आदि कैलाश यात्रा पर इंदौर के 27 वर्षीय तिलक शर्मा की मौत, महाकाल मंदिर के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट

इंदौर/पिथौरागढ़। उत्तराखंड की आदि कैलाश यात्रा पर गए इंदौर निवासी 27 वर्षीय तिलक शर्मा की मौत हो गई। दर्शन कर लौटते समय उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। दोस्तों ने ऑक्सीजन किट से मदद की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। तिलक इंदौर के सराफा कारोबारी थे और उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट और शृंगार सामग्री तैयार करते थे।
दर्शन से लौटते समय बिगड़ी तबीयत
तिलक के दोस्त प्रतीक के मुताबिक, वे कुल 7 लोग कार से यात्रा पर गए थे। इससे पहले सभी ने नीम करौली बाबा, जागेश्वर और मुक्तेश्वर के दर्शन किए और नैनीताल घूमने के बाद आदि कैलाश पहुंचे थे। दर्शन कर लौटते समय तिलक को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
दोस्तों ने उन्हें ऑक्सीजन किट से ऑक्सीजन दी, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्हें आर्मी बेस कैंप ले जाया गया। वहां रात करीब 8 बजे इंजेक्शन और दवाइयां दी गईं। तबीयत में सुधार नहीं होने पर उन्हें दूसरे बेस कैंप स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने के 10 से 15 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। देर रात उनका शव धारचूला लाया गया।
महाकाल मंदिर के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट
तिलक शर्मा इंदौर के सराफा बाजार में दुकान चलाते थे। दोस्त प्रतीक के अनुसार, वे उज्जैन के महाकाल मंदिर के लिए चांदी की शृंगार सामग्री बनाकर भेजते थे। इसमें भगवान के नेत्र, कान के आभूषण, टीका और छत्र जैसी सामग्री शामिल थी।
तिलक के सोशल मीडिया पेज पर भी महाकाल के लिए चांदी के मुकुट तैयार करने के कई वीडियो मौजूद हैं। इनमें उन्होंने बताया था कि उनके बनाए मुकुट भगवान महाकाल को अर्पित किए जाते हैं और शृंगार में इस्तेमाल होते हैं।
परिजनों के मुताबिक, तिलक परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता भी उनके साथ काम करते थे। अगले साल होली के बाद उनकी शादी होने वाली थी।
परिजनों के पहुंचने के बाद सौंपा जाएगा शव
घटना की सूचना आईटीबीपी ने धारचूला पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर राजकीय चिकित्सालय में रखवाया है। पंचायतनामा और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। तिलक के परिजन इंदौर से उत्तराखंड के लिए रवाना हो चुके हैं।
करीब 5,945 मीटर की ऊंचाई पर है आदि कैलाश का मुख्य पड़ाव
आदि कैलाश यात्रा का मुख्य पड़ाव ज्योलिंगकांग समुद्र तल से करीब 5,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी अधिक ऊंचाई पर कम वायुदाब के कारण सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, चक्कर और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तिलक की मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।





