Supreme Court E-Challan: ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो बिजली बिल से जुड़ सकता है बकाया, वाहन-लाइसेंस पर भी कार्रवाई के सुझाव

Supreme Court E-Challan: ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो बिजली बिल से जुड़ सकता है बकाया, वाहन-लाइसेंस पर भी कार्रवाई के सुझाव
नई दिल्ली। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद ई-चालान का भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदमों पर विचार करने के संकेत दिए हैं। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बकाया ई-चालान की रकम वसूलने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी तरीके तलाशने को कहा है।
सुनवाई के दौरान बकाया चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव भी सामने आया। इसके अलावा बकाया चालान वाले वाहनों की रजिस्ट्रेशन संबंधी सेवाएं, फिटनेस और पीयूसी प्रमाणपत्र तथा ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं को रोकने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
सिर्फ ई-चालान काटना पर्याप्त नहीं
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सोमवार को एस. राजसीकरन बनाम भारत संघ मामले में सुनवाई कर रही थी। मामला ई-चालान और ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि बड़ी संख्या में ई-चालान जारी करना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लगाए गए जुर्माने की रकम की वास्तविक वसूली कितनी हो रही है।
इसी संदर्भ में अदालत ने सुझाव दिया कि यदि लोग लंबे समय तक ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं करते हैं तो बकाया राशि की वसूली के लिए बिजली बिल जैसी आवश्यक सेवाओं से इसे जोड़ने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुनवाई के दौरान दिए गए ऐसे सुझाव अपने आप में लागू नियम या आदेश नहीं हैं। इनके आधार पर राज्यों और संबंधित विभागों द्वारा आगे क्या व्यवस्था बनाई जाती है, यह अलग प्रक्रिया का विषय होगा।
करीब ₹45,000 करोड़ के ई-चालान बकाया
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब ₹45,000 करोड़ की ई-चालान राशि अभी वसूलना बाकी है। वहीं करीब ₹25,000 करोड़ की राशि की वसूली किए जाने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई।
बड़ी मात्रा में बकाया राशि को देखते हुए अदालत ने चालान वसूली के ऐसे तरीके तलाशने की जरूरत बताई, जिनका वास्तविक प्रभाव जमीन पर दिखाई दे।
वाहन से जुड़ी सेवाओं पर लग सकती है रोक
सुनवाई के दौरान बकाया ई-चालान वाले वाहनों के संबंध में परिवहन विभाग की सेवाओं को सीमित करने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
इनमें वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के नवीनीकरण, डुप्लीकेट RC जारी करने और वाहन के स्वामित्व में बदलाव जैसी सेवाओं को बकाया चालान से जोड़ने का सुझाव शामिल है।
इसके अलावा परिवहन पोर्टल पर बकाया चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और ऐसे वाहनों का ओनरशिप ट्रांसफर रोकने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया।
फिटनेस और PUC को भी चालान से जोड़ने पर विचार
बकाया चालान की वसूली के लिए वाहन के फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से संबंधित सेवाओं पर भी रोक लगाने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई।
इसी तरह ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण से संबंधित कार्रवाई पर भी विचार किया गया। इन सभी विकल्पों का उद्देश्य लंबे समय से लंबित ई-चालानों की वसूली सुनिश्चित करना है।
फिलहाल ये उपाय अदालत में चर्चा और सुझाव के स्तर पर हैं। इनके वास्तविक क्रियान्वयन के लिए संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई जरूरी होगी।
सड़क पर रैंडम चेकिंग का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान वाले वाहनों की पहचान के लिए सड़क पर रैंडम चेकिंग का सुझाव भी दिया।
यदि जांच के दौरान किसी वाहन का लंबे समय से ई-चालान बकाया पाया जाता है तो नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। गंभीर या लंबे समय से लंबित मामलों में वाहन जब्त करने जैसे कदमों पर भी चर्चा हुई।
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्देश केवल कागजों पर नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभावी पालन जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
कोर्ट ने 14 साल पुराने निर्देशों के पालन पर पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले करीब 14 वर्षों से दिए जा रहे सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देशों का जमीन पर कितना पालन हुआ है।
अदालत ने कहा कि यदि निर्देश केवल कागजों तक सीमित रहेंगे और उनका प्रभावी पालन नहीं होगा तो आगे कड़े कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल से मामले में दिए गए निर्देशों की स्थिति को दर्शाने वाला एक चार्ट तैयार करने को कहा है। इसमें अब तक जारी निर्देश, उन्हें लागू करने के लिए निर्धारित समयसीमा, वर्तमान स्थिति और अमिकस की टिप्पणियां शामिल की जाएंगी।
2012 से सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
यह मामला वर्ष 2012 में कोयंबटूर के ऑर्थोपेडिक सर्जन एस. राजसीकरन की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
याचिका में सड़क सुरक्षा बेहतर करने, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, सड़क बुनियादी ढांचे में सुधार और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को उचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए समन्वित कदम उठाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पिछले कई वर्षों से सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानून के प्रभावी पालन को लेकर निर्देश जारी करता रहा है। अक्टूबर 2025 के आदेश में भी अदालत ने सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्देशों के अनुपालन की निगरानी जारी रखी थी।
अब ई-चालान की बड़ी बकाया राशि के मुद्दे पर हुई सुनवाई में अदालत का जोर सिर्फ चालान जारी करने के बजाय जुर्माने की प्रभावी वसूली और नियमों के पालन पर दिखाई दिया है।
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