धीरेंद्र शास्त्री ने ‘खसम पूजन दिवस’ वाले बयान पर दी सफाई, बोले- बुंदेलखंडी में पति को कहते हैं खसम

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ कहने वाले अपने बयान पर सफाई दी है। शिवपुरी जिले के करेरा में रामकथा के समापन पर उन्होंने कहा कि बुंदेलखंडी भाषा में पति को ‘खसम’ कहा जाता है। इसी स्थानीय बोलचाल के आधार पर उन्होंने यह बात कही थी। इस दौरान उन्होंने अपने बयान की आलोचना करने वालों पर भी तंज कसा।
बोले- पूरे देश में हमारी कथा नहीं चली वही बयान चर्चा में रहा
शुक्रवार को रामकथा के अंतिम दिन मंच से धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “क्या बताएं हम? एक तो हमारे मुंह में ब्रेक नहीं है। हमने खसम पूजन दिवस कह दिया। पूरे देश में हमारी कथा नहीं चली, वही चला।”
उन्होंने आगे कहा कि बुंदेलखंडी भाषा में पति को ‘मुंसुर खसम’ कहा जाता है। उन्होंने सवाल किया कि इसमें उन्होंने कौन-सी नई या गलत बात कह दी।
महिलाओं से पूछा- बुंदेलखंड में पति को खसम कहते हैं ना?
धीरेंद्र शास्त्री ने पंडाल में मौजूद महिलाओं से संवाद करते हुए कहा कि बुंदेलखंड में यह आम बोलचाल का शब्द है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब सास बहू से नाराज होती है तो कहती है- ‘जा, अपने खसम से कह दे।’ इसके बाद उन्होंने महिलाओं से पूछा कि बुंदेलखंड में पति को खसम ही कहते हैं ना।
करेरा की राजनीति पर भी किया कटाक्ष
रामकथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने करेरा की राजनीति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जितनी राजनीति नहीं होती, उससे ज्यादा करेरा में होती है। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की राजनीति से बजरंगबली बचाएं। साथ ही करेरा को महान बताते हुए कहा कि अब उन्हें समझ आया कि यहां राजा छोड़कर क्यों भागे थे।
26 अक्टूबर को दिया था ‘खसम पूजन दिवस’ वाला बयान
दरअसल, 26 अक्टूबर को ‘सीधी बात’ सत्र के दौरान एक अनुयायी ने करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर सवाल किया था। इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया अंदाज में करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ नाम दिया था। उन्होंने कहा था कि व्रत रखना चाहिए, लेकिन केवल एक दिन व्रत रखकर बाकी 364 दिन पति को ताने नहीं देने चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी।
विरोध करने वालों के खिलाफ FIR कराने की बात कही
करेरा में संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने अपने शिष्यों से कहा कि अब तक वे लोग विरोध का जवाब नहीं देते थे, लेकिन अब शिष्यों को खुली छूट दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई विरोध करे तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं और थाने में शिकायत करें। साथ ही अपने तरीके से जवाब भी दें।
उन्होंने कहा कि जो सनातन और हिंदुत्व का विरोध करेगा या उसे चुनौती देगा, उसे अब छोड़ा नहीं जाएगा। संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि वे आगे धाम जाएंगे और फिर केन्या के नैरोबी पहुंचेंगे। उन्होंने हिंदुओं और सनातन के लिए काम करने तथा गरीब बेटियों के विवाह कराने का काम आखिरी सांस तक जारी रखने की बात भी कही।





