MP में बिजली संकट: मांग और उत्पादन में 3,000 मेगावाट का अंतर, कटौती पर विधायक जयवर्धन सिंह ने लिखा पत्र

MP में बिजली संकट: मांग और उत्पादन में 3,000 मेगावाट का अंतर, कटौती पर विधायक जयवर्धन सिंह ने लिखा पत्र
भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती की शिकायतों के बीच कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उन्होंने कटौती का वास्तविक कारण और समय-सारणी सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में बिजली की मांग और उत्पादन के बीच करीब 2,000 से 3,000 मेगावाट का अंतर बताया जा रहा है। बिजली की मांग लगभग 15,000 मेगावाट तक पहुंचने के मुकाबले उत्पादन 12,000 से 13,000 मेगावाट के बीच रहने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
खेती के काम के चलते बढ़ी बिजली की मांग
बिजली की मांग बढ़ने के पीछे कृषि कार्यों को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। निमाड़ क्षेत्र में कम बारिश के कारण किसानों ने रबी फसलों की बुवाई से पहले खेतों में सिंचाई यानी पलेवा का काम शुरू कर दिया है। वहीं, भोपाल संभाग समेत कुछ इलाकों में धान की फसलों को पकने के अंतिम चरण में पानी की जरूरत है। इससे कृषि फीडरों पर बिजली का दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा, मौसम में बदलाव और हालिया तूफानों के कारण बिजली ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई है।
जयवर्धन सिंह ने पत्र लिखकर उठाया मुद्दा
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अघोषित और अनियमित बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि अनिश्चित समय तक बिजली बंद रहने से किसानों की रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ और आरती के समय बिजली कटौती होने से धार्मिक आयोजनों में परेशानी का मुद्दा भी उठाया। विधायक ने सरकार से बिजली कटौती की वजह स्पष्ट करने और उसका निर्धारित शेड्यूल सार्वजनिक करने की मांग की है।
कैबिनेट बैठक में भी उठा बिजली कटौती का मुद्दा
प्रदेश में बिजली कटौती की शिकायतों का मुद्दा हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में भी उठने की बात सामने आई है। बताया गया कि कई जनप्रतिनिधियों को देर रात तक कार्यकर्ताओं और आम लोगों के फोन आ रहे हैं। किसान संगठनों ने भी बिजली आपूर्ति को लेकर अपनी चिंता जताई है।
भाजपा सांसद बोले- जल्द दूर होगी समस्या
भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने बिजली संकट को लेकर कहा कि इस बार बारिश की स्थिति अनुकूल नहीं रही। प्राकृतिक परिस्थितियों और तूफानों के कारण भी दिक्कतें पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति सुधारने के लिए काम कर रही है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, जल्द ही समस्या दूर होने की उम्मीद है।
कांग्रेस ने सरकार की बिजली नीति पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता राजुल राज ने बिजली कटौती को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि गांवों में लोगों को 10 घंटे भी नियमित बिजली नहीं मिल पा रही है और इससे किसान परेशान हैं। उन्होंने धान और सोयाबीन की फसलों को नुकसान होने का मुद्दा उठाते हुए बिजली खरीद और बिक्री से जुड़ी सरकार की नीति पर भी सवाल किए।
फिलहाल, बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर, ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की शिकायतों और किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को लेकर बहस तेज है। अब देखना होगा कि बिजली कंपनियां आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाती हैं और सरकार कटौती को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट करती है।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →