Neha Pachisia Case: निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया को हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं, मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

जबलपुर। कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया को जमीन सौदे और कथित पद के दुरुपयोग से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से फिलहाल अंतरिम राहत नहीं मिली है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। उसी दिन नेहा पच्चीसिया की अंतरिम राहत की मांग पर भी विचार किया जाएगा।
नेहा पच्चीसिया की ओर से एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। उनके वकीलों ने मामले को दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा है कि एफआईआर में उनकी सीधी आपराधिक भूमिका स्थापित नहीं होती। वहीं राज्य सरकार और अभियोजन ने अंतरिम राहत का विरोध किया है।
क्या है नेहा पच्चीसिया पर मामला?
कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ जमीन सौदे से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज है। पुलिस के अनुसार, मामले में पद के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी, दबाव बनाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
आरोप है कि एक हत्या के मामले में आरोपी परिवार की जमीन को प्रभावित करने के लिए पुलिस पद और अधिकार का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार करीब 82.86 लाख रुपये से अधिक की गाइडलाइन कीमत वाली जमीन की रजिस्ट्री लगभग 18.20 लाख रुपये में कराए जाने का मामला सामने आया है। अभियोजन का आरोप है कि जमीन सौदे में आरोपी पक्ष पर दबाव बनाया गया और पुलिस कार्रवाई से राहत के बदले जमीन का सौदा कराया गया। इन आरोपों की जांच फिलहाल जारी है और इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।
तीन आरोपी फरार, पुलिस ने इनाम घोषित किया
इस मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी के नाम भी सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। नेहा पच्चीसिया की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गई हैं और उनके खिलाफ इनाम भी घोषित किया गया है।
पुलिस ने उनके विदेश जाने की आशंका को देखते हुए लुकआउट सर्कुलर की प्रक्रिया भी शुरू की है। मामले की जांच के लिए SIT भी गठित की गई है। SIT ने कथित पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी थीं।
याचिकाकर्ता ने कहा- एफआईआर में सीधी भूमिका नहीं
हाईकोर्ट में नेहा पच्चीसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें दुर्भावना के चलते मामले में फंसाया गया है।
बचाव पक्ष का कहना है कि एफआईआर में नेहा की कोई ऐसी सीधी भूमिका नहीं दिखाई गई है, जिससे उनके खिलाफ दर्ज अपराध प्रथम दृष्टया साबित हो। यह भी तर्क दिया गया कि उनका अन्य आरोपियों के साथ किसी तरह का प्रत्यक्ष संबंध या आपराधिक सांठगांठ स्थापित नहीं होती।
याचिकाकर्ता की ओर से उनके पारिवारिक पक्ष का भी उल्लेख किया गया और बताया गया कि वह दो छोटे बच्चों की एकल अभिभावक हैं। इसी आधार पर अदालत से अंतिम निर्णय तक कठोर कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण देने की मांग की गई।
राज्य ने राहत का किया विरोध
राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने अंतरिम राहत का विरोध किया। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि नेहा पच्चीसिया लगातार फरार हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।
अभियोजन ने जांच के दौरान सामने आए पुलिसकर्मियों के बयानों और अन्य सामग्री का हवाला देते हुए सह-आरोपी क्षितिज राज के साथ उनके कथित संबंधों का भी उल्लेख किया। अभियोजन के अनुसार, दोनों के एक ही मकान में रहने से संबंधित जानकारी जांच में सामने आई है। हालांकि इन तथ्यों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।
अग्रिम जमानत भी हो चुकी है खारिज
इस मामले में नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका कटनी की सत्र अदालत में भी खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।
अब हाईकोर्ट में उनके सामने दो प्रमुख कानूनी मुद्दे हैं—एफआईआर को चुनौती और अंतरिम राहत की मांग। 21 सितंबर को राज्य सरकार का विस्तृत जवाब रिकॉर्ड पर आने के बाद अदालत अंतरिम राहत के आवेदन पर सुनवाई करेगी।
पहले भी हाईकोर्ट में प्रशासनिक आदेश को चुनौती दे चुकी हैं
नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी कटनी में उनसे तीन थानों का प्रभार वापस लिए जाने के पुलिस अधीक्षक के प्रशासनिक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे चुकी थीं। अगस्त में हाईकोर्ट ने उस मामले में प्रशासनिक आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद जमीन सौदे से जुड़ी एफआईआर और विभागीय कार्रवाई का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। सरकार ने कहा था कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पद के दुरुपयोग या दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
21 सितंबर पर टिकी नजर
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतिम राहत नहीं दी है। राज्य सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। अब 21 सितंबर 2026 को अदालत याचिका और अंतरिम राहत की मांग पर आगे सुनवाई करेगी।
इस मामले में जमीन सौदे, कथित पद के दुरुपयोग और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में ही होगा।





