मध्यप्रदेश: शराब ठेका अनियमितता के आरोपों पर डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का एक्शन, ओएसडी दीपम रायचूरा हटाए गए

भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2024-25 के शराब ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी दीपम रायचूरा को तत्काल प्रभाव से प्रभार से मुक्त कर दिया है। देवड़ा ने संबंधित विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस अवधि में कथित अनियमितताएं हुईं, उस समय दीपम रायचूरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे और ओएसडी के रूप में कार्यरत नहीं थे। देवड़ा के मुताबिक, जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके, इसलिए रायचूरा को ओएसडी के प्रभार से हटाया गया है।
यह मामला करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित बयान के बाद चर्चा में आया है। इस बयान में भोपाल की दो शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) के इस्तेमाल में मदद करने के आरोप लगाए गए हैं।
टीटी नगर की दो दुकानों के ठेकों को लेकर आरोप
सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। बयान में दीपम रायचूरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि ठेके हासिल करने के लिए बैंक गारंटी के तौर पर इस्तेमाल की गई कथित फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी मदद की गई।
कथित बयान के मुताबिक, ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये दिए गए। इसमें 50 लाख रुपये नकद देने और शेष 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दावा किया गया है। बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि रकम दीपक दुबे के जरिए दी गई थी। इसके अलावा, बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद किए जाने के दावे भी किए गए हैं।
वर्ष 2022-23 में मुलाकात कराने का दावा
कथित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2022-23 में तनुज सेठी ने मोहित गोगिया की मुलाकात दीपम रायचूरा से कराई थी। इसके बाद रायचूरा ने गोगिया को दीपक दुबे से मिलवाया। बयान में दीपक दुबे को उनके कामकाज देखने वाला व्यक्ति बताया गया है।
फिलहाल, उपमुख्यमंत्री ने विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं और रायचूरा को ओएसडी के प्रभार से मुक्त कर दिया है। शराब ठेकों, एफडीआर और कथित लेनदेन से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी। अभी इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।




