भोपाल एम्स में मेडिकल सप्लाई पर बड़ा सवाल: 14 रुपये की ट्यूब 943 रुपये में खरीदी, रिपोर्ट में 6500% तक महंगी दरों का खुलासा

भोपाल एम्स में दवाओं और सर्जिकल सामग्री की खरीद को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। संस्थान की एक समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 14.27 रुपये की दर वाली एक मेडिकल ट्यूब की खरीद 943.49 रुपये में की गई। रिपोर्ट में 125 से अधिक दवाओं और 200 से ज्यादा सर्जिकल आइटम की दरें तुलनात्मक दरों से 500 से 6500 प्रतिशत तक अधिक पाए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिक दरों पर खरीद का मामला सामने आने के एक साल से ज्यादा समय बाद भी कार्रवाई और अतिरिक्त भुगतान की वसूली की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच, एम्स में मेडिकल सप्लाई की खरीद को लेकर जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
14 रुपये की ट्यूब की कीमत 943 रुपये
समिति की तुलनात्मक रिपोर्ट में 200 सेंटीमीटर हाई प्रेशर एक्सटेंशन ट्यूब का उदाहरण दिया गया है। इसके लिए एक अन्य अनुबंधित दर 14.27 रुपये दर्ज थी, जबकि अमृत फार्मेसी से सप्लाई की दर 943.49 रुपये बताई गई। दोनों दरों के बीच 929.22 रुपये का अंतर था। रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत की दर तुलनात्मक दर से करीब 66 गुना अधिक थी।
रिपोर्ट में टेरलिप्रेसिन और जेंटामाइसिन इंजेक्शन, एसाइक्लोविर, आयरन सुक्रोज सहित कई दवाओं और सर्जिकल सामग्री की दरों में भी अंतर दर्ज किया गया है।
शिकायतों के बाद गठित हुई थी समिति
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दवाओं और मेडिकल सामग्री की कीमतों को लेकर शिकायतों के बाद तत्कालीन निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह के निर्देश पर तुलनात्मक जांच शुरू की गई थी। 15 अप्रैल 2025 को समिति गठित हुई और 31 मई 2025 की रिपोर्ट में अमृत फार्मेसी की सप्लाई दरों की तुलना एम्स के अन्य सप्लायरों के रेट कॉन्ट्रैक्ट से की गई।
रिपोर्ट मंत्रालय के अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, संबंधित खरीद की वित्तीय समीक्षा, अतिरिक्त भुगतान की वसूली और जिम्मेदारी तय करने को लेकर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
145 करोड़ से बढ़कर 245 करोड़ रुपये हुआ खरीद बजट
एम्स भोपाल की स्थायी वित्त समिति की जनवरी 2026 में हुई बैठक में खरीद बजट में बढ़ोतरी पर ध्यान दिलाया गया था। बैठक में बताया गया कि संस्थान का खरीद बजट वर्ष 2022-23 में 145 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 245 करोड़ रुपये हो गया। समिति ने खर्च कम करने की सलाह दी थी।
रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई कि दवाओं और मेडिकल सामग्री की अधिक दरों पर खरीद से आयुष्मान भारत योजना के निर्धारित पैकेज पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। बीपीएल मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित बजट पर भी असर पड़ने की चिंता सामने आई।
कार्रवाई और जवाबदेही पर सवाल
एम्स प्रबंधन की ओर से खरीद प्रक्रिया में टेंडर और अमृत फार्मेसी से खरीद सीमित करने जैसे कदमों की बात कही गई है। लेकिन रिपोर्ट में सामने आए दरों के अंतर और बढ़ते खरीद बजट को लेकर अब भी सवाल हैं कि अतिरिक्त भुगतान की समीक्षा कब होगी और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।





