MP Fire Safety Rules 2026: मध्य प्रदेश में फायर ऑडिट अनिवार्य, 30 जून तक रिपोर्ट जमा करें; लापरवाही पर कट सकता है बिजली-पानी कनेक्शन

MP Fire Safety Rules 2026: मध्य प्रदेश में फायर ऑडिट अनिवार्य, 30 जून तक रिपोर्ट जमा करें; लापरवाही पर कट सकता है बिजली-पानी कनेक्शन
भोपाल। मध्य प्रदेश में आग की घटनाओं को रोकने और भवनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने नए फायर सेफ्टी नियम लागू कर दिए हैं। 12 अक्टूबर 2026 को इन नियमों का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। नए प्रावधानों के तहत आवासीय इमारतों, अस्पतालों, स्कूलों, होटलों, बाजारों, व्यावसायिक परिसरों और अस्थायी आयोजनों में निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
भवन मालिकों, दुकानदारों, अस्पताल संचालकों, मैरिज गार्डन संचालकों, पंडाल आयोजकों और बिल्डरों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नियमों का पालन नहीं करने और सुरक्षा संबंधी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित करने से लेकर बिजली-पानी की आपूर्ति काटने तक की कार्रवाई हो सकती है।
30 जून तक जमा करनी होगी फायर ऑडिट रिपोर्ट
नए नियमों के अनुसार, भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके साथ ही भवन में लगाए गए अग्निशमन उपकरणों और अन्य सुरक्षा इंतजामों को चालू हालत में रखना होगा। सालाना घोषणा के जरिए सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की पुष्टि भी करनी होगी।
घर और फ्लैट पर भी लागू होंगे नियम
फायर सेफ्टी नियम आवासीय भवनों पर भी लागू किए गए हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति मंजिल 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों के लिए फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा। निर्धारित सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाणपत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान भी हैं।
दुकानों से लेकर अस्पतालों और स्कूलों तक सुरक्षा जरूरी
दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को अपनी श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार अग्नि सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास जैसे इंतजाम शामिल हो सकते हैं।
इन नियमों का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकालना और जान-माल के नुकसान को कम करना है।
प्रमाणपत्र और फायर प्लान की वैधता तय
नियमों में फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र की सामान्य वैधता पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी की वैधता तीन साल बताई गई है। प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा।
कमियां मिलीं तो सुधार के लिए मिलेगा नोटिस
निरीक्षण के दौरान अग्नि सुरक्षा में खामियां मिलने पर सक्षम अधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन का समय दिया जा सकता है। निर्देशों का पालन नहीं होने पर भवन को असुरक्षित घोषित करने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई का प्रावधान है। गंभीर मामलों में भवन सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
शादी समारोह और धार्मिक आयोजनों पर भी नियम
शादी समारोहों, धार्मिक कार्यक्रमों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले अस्थायी पंडालों, टेंट और मंडपों को भी निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और निर्धारित लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है।
फायर टैक्स और सेवा शुल्क का भी प्रावधान
नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2 प्रतिशत की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान बताया गया है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, जबकि आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है। कुछ अग्निशमन सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी है।
फायर सेफ्टी एजेंसियों को लेना होगा लाइसेंस
अग्नि सुरक्षा से जुड़े काम करने वाली एजेंसियों के लिए भी लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी बताया गया है। आवेदन शुल्क 10,000 रुपये है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा। एजेंसियों को उपकरणों की जांच, रखरखाव, दस्तावेजों के संधारण और काम पूरा होने का प्रमाणपत्र देने जैसे दायित्व निभाने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
आग लगने पर विभागों के बीच होगा समन्वय
नए प्रावधानों में फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है। आपात स्थिति में जरूरत के अनुसार बिजली आपूर्ति बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और बचाव कार्य के लिए दूसरे फायर स्टेशनों से कर्मचारी व उपकरण बुलाए जा सकेंगे।
क्या ध्यान रखें? भवन मालिक और संचालक अपनी इमारत की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार लागू नियमों की पुष्टि करें। फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र, ऑडिट की समय-सीमा और जरूरी उपकरणों की जानकारी संबंधित स्थानीय निकाय या अग्निशमन विभाग से जरूर प्राप्त करें।
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