एसीएस मैडम ने महिला आईएएस अफसरों को मिलाने शुरू की पार्टी : दूसरे जिले से संभाल रही एसपी मैडम अपने जिले की कमान : सरकार तक पहुंची एडीएम की वसूली की शिकायतें

1 एसीएस मैडम ने महिला आईएएस अफसरों को मिलाने शुरू की पार्टी
महिला आईएएस अफसरों के बीच बेहतर मेल-जोल और मधुर संबंध बनाने के लिए एक एसीएस मैडम ने नई पहल शुरू की है। मैडम की पहल पर पहली बार वीकेंड पर एक प्राइवेट होटल में महिला आईएएस अफसरों के लिए पार्टी रखी गई। मकसद था कि कामकाज की भागदौड़ से अलग महिला अफसर आपस में मिलें और एक-दूसरे के साथ बेहतर बॉन्डिंग बना सकें। हालांकि पहली ही पार्टी में रिस्पांस उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला। करीब एक दर्जन महिला आईएएस ही पार्टी में पहुंचीं और इनमें भी अधिकांश रिटायर महिला आईएएस थीं। पार्टी के आयोजन और समन्वय की जिम्मेदारी भी एक रिटायर आईएएस ने संभाली। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस एसीएस मैडम की पहल पर पूरी पार्टी आयोजित हुई, वे खुद ही इसमें शामिल नहीं हो सकीं। ऐन वक्त पर काम आ जाने के कारण मैडम को दिल्ली रवाना होना पड़ा। अब उम्मीद है कि पहली पार्टी से मिले अनुभव के बाद अगली बार आयोजन का दायरा बड़ा होगा और ज्यादा महिला आईएएस अफसर इसमें शामिल होंगी।
2 दूसरे जिले से संभाल रही एसपी मैडम अपने जिले की कमान
एक युवा आईपीएस मैडम की कार्यशैली इन दिनों उनके ही महकमे में खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। मैडम का अपना जिला तो है, लेकिन उनकी मौजूदगी पड़ोसी जिले में ज्यादा नजर आती है। बताया जाता है कि गुरुवार को मैडम पड़ोसी जिले के लिए निकल जाती हैं और फिर सीधे सोमवार को अपने जिले में वापसी होती है। यानी सप्ताह के चार से पांच दिन मैडम पड़ोसी जिले से ही अपने जिले की कमान संभालती हैं। अब असली कहानी यह है कि अगर कोई टीआई या अधीनस्थ कर्मचारी छुट्टी की गुहार लेकर मैडम के पास पहुंच जाए तो उसे छुट्टी मिलने के बजाय फटकार जरूर मिल जाती है। महकमे में इस पर सवाल भी उठ रहे हैं कि जब अधीनस्थों के लिए छुट्टी इतनी मुश्किल है, तो मैडम की अपनी गैरमौजूदगी का हिसाब कौन रख रहा है? मामला यहीं खत्म नहीं होता। मैडम की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्री से लेकर कई जनप्रतिनिधियों तक ने राजधानी में सरकार के स्तर पर शिकायत की है। अब देखना यह है कि शिकायतों के बाद सरकार मैडम की कार्यशैली पर कोई संज्ञान लेती है या पड़ोसी जिले से ही चलती रहेगी अपने जिले की पुलिसिंग!
3 सरकार तक पहुंची एडीएम की वसूली की शिकायतें
बड़े शहर में एडीएम के पद पर बैठे एक अफसर इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर परेशानियों में घिरते नजर आ रहे हैं। साहब के खिलाफ बिल्डरों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें अब सरकार तक पहुंचने लगी हैं। खास बात यह है कि एडीएम के पास कॉलोनी सेल का प्रभार भी है, जिसके चलते बिल्डरों और कॉलोनी से जुड़े मामलों में उनका सीधा दखल रहता है। बिल्डरों का आरोप है कि इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर साहब सीनियर अफसरों के नाम पर कथित तौर पर वसूली का दबाव बनाते हैं। अब परेशान बिल्डरों ने सीधे सरकार का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। वैसे साहब का विवादों से पुराना नाता बताया जाता है। कभी भरी बैठक में जूनियर अफसर से तकरार हो जाती है तो कभी सीनियर अफसर से ही उलझने की नौबत आ जाती है। उनके व्यवहार को लेकर महकमे में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। दिलचस्प यह है कि शिकायतों को लेकर साहब का रुख भी काफी बेफिक्र बताया जाता है। बिल्डरों से कथित तौर पर यहां तक कह देने की बातें सामने आ रही हैं कि शिकायतें करने से उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।
4 आईजी साहब का नंबर आखिरकार कब आएगा
सीधी भर्ती के एक आईजी साहब इन दिनों अपनी पोस्टिंग को लेकर खासे बेचैन बताए जा रहे हैं। लंबे समय से मुख्यालय में पदस्थ साहब की फील्ड में जाने की हसरत अब तक पूरी नहीं हो पाई है। जब भी किसी जोन या महत्वपूर्ण फील्ड पद के लिए नामों की चर्चा शुरू होती है, साहब का नाम भी पूरी मजबूती से सामने आ जाता है। लेकिन ऐन वक्त पर बाजी किसी और अफसर के हाथ लग जाती है। दिलचस्प यह है कि साहब का नाम अब तक करीब आधा दर्जन फील्ड पदों के लिए चर्चा में आ चुका है। हर बार उम्मीद बनती है कि इस बार तो नंबर आ ही जाएगा, लेकिन तबादला सूची आते ही उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। साहब की वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए फील्ड पोस्टिंग की उनकी दावेदारी कमजोर भी नहीं मानी जाती। फिर भी न जाने वह कौन-सा नंबर है, जिसका इंतजार साहब लंबे समय से कर रहे हैं। अब आईपीएस महकमे में सवाल यही है—आखिर आईजी साहब का नंबर आएगा कब?
5 पूर्व मुख्य सचिव को बड़ी राहत, पेंशन होगी शुरू
प्रदेश के एक पूर्व मुख्य सचिव को लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत मिलने वाली है। साहब पर आरोप था कि एक निगम में एमडी रहते हुए उन्होंने कुछ निजी कंपनियों को कथित तौर पर गलत तरीके से फायदा पहुंचाया। इसी मामले की जांच पिछले करीब 16 साल से चल रही थी। जांच के चलते साहब की पेंशन भी अटकी हुई थी। लंबे समय से पेंशन शुरू होने का इंतजार कर रहे साहब के लिए अब राहत की खबर है। बताया जा रहा है कि पांचवें फ्लोर से मिली मदद के बाद सरकार उनके मामले में राहत देने की तैयारी में है। इसके बाद साहब की रुकी हुई पेंशन शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक जांच और पेंशन रुकने के बाद अब साहब को राहत मिलने जा रही है। ब्यूरोक्रेसी में इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक चली जांच का आखिर निष्कर्ष क्या निकला और अब अचानक साहब के लिए राहत का रास्ता कैसे खुल गया? फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि सोलह साल से अटकी पेंशन अब चलने की राह पर है और पूर्व मुख्य सचिव साहब को आखिरकार बड़ी राहत मिलने वाली है।
6 लंबे समय से केंद्र में पदस्थ सीनियर आईएएस की होगी प्रदेश वापसी
केंद्र में लंबे समय से पदस्थ एक सीनियर आईएएस साहब की अब प्रदेश वापसी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर साहब की सेवाएं वापस प्रदेश को सौंपने का अनुरोध किया है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार भी सैद्धांतिक तौर पर साहब को वापस भेजने पर सहमत हो गई है। खास बात यह है कि इस बार साहब खुद वापसी की कोशिश में हैं या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें वापस बुलाने की पहल जरूर हुई है। ऐसे में उनकी वापसी को सामान्य पोस्टिंग के तौर पर देखना मुश्किल है। ब्यूरोक्रेसी में माना जा रहा है कि जब सरकार खुद किसी सीनियर अफसर को केंद्र से वापस बुला रही हो, तो उन्हें कोई महत्वपूर्ण और अच्छी जिम्मेदारी मिलना तय माना जा रहा है। वैसे साहब का भी केंद्र में लंबे समय से मन नहीं लगने की बातें सामने आती रही हैं।
7 रिटायर आईएएस मैडम खुद पर लिख रहीं किताब
कुछ महीने पहले रिटायर हुईं एक प्रमोटी आईएएस मैडम अब अपनी कलम के जरिए अपनी कहानी दुनिया के सामने रखने की तैयारी में हैं। मैडम एक किताब लिख रही हैं, जिसका नाम 'The Woman Who Said No' रखा गया है। किताब की डिलीवरी 30 अक्टूबर से शुरू होगी और इसकी कीमत 99 रुपये रखी गई है। खास बात यह है कि यह किताब किसी काल्पनिक किरदार पर नहीं, बल्कि खुद मैडम के अनुभवों और जीवन पर आधारित बताई जा रही है। मैडम ने आईएएस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में किताब के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसके जरिए खासकर महिलाओं को 'No' यानी मना करने का महत्व समझने में मदद मिलेगी। मैडम के मुताबिक, किताब महिलाओं को अपने आत्मसम्मान के साथ बिना किसी अपराधबोध के जीवन जीने का संदेश देती है। यानी जिस मैडम ने वर्षों तक ब्यूरोक्रेसी में रहते हुए फैसले लिए, अब रिटायरमेंट के बाद अपनी कहानी के जरिए दूसरों को भी 'ना कहना' सीखाने निकल पड़ी हैं।
8 कमिश्नर साहब को होना पड़ा अचानक रिलीव
फील्ड में पदस्थ एक कमिश्नर साहब को इन दिनों अचानक रिलीव होकर मंत्रालय की ओर रुख करना पड़ा। दरअसल, सरकार ने पहले ही साहब को फील्ड से हटाकर एक निगम में एमडी की जिम्मेदारी सौंप दी थी। लेकिन साहब को निगम की कुर्सी कुछ खास रास नहीं आ रही थी। वे वहां जाने के बजाय फील्ड में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी या किसी मनपसंद विभाग में पोस्टिंग की जुगाड़ में लगे हुए थे। इसी चक्कर में साहब अपनी मौजूदा पोस्टिंग से रिलीव होने में भी ज्यादा जल्दबाजी नहीं दिखा रहे थे। लेकिन तभी उनके संभाग में एक बड़ी घटना हो गई और पूरा मामला अचानक बदल गया। घटना के बाद सरकार एक्शन मोड में आई और नए कमिश्नर की पोस्टिंग को लेकर तेजी दिखाई गई। सरकार की ओर से यह संदेश भी सामने आने लगा कि बड़ी घटना के मद्देनजर संभाग में नए कमिश्नर को भेजा जा रहा है। बस फिर क्या था, पुराने साहब के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे और उन्हें रातों-रात रिलीव होकर नई जिम्मेदारी के लिए रवाना होना पड़ा।
9 प्रमोटी आईएएस के अरमानों पर फिर गया पानी
लेन-देन की शिकायतों के बाद एक बड़े और मलाईदार जिले की कलेक्टरी से हटाए गए प्रमोटी आईएएस को मंत्रालय में लूप लाइन माने जाने वाले विभाग में भेज दिया गया था। लेकिन साहब ने इसे अपनी मंजिल नहीं माना। कुछ ही समय बाद फिर से फील्ड में वापसी की जुगाड़ शुरू हो गई। साहब की नजर राजधानी से सटे एक जिले पर थी। उम्मीद थी कि अगली तबादला सूची में नाम आएगा और सरकार उन्हें कलेक्टर बनाकर फील्ड में भेज देगी। साहब को अपनी पोस्टिंग को लेकर पूरा भरोसा था, लेकिन तबादला सूची ने अरमानों पर पानी फेर दिया। नाम तो सूची में आया, लेकिन कलेक्टर की कुर्सी हाथ नहीं लगी। सरकार ने साहब को एक छोटे से संभाग में एडिशनल कमिश्नर बनाकर भेज दिया। यानी फील्ड में वापसी तो हुई, लेकिन उस कुर्सी पर नहीं, जिसकी उम्मीद साहब लगाए बैठे थे। हालांकि साहब को कम आंकना भी ठीक नहीं। उनकी पहचान ऐसे अफसर की बताई जाती है, जो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लिए रास्ता निकालना जानते हैं। महकमे में तो साहब को लेकर यह कहावत तक चलती है कि वे रेत से भी तेल निकालने का हुनर रखते हैं।
10 पॉवर हो तो कलेक्टर मैडम के जैसा
ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों एक महिला आईएएस कलेक्टर की पॉवर को लेकर खूब बातें हो रही हैं। मैडम एक बड़े जिले की कमान संभाल रही हैं और उनके जिले में करीब 40 लोगों की मौत के बाद भी उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि अफसरों के बीच मैडम की मजबूत पकड़ को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। यह पहला मौका भी नहीं है। इससे पहले जब मैडम प्रदेश की आर्थिक राजधानी में आयुक्त के पद पर थीं, तब भी उनके कार्यकाल के दौरान करीब 40 मौतों का मामला सामने आया था। उस समय भी मैडम को पद से नहीं हटाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इसी सरकार के कार्यकाल में एक बस हादसे में करीब एक दर्जन लोगों की मौत के बाद आधा दर्जन आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को हटा दिया गया था। इनमें कलेक्टर भी शामिल थे, जबकि हादसे में कलेक्टर की सीधी भूमिका होने को लेकर भी सवाल उठे थे। अब ब्यूरोक्रेसी में सवाल यही है कि जब सरकार एक ही है, प्रदेश एक ही है और हादसों के बाद जवाबदेही तय करने का सवाल भी एक जैसा है, तो कार्रवाई के पैमाने अलग-अलग क्यों नजर आते हैं? मैडम के मामले में आखिर ऐसा क्या है कि हर बार कुर्सी सुरक्षित बच जाती है?





