Gwalior Road Quality: हाई कोर्ट की जांच में सड़क के सैंपल फेल, PWD लैब रिपोर्ट पर भी सवाल

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश पर चल रही जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। हाई कोर्ट में पेश की गई जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, श्मशान से गुड़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक से गुड़ा-गुड़ी का नाका और गुड़ा-गुड़ी का नाका से बेटी बचाओ चौराहा होते हुए हनुमान टॉकीज तक की सड़कों से लिए गए नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
मामला सिर्फ सड़क निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। जांच आयोग की रिपोर्ट में डीपीआर में शामिल कुछ PWD जोनल रिसर्च लैब की रिपोर्टों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठे हैं। लैब प्रभारी ने शपथपत्र देकर संबंधित रिपोर्टों को अपनी लैब द्वारा तैयार या जारी किए जाने से इनकार किया है।
बेटी बचाओ मार्ग के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने अगस्त में विभिन्न सड़कों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत सैंपल लिए थे। कोर्ट के आदेशों में सैंपल को सील करने, अलग-अलग परीक्षण प्रयोगशालाओं में भेजने और एक नमूना सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी निर्धारित की गई थी।
आयोग की रिपोर्ट में सामने आया कि जांच के लिए लिए गए सैंपलों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप परिणाम नहीं मिले। इनमें बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा-गुड़ी का नाका वाला मार्ग भी शामिल है।
इस सड़क को लेकर पहले हाई कोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया था कि सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में थी और सैंपल लिए जाने से कुछ समय पहले उसके क्षतिग्रस्त हिस्से में मरम्मत का काम किया गया था। कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम आयुक्त से स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज मांगे थे।
DPR में लगी PWD लैब रिपोर्ट पर उठे सवाल
जांच के दौरान आयोग को दो सड़कों की DPR में PWD की जोनल रिसर्च लैब के नाम से कुछ परीक्षण रिपोर्ट मिलीं। रिपोर्टों में दर्ज क्रमांकों का मिलान जब लैब के मूल वर्षवार रजिस्टर से किया गया तो वे रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।
इसके बाद 29 अगस्त 2026 को संबंधित लैब प्रभारी ने शपथपत्र दिया। इसमें उन्होंने कहा कि DPR में शामिल संबंधित रिपोर्टें उनकी लैब ने न तो तैयार कीं, न जारी कीं और न ही प्रमाणित कीं। रिपोर्ट में दर्ज क्रमांक भी लैब के मूल रिकॉर्ड से संबंधित नहीं पाए गए।
इस खुलासे के बाद जांच का दायरा सड़क की गुणवत्ता से आगे बढ़कर DPR में शामिल तकनीकी दस्तावेजों की विश्वसनीयता तक पहुंच गया है।
हालांकि, इन रिपोर्टों को किसने तैयार किया या DPR में वे किस स्तर पर शामिल हुईं, यह अभी जांच का विषय है। इसे लेकर किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।
पुरानी DPR की Measurement Book भी नहीं मिली
जांच के दौरान एक सड़क की पुरानी DPR से संबंधित Measurement Book (MB) उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।
नगर निगम की ओर से इस संबंध में तीन कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि में सड़क की मरम्मत कराने के लिए नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई है।
हाई कोर्ट ने पहले ही नगर निगम, PWD और NHAI को संबंधित सड़कों की DPR और Measurement Book उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने रिकॉर्ड छिपाने या गलत दस्तावेज देने की स्थिति में गंभीर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से मांगा जवाब
मामले में अब नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र पर जवाब दाखिल किया जाना है। निगम को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी यह याचिका लंबे समय से हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। कोर्ट ने जांच को केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय मौके से सैंपल लेकर उनकी स्वतंत्र जांच कराने की व्यवस्था की है।
आज कुलदीप नर्सरी-फूलबाग सड़क की रिपोर्ट पर सुनवाई
मामले में 18 सितंबर 2026 को भी सुनवाई निर्धारित है। आज कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहा तक की सड़क से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट पर विचार किया जाना है।
इससे यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि पहले से जांच में कई सड़कों के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात सामने आ चुकी है। अब अदालत में प्रस्तुत होने वाली नई रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित सड़क की गुणवत्ता जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
सड़क निर्माण व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्वालियर में खराब सड़कों को लेकर दायर याचिका के बाद हाई कोर्ट ने जिस तरह सैंपलिंग, लैब परीक्षण, DPR और Measurement Book की जांच की व्यवस्था की है, उससे मामला सिर्फ सड़क की मरम्मत या निर्माण गुणवत्ता का नहीं रह गया है।
जांच आयोग की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद अब संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों से जुड़े रिकॉर्ड की विश्वसनीयता भी जांच के दायरे में है। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और किसी संभावित अनियमितता पर निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।





