कान्हा टाइगर रिजर्व में दो बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

जबलपुर: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामलों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सितंबर और अक्टूबर में दो और बाघों की मौत के कारणों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने की। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
बाघों में संक्रमण को लेकर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और वन विभाग से जवाब मांगा। कोर्ट ने सवाल उठाया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास आवारा कुत्तों के टीकाकरण के बावजूद बाघों में संक्रमण और मौतों के मामले सामने क्यों आ रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल टीकाकरण किए जाने की जानकारी पर्याप्त नहीं है और मामले की गहराई से जांच जरूरी है।
CDV वायरस की आशंका का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संभावित खतरे का मुद्दा उठाया गया। याचिका में दावा किया गया कि यह वायरस बाघों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है और उनकी शिकार करने की क्षमता पर असर डाल सकता है। हालांकि, हाल में हुई दोनों बाघों की मौत का कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने के निर्देश
याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में कई बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। कुछ मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वायरस से संक्रमण की पुष्टि होने का दावा भी किया गया है। पूर्व में कुछ बाघों का मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में इलाज किया गया था।
हाईकोर्ट ने शासन और वन विभाग को वन्यजीवों को संक्रमण से बचाने तथा उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी, जिसमें सरकार को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।




