव से यहां तक कह दिया था कि ऐसा लगता है, जैसे आपके विभाग में कोई काम होता ही नहीं है। इसके बाद सचिव साहब की दोबारा एंट्री हुई है। आते ही उन्होंने पुराने प्रोजेक्ट्स की फाइलें खंगालने के साथ नए प्रोजेक्ट्स की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अब तक आराम से चल रहे अफसरों के लिए साहब की वापसी किसी अलार्म से कम नहीं है। समीक्षा बैठकें शुरू होते ही विभाग में कामकाज की रफ्तार बढ़ गई है। जिन अफसरों की अब तक मौज चल रही थी, उन्हें अब फाइलों से लेकर प्रोजेक्ट्स तक का हिसाब देना पड़ रहा है। यानी सचिव साहब की वापसी के साथ विभाग में “मौज” का दौर खत्म और “काम” का दौर शुरू होता नजर आ रहा है।

7 असिस्टेंट कमिश्नर मैडम की किस्मत है खराब मलाईदार विभाग में पदस्थ एक असिस्टेंट कमिश्नर मैडम की किस्मत इन दिनों कुछ ज्यादा ही खराब चल रही है। मैडम का लंबे समय से समयमान-वेतनमान का मामला अटका हुआ था। इसके लिए बैठक तक नहीं हो पा रही थी। आखिरकार मैडम ने राजधानी की दौड़-भाग शुरू की और अफसरों से गुहार लगाते हुए किसी तरह बैठक की तारीख तय करवा ली। बैठक की तारीख मिलते ही मैडम की खुशी का ठिकाना नहीं था। उम्मीद थी कि अब मामला सुलझ जाएगा और जल्द ही बढ़े हुए वेतन का लाभ मिलने लगेगा। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। बैठक होने से पहले ही मैडम के जिले में एक बड़ी घटना हो गई और सरकार ने कार्रवाई करते हुए मैडम को निलंबित कर दिया। अब स्थिति यह है कि जिस बैठक के लिए मैडम ने इतनी भागदौड़ की थी, वह तो होगी, लेकिन मैडम खुद उसका फायदा उठाने की स्थिति में नहीं रहेंगी।

8 रिटायर होते ही ओएसडी बनेंगे प्रमोटी आईएएस एक प्रमोटी आईएएस साहब कुछ महीनों में रिटायर होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद घर बैठने का उनका कोई इरादा नजर नहीं आ रहा। साहब फिलहाल सरकार की कोर टीम का हिस्सा हैं और बताया जा रहा है कि सरकार उनके कामकाज से खासी संतुष्ट है। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें सरकार की टीम में बनाए रखने की तैयारी शुरू हो गई है। साहब को रिटायरमेंट के बाद संविदा के आधार पर ओएसडी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यानी जिस दिन साहब की सेवा समाप्त होगी, उसके आसपास ही नई जिम्मेदारी का आदेश भी सामने आ सकता है। ऐसे में रिटायरमेंट और नई पोस्टिंग के बीच एक दिन का भी ब्रेक नहीं रहने की संभावना है। साहब की मेहनत का इनाम सिर्फ उन्हें ही नहीं मिला है। उनकी रिटायर आईएएस पत्नी को भी सरकार ने एक प्राधिकरण में नियुक्ति देकर जिम्मेदारी सौंप रखी है। यानी सरकारी सेवा से रिटायरमेंट के बाद भी इस आईएएस दंपती का सरकारी सिस्टम से कनेक्शन बरकरार है।

9 आईएएस बनाने के लिए बेकरार अफसर मैडम

मंत्रालय में उप सचिव पद पर पदस्थ एक महिला अफसर आईएएस बनाने के लिए बेहद उत्सुक नजर आ रही हैं। एक बैच को आईएएस अवॉर्ड देने के लिए जल्द ही डीपीसी होने वाली है। हालांकि, यह डीपीसी तय समय से काफी देरी से हो रही है और इसी देरी ने अफसरों का इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा कर दिया है। बताया जा रहा है कि मैडम अब डीपीसी की तारीख जल्द तय कराने के लिए लगातार दिल्ली के चक्कर लगा रही हैं। उनकी कोशिश है कि किसी तरह जल्द से जल्द डीपीसी हो और अफसरों का आईएएस अवॉर्ड का रास्ता साफ हो जाए। वैसे पूरे बैच के अफसरों से ज्यादा जल्दी मैडम को आईएएस बनाने की है। बाकी अफसर जहां डीपीसी की तारीख का इंतजार कर रहे हैं, वहीं मैडम ने तारीख तय कराने की कवायद ही तेज कर दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मैडम की दिल्ली दौड़ डीपीसी की तारीख कितनी जल्दी तय करा पाती है।

10 डीएसपी मैडम फरार, लेकिन इंस्टाग्राम अकाउंट चालू एक डीएसपी मैडम लंबे समय से फरार चल रही हैं। उन पर भ्रष्टाचार से लेकर अड़ीबाजी तक के गंभीर आरोप लगे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। लेकिन इस पूरे मामले के बीच मैडम के नाम से बना आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट अभी भी सक्रिय है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मैडम खुद पुलिस की नजरों से दूर हैं, तो आखिर उनका यह अकाउंट कौन चला रहा है? खास बात यह है कि अकाउंट के जरिए लगातार मैडम के पक्ष में पोस्ट की जा रही हैं और उनके निलंबन को खत्म करने की मांग भी उठाई जा रही है। पोस्ट में लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि “मैडम का निलंबन समाप्त करो।” ऐसे में सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधियां भी अपने आप में जांच का विषय बन गई हैं। अब असली सवाल यही है—जब मैडम फरार हैं, तो इंस्टाग्राम पर उनकी मौजूदगी इतनी सक्रिय कैसे है और अकाउंट के पीछे आखिर कौन है?

Abhishek Dubey

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