MP Swamitva Yojana 2026: 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की होगी मुफ्त रजिस्ट्री, 17 सितंबर से अभियान शुरू

भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में निजी संपत्तियों के मालिकाना हक को अब और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों का बिना स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितंबर 2026 को इंदौर से इस योजना का प्रदेशव्यापी शुभारंभ करेंगे। अभियान के तहत करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का मुफ्त पंजीयन कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा।
क्या है स्वामित्व योजना?
केंद्र सरकार ने ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में लोगों की संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना शुरू की थी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके पास वर्षों से मकान या जमीन पर कब्जा और उपयोग का अधिकार है, लेकिन उनके पास संपत्ति का ऐसा दस्तावेज नहीं था, जिसे औपचारिक रूप से रजिस्टर्ड माना जा सके।
स्वामित्व योजना के तहत ऐसे आबादी क्षेत्रों का सर्वे कर अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब मध्यप्रदेश सरकार इन अभिलेखों का पंजीयन मुफ्त में कराने जा रही है।
प्रदेश में अब तक 41,568 गांवों में 68.47 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेख इस विशेष अभियान में पंजीकृत किए जाएंगे।
किसे मिलेगा मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा?
इस योजना का लाभ उन ग्रामीण नागरिकों को मिलेगा, जिनकी निजी संपत्ति के अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत तैयार हो चुके हैं।
पंजीयन के बाद संबंधित संपत्ति का दस्तावेजी रिकॉर्ड और मजबूत होगा। इस दस्तावेज का इस्तेमाल भविष्य में घर बनाने, कारोबार, खेती या अन्य आर्थिक जरूरतों के लिए बैंक लोन लेने में किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि संपत्ति का औपचारिक दस्तावेज ग्रामीण परिवारों की आर्थिक गतिविधियों और आजीविका के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
क्या मुफ्त रजिस्ट्री से पुराना विवाद खत्म हो जाएगा?
यह बात समझना जरूरी है कि केवल रजिस्ट्री हो जाने से किसी संपत्ति से जुड़ा पुराना कानूनी विवाद अपने आप खत्म नहीं होगा।
यदि किसी संपत्ति पर पहले से किसी अन्य व्यक्ति का स्वामित्व दावा या कानूनी विवाद है, तो संबंधित पक्ष राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में अपना दावा रख सकता है।
इस योजना के तहत रजिस्ट्री मौजूदा स्वामित्व रिकॉर्ड या पट्टे में दर्ज व्यक्ति के नाम के आधार पर की जाएगी। केवल किसी व्यक्ति के जमीन पर कब्जे में होने या दावा करने से उसके नाम स्वामित्व दर्ज नहीं किया जाएगा।
मुफ्त रजिस्ट्री के लिए क्या करना होगा?
मुफ्त पंजीयन की प्रक्रिया के लिए संबंधित हितग्राही के आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र ID की e-KYC जरूरी होगी।
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
- लैंड लिंकिंग और भूमि स्वामी की आधार e-KYC का काम भूलेख एप/पोर्टल के माध्यम से होगा।
- पंचायत स्तर पर प्रक्रिया के लिए ‘सारा’ मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा।
- इसके बाद ‘संपदा 2.0’ पर रजिस्ट्री के लिए डीड तैयार होगी।
- संबंधित पंजीयन अधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद रजिस्ट्री करेंगे।
इससे ग्रामीण हितग्राहियों को प्रक्रिया के लिए बार-बार जिला या तहसील मुख्यालय जाने की जरूरत कम होगी।
पंचायत स्तर पर कब लगेंगे शिविर?
सरकार ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए ग्राम और पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाने की योजना बनाई है। अभियान को तीन चरणों में चलाया जाएगा।
पहला चरण: 17 से 19 सितंबर 2026 दूसरा चरण: 24 से 26 सितंबर 2026 तीसरा चरण: 1 से 3 अक्टूबर 2026
इन शिविरों की जानकारी संबंधित जिलों की ओर से पात्र हितग्राहियों को दी जाएगी।
गांव में ही पूरी होगी ज्यादातर प्रक्रिया
सरकार ने योजना के लिए स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है। पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाया गया है, जबकि तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वय अधिकारी (PCO) और सहायक विकास विस्तार अधिकारी (ADEO) को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रक्रिया में सबसे पहले स्वामित्व रिकॉर्ड में हितग्राही का नाम देखा जाएगा। इसके बाद पंचायत स्तर पर शिविर में दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी होंगी।
पटवारी वीडियो KYC की प्रक्रिया पूरी करेंगे और संबंधित अधिकारी दस्तावेजों का परीक्षण करेंगे। इसके बाद संपदा 2.0 पर डीड तैयार कर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एक महीने में अभियान पूरा करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में इस विशेष अभियान को करीब एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।
ग्रामीण हितग्राहियों को प्रक्रिया में परेशानी न हो, इसके लिए स्टेट लेवल डेडिकेटेड हेल्पडेस्क भी बनाए जाने की बात कही गई है।
मध्यप्रदेश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
स्वामित्व योजना के तहत तैयार अधिकार अभिलेखों के मुफ्त पंजीयन की व्यवस्था ग्रामीण संपत्तियों को औपचारिक दस्तावेजी रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रजिस्टर्ड दस्तावेज होने से संपत्ति के आधार पर वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने में सुविधा मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवार अपनी संपत्ति को आर्थिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।
हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि रजिस्ट्री अपने आप में किसी पुराने स्वामित्व विवाद का अंतिम समाधान नहीं है। विवाद होने की स्थिति में संबंधित पक्ष को सक्षम राजस्व या न्यायिक मंच पर जाना होगा।
पटवारियों की क्या चिंता है?
इस योजना को लेकर प्रदेश के पटवारियों की ओर से आपत्ति भी सामने आई है। उनका मुख्य विरोध रजिस्ट्री की प्रक्रिया से ज्यादा जिम्मेदारी और भविष्य की कानूनी जवाबदेही को लेकर बताया जा रहा है।
पटवारियों का कहना है कि यदि रजिस्ट्री दस्तावेज में निष्पादन या संबंधित प्रक्रिया से उनका नाम जुड़ता है, तो भविष्य में संपत्ति विवाद होने पर उन्हें भी पक्षकार बनाया जा सकता है।
वे यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि भविष्य में खसरा, नक्शे या ड्रोन सर्वे के रिकॉर्ड में कोई त्रुटि सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। पटवारियों का तर्क है कि रिकॉर्ड में सुधार अथवा संपत्ति विवाद का अंतिम निपटारा उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
यह मुद्दा कैबिनेट की बैठक में भी उठने की जानकारी सामने आई है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने पटवारियों की आपत्ति मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है, इसलिए पटवारियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है और कलेक्टर उन्हें इस संबंध में समझाएं।





