MP Water Resources Department: मंत्री तुलसी सिलावट से मिलने के लिए अब अफसर-कर्मचारियों को लेनी होगी अनुमति, आदेश जारी

MP Water Resources Department: मंत्री तुलसी सिलावट से मिलने के लिए अब अफसर-कर्मचारियों को लेनी होगी अनुमति, आदेश जारी
भोपाल। मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति मुलाकात नहीं कर सकेंगे। मंत्री की आपत्ति के बाद जल संसाधन विभाग ने सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश में बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचने को शिष्टाचार के विरुद्ध बताया गया है और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं करने की हिदायत दी गई है।
यह निर्देश बुधवार को जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में पदस्थ अधीक्षण यंत्री (प्रशासन) आशीष महाजन ने जारी किया। निर्देश में कहा गया है कि सभी मुख्य अभियंता और परियोजना संचालक अपने अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को इसकी जानकारी दें।
मंत्री की आपत्ति के बाद जारी हुआ निर्देश
विभागीय निर्देश के मुताबिक जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने 15 सितंबर 2026 को एक पत्र लिखा था। इसमें बिना अनुमति उनसे मिलने पहुंचने वाले विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
मंत्री ने ऐसी मुलाकातों की व्यवस्था को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। इसके बाद विभाग ने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुलाकात से पहले अनुमति लेने संबंधी निर्देश जारी किए हैं।
अब किसी अधिकारी या कर्मचारी को मंत्री से मिलना है तो उसे पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी होगी।
अनुमति नहीं ली तो अनुशासनात्मक कार्रवाई
विभाग के निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी मुख्य अभियंता और परियोजना संचालक अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को आदेश की जानकारी दें और इसका पालन सुनिश्चित करें।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि भविष्य में बिना अनुमति मंत्री से मिलने की स्थिति दोहराई नहीं जानी चाहिए। आदेश का पालन नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस आदेश के बाद विभागीय स्तर पर मंत्री से मिलने की प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था लागू हो गई है।
कर्मचारी नेताओं ने जताई आपत्ति
मंत्री से मिलने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य किए जाने के फैसले पर कर्मचारी नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारी आमतौर पर अपनी ऐसी समस्याओं को लेकर मंत्री से मिलने पहुंचते हैं, जिनका समाधान विभागीय स्तर पर नहीं हो पाता।
कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि यदि मंत्री से मुलाकात के लिए भी अनुमति जरूरी होगी और बिना अनुमति मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जाएगी, तो कर्मचारी अपनी समस्याएं सीधे मंत्री के सामने कैसे रख पाएंगे।
कुछ कर्मचारी नेताओं ने आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए सवाल उठाया है कि विभागीय स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी अपनी बात उच्च स्तर तक कैसे पहुंचाएंगे।
यह कर्मचारी नेताओं की प्रतिक्रिया है। विभाग की ओर से आदेश का उद्देश्य प्रशासनिक अनुशासन और मुलाकात की व्यवस्था को नियंत्रित करना बताया गया है।
प्रमुख अभियंता ने भी मुख्य अभियंताओं को लिखा था पत्र
मंत्री से मुलाकात को लेकर जारी निर्देश से पहले जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा ने भी मुख्य अभियंताओं को पत्र लिखकर विभाग में प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने के निर्देश दिए थे।
12 सितंबर 2026 को लिखे पत्र में प्रमुख अभियंता ने कहा था कि कई अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। उन्होंने इसे मुख्य अभियंताओं के नियंत्रण में लापरवाही का परिणाम बताया था।
पत्र में यह भी कहा गया था कि कई मामलों में अधिकारी-कर्मचारी मुख्य अभियंता के संज्ञान में लाए बिना और अनुमति लिए बिना भोपाल या अन्य स्थानों पर प्रवास करते हैं, जिसे अनुचित बताया गया।
अधीनस्थों की शिकायत पर मुख्य अभियंता जिम्मेदार
प्रमुख अभियंता के पत्र में मुख्य अभियंताओं को उनके अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा गया था।
पत्र में चेतावनी दी गई थी कि भविष्य में अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को लेकर कोई शिकायत सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित मुख्य अभियंता की होगी।
इस तरह जल संसाधन विभाग में एक ओर मंत्री से मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था लागू की गई है, वहीं दूसरी ओर मुख्य अभियंताओं को अपने अधीनस्थ अमले पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk