Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat Bhopal: आज शाम 6:02 बजे से लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि और सामग्री

भोपाल। दीपों का पर्व दीपावली रविवार को राजधानी भोपाल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। घरों, मंदिरों और बाजारों में दीपोत्सव की तैयारियां की गई हैं। इस वर्ष दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन के लिए शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। इस दौरान प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न का संयोग रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, स्थिर लग्न में महालक्ष्मी पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है। इस बार अमावस्या तिथि दो दिन रहने और सोमवार को सोमवती अमावस्या पड़ने से पर्व का धार्मिक महत्व भी बढ़ गया है।
भोपाल में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म शक्ति ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार, दीपावली पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करना शुभ माना जाता है। भोपाल में रविवार को सूर्यास्त शाम 5:38 बजे होगा। इसके साथ ही प्रदोष काल शुरू होगा, जो रात 8:13 बजे तक रहेगा। वहीं वृषभ स्थिर लग्न शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक रहेगा।
लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ समय
सूर्यास्त: शाम 5:38 बजे
प्रदोष काल: शाम 5:38 बजे से रात 8:13 बजे तक
वृषभ स्थिर लग्न: शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक
महालक्ष्मी पूजन: शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक
अमावस्या प्रारंभ: 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे
अमावस्या समाप्त: 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे
ऐसे करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, दीपावली पर पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। इसके बाद पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। उन्हें तिलक लगाकर दूर्वा, पुष्प और मोदक अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल स्थापित करें।
इसके बाद भगवान कुबेर का स्मरण कर परिवार में सुख-समृद्धि और व्यापार में उन्नति की कामना करें। व्यापारी अपने बहीखातों, कलम और लेखा-जोखा का पूजन भी कर सकते हैं।
अंत में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें तथा परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में प्रसाद वितरित करें।
लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी सामग्री
दीपावली पर पूजन के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन, फूल, माला, कमल पुष्प, लाल कपड़ा, कलश, नारियल, आम के पत्ते, सुपारी, पान, लौंग और इलायची की व्यवस्था करें।
इसके अलावा धूप, अगरबत्ती, घी, रुई की बत्ती, मिट्टी के दीपक, फल, मिठाई, खील, बताशे, पंचामृत, गंगाजल और पूजा की थाली भी तैयार रखें।
बहीखाता पूजन करने वाले व्यापारी नए बहीखाते और कलम रख सकते हैं। पूजा में चांदी या अन्य धातु के सिक्के भी रखे जा सकते हैं।
लक्ष्मी पूजन के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
दीपावली पर श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। गणेश मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
महालक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
कुबेर मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
मंत्र जाप के बाद परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
घर के मुख्य द्वार और तुलसी चौरे पर करें दीपदान दीपावली पर घर के मुख्य द्वार, आंगन, खिड़कियों, पूजा स्थल और तुलसी चौरे पर दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपदान अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। कई परिवारों में घर के बाहर दीपक रखने और यमदीपदान की परंपरा भी निभाई जाती है। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखने तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और मिठाई का दान करने की भी परंपरा है।
दो दिन अमावस्या का विशेष संयोग
इस वर्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। रविवार को प्रदोष काल में दीपावली और महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या होने से स्नान, दान, जप और पितरों के निमित्त धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व रहेगा।
दीपावली के बाद इन तारीखों पर होंगे प्रमुख पर्व
8 नवंबर, रविवार: दीपावली और महालक्ष्मी पूजन
9 नवंबर, सोमवार: सोमवती अमावस्या, स्नान और दान-पुण्य
10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव
11 नवंबर, बुधवार: चित्रगुप्त पूजन और भाई दूज
दीपावली पर राजधानी भोपाल में शाम के समय घरों और मंदिरों में लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ दीपदान किया जाएगा। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।





