दतिया विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती, 1991 की FIR छिपाने का आरोप

दतिया विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती, 1991 की FIR छिपाने का आरोप
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस से जीत दर्ज करने वाले विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर 2026 को याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी शपथपत्र में वर्ष 1991 में दर्ज एक आपराधिक मामले से संबंधित जानकारी का उल्लेख नहीं किया।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में दावा किया गया है कि घनश्याम सिंह ने अपने शपथपत्र में दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी, लेकिन 1991 की एक FIR का उल्लेख नहीं किया। अब इसी आधार पर उनके निर्वाचन को चुनौती दी गई है।
राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए चक्काजाम से जुड़ी FIR
याचिका में जिस पुराने मामले का जिक्र किया गया है, वह 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम से जुड़ा बताया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, 21 मई 1991 के बाद दतिया में झांसी चुंगी, किला चौक सहित अलग-अलग स्थानों पर चक्काजाम हुआ था। इस मामले में करीब 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने और उनमें घनश्याम सिंह का नाम होने का दावा याचिका में किया गया है। हालांकि, इस पुराने मामले और शपथपत्र में इसके कथित तौर पर उल्लेख नहीं किए जाने से जुड़े आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
घनश्याम सिंह ने कितने वोटों से जीता था चुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था।
घनश्याम सिंह को 66,757 वोट, जबकि आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले थे।
शपथपत्र में पहले से दर्ज हैं दो मामले
उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार घनश्याम सिंह ने 2026 के दतिया उपचुनाव के अपने चुनावी शपथपत्र में दो लंबित मामलों का उल्लेख किया था। इनमें एक मामला IPC की कई धाराओं से संबंधित है, जबकि दूसरा मामला IPC की धाराओं 188, 269, 270 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 से जुड़ा बताया गया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन मामलों के अलावा वर्ष 1991 की FIR से संबंधित जानकारी भी शपथपत्र में दी जानी चाहिए थी। इसी बिंदु को याचिका में चुनौती का आधार बनाया गया है।
क्या घनश्याम सिंह की सदस्यता जा सकती है?
फिलहाल ऐसा कोई न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है, जिससे घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई हो। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि याचिका में लगाए गए आरोप कानूनी रूप से किस हद तक स्वीकार किए जाते हैं।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दतिया विधानसभा सीट पर दोबारा उपचुनाव होगा। फिलहाल मामला अदालत के समक्ष है।
राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद हुआ था उपचुनाव
दतिया सीट पर इससे पहले भी विधानसभा सदस्यता को लेकर कानूनी विवाद हुआ था। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद यह सीट खाली हुई थी और 30 जुलाई 2026 को उपचुनाव कराया गया।
उपचुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने भाजपा के आशुतोष तिवारी को हराकर दतिया सीट दोबारा कांग्रेस के खाते में ला दी थी।
अब घनश्याम सिंह के निर्वाचन के खिलाफ दाखिल याचिका के बाद दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी वजह से सुर्खियों में है। मामले में हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई से ही तस्वीर साफ होगी।
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