MP Swamitva Yojana: नितिन नबीन ने इंदौर से शुरू किया फ्री रजिस्ट्री अभियान, 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों को मिलेगा मालिकाना हक

MP Swamitva Yojana: नितिन नबीन ने इंदौर से शुरू किया फ्री रजिस्ट्री अभियान, 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों को मिलेगा मालिकाना हक
इंदौर। मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी की संपत्तियों के मुफ्त पंजीयन के बड़े अभियान की शुरुआत गुरुवार को इंदौर से हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 का प्रदेशव्यापी शुभारंभ किया गया। अभियान के तहत पात्र ग्रामीण निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का पंजीयन बिना स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के किया जाएगा। राज्य सरकार ने करीब 50 लाख निजी ग्रामीण संपत्तियों के मुफ्त पंजीयन का लक्ष्य रखा है।
कार्यक्रम में प्रदेश में सबसे पहले आगर-मालवा के बड़ौद निवासी सीताराम को पंजीकृत दस्तावेज दिया गया। इसके बाद रायसेन के माखन सिंह गुर्जर को मालिकाना हक का दस्तावेज सौंपा गया।
नितिन नबीन बोले- आत्मसम्मान से जीने का अधिकार मिला
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि यह केवल संपत्ति की सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि इससे बड़ी आबादी को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिला है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रयास की शुरुआत की, उसे मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जमीन पर उतारा है।
नितिन नबीन के मध्य प्रदेश दौरे का यह पहला बड़ा कार्यक्रम है। इससे पहले वे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे रोड शो के जरिए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने इसे ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
योजना के तहत पात्र हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
राज्य सरकार के अनुसार ग्रामीण आबादी भूमि के ड्रोन सर्वे के आधार पर संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इन्हीं अभिलेखों में दर्ज पात्र संपत्तियों को पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
घर-घर पहुंचेगी रजिस्ट्री की प्रक्रिया
सरकार ने पंजीयन प्रक्रिया को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पटवारियों को निष्पादन अधिकारी और तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा राजस्व निरीक्षकों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। पंचायत स्तर पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।
पहले चरण के शिविर 17 से 19 सितंबर, दूसरे चरण के 24 से 26 सितंबर और तीसरे चरण के शिविर 1 से 3 अक्टूबर तक प्रस्तावित हैं। पंजीकृत दस्तावेज लाभार्थियों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।
नितिन नबीन का 5 किलोमीटर रोड शो
स्वामित्व योजना के कार्यक्रम से पहले नितिन नबीन ने इंदौर एयरपोर्ट से गांधी नगर क्षेत्र तक रोड शो किया। विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। रिपोर्टों के मुताबिक रोड शो का मार्ग करीब 5 किलोमीटर रहा।
रोड शो के दौरान गांधी नगर चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने बाद में ट्रैफिक व्यवस्था को सामान्य कराया।
मंच पर दिखी भाजपा की राजनीतिक गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नितिन नबीन को श्रीगणेश की प्रतिमा भेंट की। नितिन नबीन ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत माता की जय के साथ की और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर तथा बाबा महाकाल का उल्लेख किया।
नितिन नबीन ने मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपना अभिभावक बताया। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस से भाजपा में आए राकेश सिंह यादव, अक्षय कांति बम और स्वप्निल कोठारी भी मंच पर मौजूद नेताओं के बीच नजर आए।
कैलाश विजयवर्गीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर मंच से उन्हें शुभकामनाएं देते हुए जन्मदिन का गीत भी गाया।
स्वामित्व योजना के तहत क्या मिलेगा?
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को स्पष्ट और औपचारिक बनाना है। ड्रोन सर्वे के जरिए संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करने के बाद पात्र संपत्तियों के अधिकार अभिलेख बनाए गए हैं।
अब इन अभिलेखों के आधार पर पंजीकृत डीड उपलब्ध कराई जा रही है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पात्र हितग्राही को पंजीयन के लिए स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।
सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया से ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का औपचारिक दस्तावेज मिलेगा और संपत्ति से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट होगा।
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