कैलाश विजयवर्गीय का ACS संजय दुबे पर तंज या तारीफ? बोले- रिटायरमेंट के बाद बन सकते हैं अच्छे नेता

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी चर्चा में आ गई। उन्होंने विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे के भाषण और उनके आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए कहा कि वे रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं। मंत्री की इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खिंचा। टिप्पणी को तारीफ के साथ हल्के व्यंग्य के तौर पर भी देखा गया, हालांकि विजयवर्गीय ने इसके पीछे का कोई खास आशय स्पष्ट नहीं किया।
विजयवर्गीय बोले- रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं संजय दुबे
संजय दुबे के भाषण का जिक्र करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने अंग्रेजी में कहा, “And you may be a very good leader after retirement because your speech was so excellent with confidence. I appreciate your speech.”
इसका अर्थ है कि संजय दुबे का भाषण और उनका आत्मविश्वास इतना प्रभावशाली था कि वे रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं। मंत्री की टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उनके बयान में तारीफ और व्यंग्य, दोनों के संकेत तलाशे गए।
5 रुपये की फाइल 33,500 रुपये में खरीदने का वीडियो भी चर्चा में
संजय दुबे का हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाने वाला एक वीडियो भी चर्चा में रहा था। वायरल वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर फाइल की खरीद को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा था कि 5 रुपये वाली फाइल 33,500 रुपये में कैसे खरीदी गई।
इसी पृष्ठभूमि में अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के मंच से विजयवर्गीय की टिप्पणी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हुईं। हालांकि, मंत्री ने अपने संबोधन में वायरल वीडियो का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उनकी टिप्पणी का उस घटना से कोई संबंध था या नहीं।
तारीफ के बहाने तंज या सिर्फ मजाक?
कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी का सबसे चर्चित हिस्सा संजय दुबे को रिटायरमेंट के बाद अच्छा नेता बनने की बात कहना रहा। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के भाषण और आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए कही गई इस बात के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।
हालांकि, मंत्री की ओर से किसी विशेष राजनीतिक आशय की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह टिप्पणी तारीफ थी, हल्का-फुल्का मजाक या व्यंग्यात्मक तंज, इसे लेकर अटकलें ही हैं।





