लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: 2 लाख रिश्वत मांगने वाला पटवारी 20 हजार लेते गिरफ्तार, तहसीलदार समेत 3 पर केस

खरगोन। इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने खरगोन जिले में रिश्वतखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कृषि भूमि के नामांतरण के एवज में पटवारी ने शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप कार्रवाई की।
मामले में तहसीलदार समेत दो पटवारियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
पत्नी के नाम जमीन के नामांतरण के लिए मांगी रिश्वत
लोकायुक्त के अनुसार कसरावद बड़ी निवासी पुनीत नाड़ीवाल ने 25 सितंबर 2026 को इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी ममता नाड़ीवाल के नाम ग्राम सतावड़, तहसील सेगांव में कृषि भूमि है, जिसका नामांतरण कराया जाना था।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में तहसीलदार सेगांव अंतरसिंह कनेश से संपर्क किया था। आरोप है कि इसके बाद संबंधित पटवारी से संपर्क करने को कहा गया। शिकायत के मुताबिक पटवारी खुमसिंह धारवे ने नामांतरण के बदले 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
20 हजार की पहली किस्त लेते ही दबोचा
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद 28 सितंबर को ट्रैप की योजना बनाई गई।
लोकायुक्त टीम ने खरगोन में शारदा हॉस्पिटल के पास पाटीदार मेडिकल के नजदीक कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने जैसे ही पटवारी खुमसिंह धारवे को 20 हजार रुपये दिए, वहां पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रिश्वत लेते पकड़ लिया।
तहसीलदार समेत 3 के खिलाफ मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक इस मामले में पटवारी खुमसिंह धारवे के अलावा पटवारी कुलदीप यादव और तहसीलदार अंतरसिंह कनेश के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 और बीएनएस 2023 की धारा 61(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
लोकायुक्त टीम ने ऐसे बिछाया ट्रैप
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक इंदौर डॉ. राजेश सहाय के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन कराया गया। इसके बाद टीम ने ट्रैप कार्रवाई की। कार्रवाई में निरीक्षक आशुतोष मिठास सहित लोकायुक्त पुलिस के अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
मामले में अब यह जांच की जा रही है कि नामांतरण की प्रक्रिया में तीनों आरोपियों की कथित भूमिका क्या थी और रिश्वत की मांग में किस स्तर तक समन्वय था। इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगा।





