Gandhi Sagar Cheetah Radha: CCB-2 को मिला ‘राधा’ नाम, गांधी सागर में 4 हुए चीते; CM मोहन यादव ने किया रिलीज

भोपाल/नीमच। मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB-2 को निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एन्क्लोजर में रिलीज किया। राधाष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री ने मादा चीता का नाम ‘राधा’ रखा।
राधा के गांधी सागर पहुंचने के साथ ही यहां चीतों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है। अब अभयारण्य में दो नर और दो मादा चीते मौजूद हैं।
गांधी सागर में अब दो नर और दो मादा चीते
राधा के आने से पहले गांधी सागर में दो नर चीते प्रभास और पावक तथा मादा चीता धीरा मौजूद थी। अब CCB-2 के रूप में दूसरी मादा के आने से यहां चीतों का समूह दो नर और दो मादा का हो गया है।
CCB-2 करीब 3 साल की बोत्सवाना मूल की मादा चीता है। उसे पहले कूनो नेशनल पार्क में रखा गया था और बाद में गांधी सागर में स्थानांतरित किया गया। गांधी सागर को कूनो के बाद भारत में अफ्रीकी चीतों के लिए दूसरा प्रमुख आवास विकसित किया जा रहा है।
राधाष्टमी पर हुआ नामकरण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राधाष्टमी के अवसर पर CCB-2 का नाम ‘राधा’ रखा। इसके बाद उन्होंने चीता को सॉफ्ट-रिलीज एन्क्लोजर में छोड़ा।
वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के तहत नए स्थान पर छोड़े गए चीतों को तत्काल खुले जंगल में पूरी तरह स्वच्छंद छोड़ने के बजाय पहले निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में उनके व्यवहार और अनुकूलन पर निगरानी रखी जाती है। राधा के मामले में भी वन विभाग की निगरानी जारी रहेगी।
स्वास्थ्य और अनुकूलन पर रहेगी नजर
राधा के नए वातावरण में पहुंचने के बाद वन विभाग की टीम उसके स्वास्थ्य, व्यवहार और अनुकूलन पर नजर रखेगी। यह निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीता को एक नए आवास में धीरे-धीरे अनुकूलित किया जा रहा है।
गांधी सागर में पहले से मौजूद प्रभास, पावक और धीरा के स्वास्थ्य और व्यवहार की भी निगरानी की जा रही है। नए आवास में मादा चीता की मौजूदगी भविष्य में प्रजनन कार्यक्रम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक परिणाम आने वाले समय में ही सामने आएंगे।
प्रोजेक्ट चीता का दूसरा बड़ा केंद्र गांधी सागर
भारत में चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम की शुरुआत 2022 में कूनो नेशनल पार्क से हुई थी। इसके बाद गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को देश में चीतों के लिए दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया गया।
अप्रैल 2025 में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीते प्रभास और पावक को कूनो से गांधी सागर स्थानांतरित किया गया था। बाद में मादा धीरा को भी यहां लाया गया। अब राधा के आने से गांधी सागर में चीतों की संख्या चार हो गई है।
मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या 56
CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने के साथ ही मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण कार्यक्रम का दायरा और बढ़ा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक भारत में कुल चीतों की संख्या 56 हो गई है। इनमें गांधी सागर में मौजूद चार अफ्रीकी चीते भी शामिल हैं, जबकि कूनो में शेष आबादी और भारत में जन्मे शावक मौजूद हैं।
कूनो के बाद गांधी सागर में भी चीतों की आबादी विकसित करने का उद्देश्य केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सुरक्षित आवासों में चीता आबादी विकसित करना भी इसका हिस्सा है।
इको-टूरिज्म और रोजगार की उम्मीद
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीता संरक्षण को वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जोड़कर देखा है। गांधी सागर में चीतों की मौजूदगी से क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वन्यजीव पर्यटन बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर गाइड, होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ ही स्पष्ट होगा।
‘चीता स्टेट’ के साथ जैव विविधता पर जोर
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की वन्यजीव विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल ‘टाइगर स्टेट’ के तौर पर ही नहीं, बल्कि अब ‘चीता स्टेट’ के रूप में भी बन रही है।
उन्होंने प्रदेश में घड़ियाल, गिद्ध, जंगली भैंस और हाथियों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। सरकार का कहना है कि अलग-अलग वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण और उनके लिए उपयुक्त आवास विकसित करने से मध्य प्रदेश की जैव विविधता और मजबूत होगी।
राधा का गांधी सागर पहुंचना इसी संरक्षण अभियान की अगली कड़ी है। अब वन विभाग की निगरानी में यह देखा जाएगा कि वह नए वातावरण में किस तरह अनुकूलित होती है और आगे उसे खुले क्षेत्र में कब और किस तरह छोड़ा जाता है।





