किरनापुर में महिला से मारपीट मामले में 4 पुलिसकर्मियों पर FIR, एसआईटी जांच में गिरफ्तारी और पूछताछ की प्रक्रिया में अनियमितता

बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में चोरी के मामले की जांच के दौरान महिला के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में अब निलंबित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
मामले में उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इससे पहले शिकायत सामने आने के बाद चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था और मामले की जांच के लिए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।
21 अगस्त की चोरी के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
मामला किरनापुर के पोस्ट ऑफिस के सामने 21 अगस्त 2026 को हुई करीब ₹50 हजार की चोरी से जुड़ा है। चोरी की जांच के दौरान पुलिस टिमकीटोला निवासी सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी को पूछताछ के लिए थाने लाई थी।
पीड़िता और उसके परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि थाने में पूछताछ के दौरान दंपती के साथ मारपीट की गई और महिला के साथ दुर्व्यवहार हुआ। मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर जांच शुरू की थी।
एसआईटी जांच में कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल
एसआईटी की जांच में महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रखने और पूछताछ की प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की गिरफ्तारी और उसे थाने में रखने की प्रक्रिया में सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जांच में पुलिस कार्रवाई के दौरान महिला और उसके पति पर कथित तौर पर अनुचित दबाव डालने और डराने-धमकाने से जुड़े आरोपों की भी जांच की गई। नईदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ही चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
केवल इकबालिया बयान के आधार पर कार्रवाई का आरोप
जांच में यह भी सवाल सामने आया कि महिला के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए गए थे या नहीं। एसआईटी ने पूछताछ और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया की समीक्षा की।
रिपोर्ट के आधार पर पुलिसकर्मियों पर महिला और उसके पति को कथित रूप से अवैधानिक तरीके से थाने में रखने, डराने-धमकाने और दबाव बनाने से संबंधित आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
एसआईटी की जांच के बाद चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ BNS की धारा 127, 115(2), 296(बी), 351(1) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई है।
मामले में आगे की जांच जारी है। FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसी घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों और पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल करेगी।
महिला से कथित मारपीट के बाद हुआ था बड़ा प्रदर्शन
मामले ने 15 सितंबर को उस समय बड़ा रूप ले लिया था, जब मरार माली समाज के लोगों ने किरनापुर में प्रदर्शन करते हुए थाने का घेराव किया था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी तथा पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
इसके बाद पुलिस ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे सहित 63 नामजद लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव और तोड़फोड़ से जुड़े मामले में की गई थी।
अब पुलिसकर्मियों पर आपराधिक कार्रवाई
किरनापुर प्रकरण में अब मामला दो स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। एक तरफ महिला और उसके पति के साथ थाने में हुई कथित मारपीट तथा पुलिस कार्रवाई की जांच के आधार पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। दूसरी ओर 15 सितंबर के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण की जांच जारी है।
चार पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज होने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के नतीजों पर नजर रहेगी।





