E20 Petrol Controversy: कर्नाटक के 31% एथेनॉल वाले दावे को तेल कंपनियों ने किया खारिज, 893 नमूनों की जांच में मानकों पर खरा उतरने का दावा

नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केंद्र सरकार, कर्नाटक सरकार और सरकारी तेल कंपनियों के बीच पहुंच गया है। कर्नाटक सरकार की जांच में पेट्रोल के कुछ नमूनों में 31 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलने के दावे को सरकारी तेल कंपनियों ने खारिज कर दिया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल के नमूनों की जांच में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। वहीं, केंद्र सरकार के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए 893 पेट्रोल नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।
कर्नाटक सरकार की जांच पर तेल कंपनियों ने उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार ने दावा किया था कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। राज्य सरकार की जांच में कुछ नमूनों में एथेनॉल का स्तर 30 से 31 प्रतिशत से अधिक होने की बात सामने आई थी। इस मामले में सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने संयुक्त रूप से अपना पक्ष रखा। कंपनियों ने कर्नाटक सरकार के निष्कर्षों को चुनौती देते हुए कहा कि नमूनों की जांच में निर्धारित नियमों और मानक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
893 नमूनों की जांच में मानकों पर खरा उतरने का दावा
केंद्र सरकार ने E20 पेट्रोल कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि देशभर से लिए गए पेट्रोल के नमूनों की जांच में गुणवत्ता मानकों का पालन पाया गया है। सरकार के अनुसार, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 893 नमूने लिए गए थे। इनमें कर्नाटक से लिए गए 56 नमूने भी शामिल थे। सरकार का कहना है कि इन सभी नमूनों की जांच में पेट्रोल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया गया। हालांकि, कर्नाटक सरकार और तेल कंपनियों के परीक्षण परिणामों में अंतर क्यों आया, इस पर विस्तृत तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
राहुल गांधी ने E20 को बताया था '420'
इस विवाद को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि E20 अब '420' बन गया है और जनता की गाड़ियों से पेट्रोल चोरी किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की जांच का हवाला देते हुए दावा किया था कि पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक एथेनॉल मिलाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी।
पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बढ़ा विवाद
कर्नाटक सरकार के दावों और सरकारी तेल कंपनियों के जवाब के बाद E20 पेट्रोल की गुणवत्ता तथा जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्नाटक सरकार का दावा है कि कुछ पेट्रोल नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिला है। दूसरी ओर, तेल कंपनियां राज्य सरकार की जांच पद्धति पर सवाल उठा रही हैं। केंद्र सरकार ने भी अपने परीक्षणों के आधार पर पेट्रोल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने का दावा किया है।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में सामान्य तौर पर 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ाना है। हालांकि, एथेनॉल मिश्रण की मात्रा और ईंधन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
अब जांच के तरीकों पर टिका विवाद
E20 पेट्रोल को लेकर सामने आए अलग-अलग परीक्षण परिणामों के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों का है। तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार की जांच पद्धति को चुनौती दी है, जबकि केंद्र सरकार अपने स्तर पर कराए गए परीक्षणों को मानकों के अनुरूप बता रही है। ऐसे में दोनों पक्षों की परीक्षण रिपोर्ट और अपनाई गई तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नमूनों के परिणामों में अंतर किस वजह से आया।





