MP Teacher Recruitment Protest: 28वें दिन भी आंदोलन, 7 दिन से निर्जला अनशन; खून से लिखा इच्छामृत्यु का पत्र

भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। भोपाल में डीपीआई कार्यालय के सामने पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत सात दिन से निर्जला अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि लगातार पानी नहीं पीने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है और बुधवार रात उनकी हालत कई बार खराब हुई।
इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से पदवृद्धि और दूसरी काउंसलिंग की मांग के बावजूद समाधान नहीं होने से वे निराश हैं।
7 दिन से पानी नहीं पीने का दावा
नरेंद्र राजपूत के मुताबिक वह पिछले सात दिनों से पानी तक नहीं पी रहे हैं। उन्होंने सीने में दर्द और रक्तचाप बढ़ने की शिकायत बताई। उनका आरोप है कि तबीयत बिगड़ने के बावजूद गुरुवार सुबह तक डॉक्टर उनकी जांच के लिए नहीं पहुंचे।
राजपूत ने पुलिस अधिकारियों से चिकित्सक बुलाने की मांग किए जाने का भी दावा किया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अनशन के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर तत्काल चिकित्सा निगरानी की जरूरत है।
नरेंद्र राजपूत ब्यावरा के रहने वाले हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि शिक्षक बनना उनका लक्ष्य है और इसी मांग को लेकर वह आंदोलन में शामिल हैं।
बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन
बुधवार रात डीपीआई कार्यालय के बाहर अचानक तेज बारिश हुई। बारिश के कारण प्रदर्शनकारियों के साथ उनका सामान भी भीग गया, लेकिन उन्होंने धरना जारी रखा। निर्जला अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत भी बारिश के बीच धरने पर बैठे रहे।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग के साथ डीपीआई प्रशासन के कथित रवैये के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार और विभाग को उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए।
खून से लिखा पत्र, इच्छामृत्यु की मांग
आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने अपने खून से एक पत्र लिखा। इसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की गई है। पत्र में शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग का उल्लेख किया गया है। नरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा कि अभ्यर्थी उन्हें कोई उपहार देने की स्थिति में नहीं हैं और उन्होंने अपनी मृत्यु को ही उपहार के रूप में मांगने की बात कही।
यह मांग आंदोलनकारियों की ओर से उठाई गई है। इसे किसी सरकारी स्वीकृति या औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आश्वासन के बाद पहले खत्म किया था अनशन
नरेंद्र राजपूत का कहना है कि इससे पहले भी उन्होंने शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। उनके मुताबिक उस समय पद बढ़ाने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया था।
राजपूत का आरोप है कि बाद में आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते उन्होंने दोबारा आंदोलन शुरू किया और इस बार सात दिन से निर्जला अनशन पर हैं।
वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाना है।
वर्ग-2 माध्यमिक शिक्षक भर्ती में मांग:
- कम से कम 10,000 पद बढ़ाए जाएं।
- प्रत्येक विषय में कम से कम 3,000 पद बढ़ाने की मांग।
- पद बढ़ाकर दूसरी काउंसलिंग कराई जाए।
वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में मांग:
- कम से कम 25,000 पद बढ़ाए जाएं।
- दूसरी काउंसलिंग शुरू की जाए।
अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में शिक्षक पदों के रिक्त होने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2018 और 2022 की शिक्षक भर्ती में भी पद बढ़ाकर अतिरिक्त काउंसलिंग कराई गई थी।
28वें दिन पहुंचा आंदोलन
अभ्यर्थियों के मुताबिक पदवृद्धि की मांग को लेकर उनका संघर्ष पिछले सात-आठ महीनों से अलग-अलग स्तरों पर जारी है। भोपाल में चल रहा आंदोलन अब 28वें दिन पहुंच गया है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि सीमित पदों के कारण परीक्षा में सफल होने के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से वे पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग की मांग पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल डीपीआई कार्यालय के सामने धरना जारी है। एक तरफ नरेंद्र राजपूत के सात दिन से निर्जला अनशन और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आंदोलनकारियों की चिंता सामने आ रही है, तो दूसरी तरफ अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग कर आंदोलन को और गंभीर रूप दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।





