MP Water Corporation: मध्यप्रदेश जल निगम का बदला नाम, अब ‘जल एवं स्वच्छता निगम’; MD को 25 करोड़ तक टेंडर मंजूर करने का अधिकार

भोपाल। मध्यप्रदेश में जलापूर्ति के साथ अब स्वच्छता प्रबंधन की जिम्मेदारी भी जल निगम के दायरे में आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के संचालक मंडल की 26वीं बैठक में निगम के पुनर्गठन और नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
अब मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित को ‘मध्यप्रदेश जल एवं स्वच्छता निगम’ के नाम से जाना जाएगा। इसका संक्षिप्त नाम एमपी-वास्को (MP-WASCO) होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई जिम्मेदारियों और नए नाम के साथ निगम जल विकास तथा स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में नए लक्ष्यों के साथ काम करेगा।
MD को अब 25 करोड़ रुपये तक टेंडर मंजूर करने का अधिकार
बैठक में निगम के प्रबंध संचालक यानी MD की वित्तीय शक्तियों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब MD 25 करोड़ रुपये तक के टेंडर मंजूर कर सकेंगे।
इससे पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी। यानी MD के स्तर पर टेंडर मंजूरी की वित्तीय सीमा को पांच गुना बढ़ाया गया है।
यह बदलाव Project Implementation and Execution Methodology के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य निर्धारित वित्तीय सीमा तक आने वाली परियोजनाओं के टेंडर को मंजूरी देने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए हर बार उच्च स्तर से स्वीकृति लेने की जरूरत कम हो सकती है।
60 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना में 26% हिस्सेदारी
बोर्ड ने जल निगम को 60 मेगावॉट की ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना में भी भागीदारी की मंजूरी दी है। कैप्टिव मोड में विकसित की जाने वाली इस परियोजना के लिए गठित प्रोजेक्ट कंपनी में जल निगम की 26 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी होगी।
परियोजना कंपनी में जल निगम की ओर से प्रतिनिधित्व के लिए MD को अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही निगम की हिस्सेदारी को डीमैटीरियलाइज्ड रूप में रखने की भी मंजूरी दी गई है।
यह फैसला जल निगम की गतिविधियों को पारंपरिक जलापूर्ति परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
2026-27 के लिए 57 करोड़ रुपये का बजट मंजूर
संचालक मंडल की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 57 करोड़ रुपये के बजट अनुमान को भी मंजूरी दी गई।
इसके अलावा बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के संचालक मंडल के प्रतिवेदन और वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखों को भी अनुमोदित किया।
सुमित बोस फिर बने स्वतंत्र निदेशक
बैठक में सुमित बोस को मध्यप्रदेश जल निगम के संचालक मंडल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
इसके अलावा जल निगम के इक्विटी शेयरों को नए पदाधिकारियों को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को भी बोर्ड की स्वीकृति मिली।
जल और स्वच्छता प्रबंधन पर बढ़ेगा फोकस
निगम के नाम और दायरे में बदलाव के बाद अब इसका फोकस केवल जलापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। स्वच्छता प्रबंधन को भी इसके कार्यक्षेत्र में शामिल किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, नई संरचना के तहत जल विकास, स्वच्छता और संबंधित परियोजनाओं को अधिक व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं MD की टेंडर मंजूरी सीमा बढ़ने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में निर्णय प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।





