Divya Ahirwar Bail: 41 दिन बाद पन्ना जेल से रिहा हुईं दिव्या अहिरवार, हाईकोर्ट से मिली जमानत, मां से लिपटकर रो पड़ीं

पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहीं 25 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार 41 दिन बाद जेल से रिहा हो गई हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ से जमानत मिलने के बाद उन्हें पन्ना जिला जेल से रिहा किया गया। जेल से बाहर आते ही दिव्या अपनी मां गौरा बाई से लिपटकर फफक पड़ीं। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक उनका स्वागत करने पहुंचे। रिहाई के बाद दिव्या ने कहा कि जेल में रहने के दौरान उनका हौसला और मजबूत हुआ है।
हाईकोर्ट ने दी जमानत, पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
दिव्या अहिरवार की जमानत याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस विवेक अग्रवाल की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें जमानत देने का आदेश दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने पन्ना पुलिस की कार्रवाई और दिव्या के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सवाल उठाए। दिव्या के खिलाफ दर्ज प्रकरणों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर उनके समर्थक भी लगातार विरोध कर रहे थे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
जेल के बाहर पहुंचे करीब 500 ग्रामीण
दिव्या अहिरवार की रिहाई की खबर मिलते ही पन्ना जिला जेल के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक एकत्र हो गए। बताया जा रहा है कि पन्ना और आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों से करीब 500 लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे थे। कई ग्रामीण मोटरसाइकिल और ऑटो से जेल पहुंचे, जबकि कुछ लोग पैदल ही वहां आए। जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों ने दिव्या को फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।
मां को देखते ही फफक पड़ीं दिव्या
जेल से रिहाई के दौरान सबसे भावुक पल उस समय देखने को मिला, जब दिव्या अहिरवार अपनी मां गौरा बाई से मिलीं। करीब 41 दिन बाद बेटी को सामने देखकर गौरा बाई की आंखों से आंसू छलक पड़े। दिव्या भी अपनी मां से लिपटकर रोने लगीं। इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीण और समर्थक भी भावुक नजर आए। जेल से रिहाई के बाद दिव्या का पन्ना नगर में स्वागत किया गया और समर्थकों ने जुलूस भी निकाला।
'जेल से और मजबूत होकर लौटी हूं'
जेल से बाहर आने के बाद दिव्या अहिरवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जेल में रहने के दौरान उनका हौसला कमजोर नहीं हुआ, बल्कि वे पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौटी हैं। उन्होंने पन्ना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए। दिव्या का कहना है कि वे प्रभावित परिवारों के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए कर रहीं आंदोलन
दिव्या अहिरवार पन्ना और छतरपुर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना तथा अन्य विकास योजनाओं से प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर सक्रिय रही हैं। वे विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाती रही हैं। उनके आंदोलन से बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं। इन परिवारों की प्रमुख मांग है कि विकास परियोजनाओं के कारण प्रभावित होने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा की जाए।
रिहाई के बाद फिर उठा विस्थापन का मुद्दा
दिव्या अहिरवार की रिहाई के बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। समर्थकों ने उनकी रिहाई का स्वागत किया है। वहीं, दिव्या ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। हालांकि, हाईकोर्ट से जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।





