Bhopal Teacher Protest: भोपाल में शिक्षकों के दो आंदोलन, अंबेडकर मैदान में कीलों पर लेटे शिक्षक; नीलम पार्क में छठे दिन सत्याग्रह

Bhopal Teacher Protest: भोपाल में शिक्षकों के दो आंदोलन, अंबेडकर मैदान में कीलों पर लेटे शिक्षक; नीलम पार्क में छठे दिन सत्याग्रह
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर राजधानी भोपाल में एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर आंदोलन चल रहे हैं। अंबेडकर मैदान में शिक्षक संघर्ष समिति का आंदोलन गांधी जयंती के दिन उग्र रूप लेता नजर आया, जबकि नीलम पार्क में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना छठवें दिन भी जारी रहा। दोनों आंदोलनों में शिक्षकों की प्रमुख मांगें टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने, पहली नियुक्ति से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना तथा ई-अटेंडेंस को वैकल्पिक करने से जुड़ी हैं।
अंबेडकर मैदान में नुकीली कीलों पर लेटे शिक्षक
अंबेडकर मैदान में शिक्षक संघर्ष समिति के आंदोलन के दौरान शिक्षक परशुराम कपाड़िया नुकीली कीलों पर लेट गए। आंदोलन स्थल पर सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए तीन दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन भी किया जा रहा था। इसी दौरान शिक्षक के कीलों पर लेटने से मौके पर भावुक माहौल बन गया।
वहां मौजूद अन्य शिक्षक और शिक्षिकाएं सरकार से अपनी मांगों पर निर्णय लेने की अपील करते नजर आए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर सरकार को अब स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक संघर्ष समिति की ओर से टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, ई-अटेंडेंस को वैकल्पिक व्यवस्था बनाने और नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि की गणना की मांग की जा रही है।
नीलम पार्क में छठवें दिन भी जारी रहा सत्याग्रह
उधर, अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के आह्वान पर नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आंदोलन के छठवें दिन भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से शिक्षक भोपाल पहुंचे। इससे पहले रीवा और शहडोल संभाग के शिक्षक भी धरने में शामिल हुए थे।
गांधी जयंती के मौके पर शिक्षकों ने उपवास और सत्याग्रह किया। आंदोलन को महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा से जोड़ते हुए धरना स्थल पर चरखा चलाकर सूत भी काता गया।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।
क्या हैं शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगें?
दोनों आंदोलनों में उठाई जा रही मांगें काफी हद तक समान हैं।
पहली मांग: शिक्षकों की सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए।
दूसरी मांग: पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
तीसरी मांग: शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को समाप्त या वैकल्पिक किया जाए।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन मांगों को लेकर पहले भी सरकार और विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। नीलम पार्क में चल रहे आंदोलन को लेकर मोर्चे ने मांगों के समाधान तक धरना जारी रखने की बात कही है।
एक मुद्दा, दो जगह आंदोलन
राजधानी भोपाल में एक जैसे मुद्दों को लेकर दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे आंदोलनों ने शिक्षक संगठनों की नाराजगी को सामने ला दिया है। अंबेडकर मैदान में विरोध का तरीका अधिक उग्र रहा, जबकि नीलम पार्क में शिक्षक उपवास, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
अब शिक्षकों की नजर सरकार की ओर से होने वाली अगली पहल पर है। दोनों संगठनों की प्रमुख मांगें समान होने के बावजूद आंदोलन अलग-अलग मंचों से जारी हैं।
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