Jabalpur Balancing Rock: प्राकृतिक धरोहर के पास अवैध निर्माण का आरोप, हाईकोर्ट में जनहित याचिका

मध्य प्रदेश के जबलपुर की प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर ‘बैलेंसिंग रॉक’ के संरक्षण का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। चट्टान से महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला निर्माण और अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), पर्यटन विभाग, सांस्कृतिक विभाग, जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम को पक्षकार बनाया गया है।
30 एकड़ सरकारी जमीन घटकर 0.8 हेक्टेयर रहने का दावा
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 1910 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी। आरोप है कि बाद में जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव के कारण अधिकांश भूमि निजी दर्ज हो गई और अब केवल 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन बची है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि बैलेंसिंग रॉक के बेहद करीब बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इस प्राकृतिक संरचना की सुरक्षा और स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है।
विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर सवाल
मामले में पर्यटन विभाग, एएसआई और नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में उल्लेख है कि पर्यटन विभाग इस क्षेत्र को पुरातत्व विभाग के अधीन बताता है, जबकि एएसआई ने स्थल को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। वहीं, नगर निगम की ओर से निर्माण की जानकारी नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है।
भूकंप में भी कायम रही चट्टान की प्राकृतिक संरचना
जबलपुर की पहचान बन चुकी बैलेंसिंग रॉक अपनी अनोखी प्राकृतिक बनावट के लिए प्रसिद्ध है। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि आसपास हो रहे निर्माण और अतिक्रमण से इस धरोहर को नुकसान पहुंच सकता है। इसी आधार पर इसके संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट से की गईं ये प्रमुख मांगें
जनहित याचिका में बैलेंसिंग रॉक के आसपास चल रहे कथित अवैध निर्माण पर रोक लगाने, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और निर्माण अनुमतियों की निष्पक्ष जांच कराने तथा भूवैज्ञानिकों से चट्टान की स्थिरता का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने महाबलीपुरम की प्रसिद्ध ‘कृष्णा बटर बॉल’ की तर्ज पर बैलेंसिंग रॉक को भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य सरकार के माध्यम से आधिकारिक संरक्षित धरोहर घोषित करने की मांग उठाई है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की कार्यवाही पर नजर रहेगी।





