Bhopal Retired IAS Murder: राकेश अग्रवाल की हत्या में लूट या साजिश? केयरटेकर वरुण की तलाश, ₹1 करोड़ के विवाद की भी जांच

भोपाल। राजधानी में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच लगातार नए एंगल की ओर बढ़ रही है। सूरज नगर स्थित घर में हुई इस हत्या के मामले में पुलिस की नजर सबसे पहले उस केयरटेकर वरुण कुमार पर है, जो घटना के बाद से फरार है। पुलिस लूट के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि हत्या के पीछे पहले से बनाई गई कोई योजना या अन्य वजह तो नहीं थी। ताजा जांच में मृत अधिकारी से जुड़े करीब ₹1 करोड़ के पुराने वित्तीय विवाद की जानकारी भी सामने आई है।
हत्या के बाद फरार हुआ केयरटेकर, बीना से आगरा तक पहुंची जांच
पुलिस के अनुसार वारदात के बाद वरुण कुमार भोपाल से निकलकर पहले बीना पहुंचा। यहां कुछ समय के लिए राकेश अग्रवाल का मोबाइल फोन चालू किया गया और फिर बंद कर दिया गया। इसके बाद उसकी लोकेशन आगरा तक पहुंची। आगरा में वरुण के एक परिचित से पुलिस ने पूछताछ की है।
पुलिस मृत अधिकारी के मोबाइल की लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और आरोपी के संभावित संपर्कों के आधार पर उसकी तलाश कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने वरुण के परिवार और पुराने संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटाई है।
सिर्फ लूट थी या हत्या के पीछे कोई और वजह?
शुरुआती जांच में पुलिस ने वारदात में लूट के एंगल को प्रमुखता से देखा। घर की अलमारी के ताले टूटे मिले और परिजनों की ओर से सोने की चेन, अंगूठियों और महंगी घड़ियों के गायब होने की जानकारी पुलिस को दी गई है। घटना के बाद राकेश अग्रवाल का मोबाइल फोन भी गायब था।
इसके साथ ही पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या हत्या सिर्फ लूट के इरादे से हुई या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। कॉन्ट्रेक्ट किलिंग की आशंका को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस अलग-अलग संभावनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।
दो-तीन दिन पहले ही घर में आया था वरुण
जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि वरुण कुमार को राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए घटना से कुछ दिन पहले ही रखा गया था। वह एक निजी केयरटेकर एजेंसी के जरिए भोपाल आया था।
रिपोर्टों के अनुसार एजेंसी ने उसे करीब ₹18 हजार मासिक वेतन पर काम पर रखा था। इससे पहले भी राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए दो केयरटेकर काम छोड़ चुके थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वरुण को नौकरी मिलने की प्रक्रिया क्या थी और घर की परिस्थितियों के बारे में उसे कितनी जानकारी थी।
पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर भी सवाल
जांच में यह बात सामने आई है कि वरुण का भोपाल में नया पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था। उसने एजेंसी को पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। पुलिस अब उसके दस्तावेजों, पुराने पते, मोबाइल नंबरों और पिछले रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
केयरटेकर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस एजेंसी के संचालक से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
₹1 करोड़ के पुराने वित्तीय विवाद ने बढ़ाई जांच की दिशा
इसी बीच पुलिस को राकेश अग्रवाल के एक पुराने वित्तीय विवाद की जानकारी मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने गुरुग्राम निवासी अजीत पाटनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि कंपनी में निवेश और बेहतर रिटर्न का भरोसा देकर उनसे करीब ₹1 करोड़ की रकम ली गई थी।
इस मामले में पुलिस ने अक्टूबर 2025 में अजीत पाटनी को गिरफ्तार किया था और मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है। अब हत्या की जांच में पुलिस इस पुराने विवाद से जुड़े दस्तावेज, लोगों और घटनाक्रम की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक इस वित्तीय विवाद को हत्या से सीधे जोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है।
गैस पाइप निकलने से भी गहराया रहस्य
हत्या के बाद घर की रसोई में एलपीजी सिलेंडर का पाइप निकला हुआ मिला था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या वारदात के बाद घर में आग लगाने या सबूत नष्ट करने की कोशिश की गई थी। घर में टूटी अलमारी और अन्य परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
मोबाइल फोन और फरारी से जुड़े सवाल
पुलिस के लिए मृत अधिकारी का मोबाइल फोन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हत्या के बाद फोन आरोपी के साथ गया और कुछ समय के लिए बीना में सक्रिय हुआ। बाद में फोन आगरा में भी ट्रेस हुआ। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फोन आरोपी के पास कैसे पहुंचा और उसने उसे अलग-अलग जगहों पर क्यों सक्रिय किया।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी
राकेश अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस के सामने अभी कई सवाल हैं—क्या हत्या का मुख्य उद्देश्य लूट था, क्या आरोपी ने पहले से घर की जानकारी जुटाई थी, वारदात के बाद गैस पाइप क्यों निकाला गया और मोबाइल फोन साथ ले जाने की वजह क्या थी।
फिलहाल वरुण कुमार पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, इसलिए हत्या की पूरी तस्वीर उसके पकड़े जाने और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस लूट, आरोपी की पृष्ठभूमि, पुराने वित्तीय विवाद और अन्य संभावित कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।





