मऊगंज में जल जीवन मिशन पर EOW का शिकंजा, 3.85 करोड़ के काम में गड़बड़ी के आरोप; टंकी ढही, 740 नल कनेक्शन भी जांच के घेरे में

मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में जल जीवन मिशन के तहत कराए गए करीब ₹3.85 करोड़ के कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। EOW ने तत्कालीन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के तीन अधिकारियों और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच के दौरान कई स्थानों पर काम अधूरा मिलने, रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाए जाने तथा भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठने की बात सामने आई है। मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जेपी (जनार्दन प्रसाद) द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पांडेय, उपयंत्री एपी तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी को आरोपी बनाया गया है।
पानी भरते ही ढह गई करीब 30 फीट ऊंची टंकी
मामले की जांच में खटखरी गांव की पानी की टंकी भी अहम कड़ी बनी। रिपोर्टों के अनुसार करीब 30 फीट ऊंची ओवरहेड टंकी का निर्माण किया गया था। मार्च 2026 में पहली बार टेस्टिंग के दौरान जब इसमें पानी भरा गया तो टंकी ढह गई।
इस घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे और योजना के दूसरे कार्यों की भी जांच की गई। EOW की जांच में दस्तावेजों में दर्ज कार्य और मौके पर मिली स्थिति में अंतर सामने आने का दावा किया गया है।
740 नल कनेक्शन का रिकॉर्ड, मौके पर नहीं मिले नल
जांच में करह उर्फ खैरागढ़ गांव से जुड़ा मामला भी सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक रिकॉर्ड में 740 घरेलू नल कनेक्शन पूर्ण बताए गए थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान घरों में नल की फिटिंग नहीं मिली।
इसी तरह योजना में 5 सबमर्सिबल मोटर पंप लगाए जाने का प्रावधान था, लेकिन जांच के दौरान केवल 1 मोटर पंप मिलने की बात सामने आई। कंक्रीट स्टैंड पोस्ट भी मौके पर नहीं पाए गए।
कहीं गांव की सीमा तक पहुंची पाइपलाइन, घरों तक नहीं
EOW की जांच में पाइपलाइन से जुड़े काम में भी कथित खामियां सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर मुख्य पाइपलाइन गांव की सीमा तक बिछाई गई, लेकिन घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचाए गए।
जुड़मनिया-रघुनाथ गांव में मुख्य पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद घरेलू कनेक्शन नहीं होने और पाइपलाइन का काम भी पूरे गांव तक नहीं पहुंचने की जानकारी जांच रिपोर्टों में सामने आई है।
शिवराजपुर और जुड़मनिया में अधूरे मिले निर्माण
जांच के दौरान शिवराजपुर और जुड़मनिया-रघुनाथ में ओवरहेड टैंक और संपवेल से जुड़े निर्माण कार्य भी अधूरे पाए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना को निर्धारित अवधि में पूरा किया जाना था, लेकिन कई साल बाद भी संबंधित कार्यों के अधूरे रहने पर EOW ने भुगतान और सत्यापन की प्रक्रिया को जांच के दायरे में लिया है।
₹3.85 करोड़ के भुगतान और सत्यापन पर सवाल
इस परियोजना के लिए मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी को करीब ₹3.85 करोड़ का कार्यादेश दिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कार्य न्यूनतम निविदा दर से करीब 4.26% कम दर पर दिया गया था।
EOW की जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जब कई कार्य मौके पर अधूरे या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, तो उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।
जांच एजेंसी ने इसी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अधिकारियों तथा ठेकेदार की भूमिका को लेकर मामला दर्ज किया है।
इन चार लोगों के खिलाफ FIR
EOW ने मामले में चार लोगों को नामजद किया है:
- जे.पी. (जनार्दन प्रसाद) द्विवेदी — तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, PHE
- संजय पांडेय — तत्कालीन सहायक यंत्री
- ए.पी. तिवारी — तत्कालीन उपयंत्री
- शिवेंद्र कुमार तिवारी — संबंधित ठेकेदार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार FIR में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले की विवेचना जारी है।
ठेकेदार के BJP किसान मोर्चा पदाधिकारी होने से मामला राजनीतिक भी
मामले में नामजद ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के भाजपा किसान मोर्चा के रीवा जिला उपाध्यक्ष होने की जानकारी कुछ रिपोर्टों में दी गई है। इस वजह से मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। हालांकि, किसी राजनीतिक पद पर होना अपने आप में FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं करता।
अब जांच का मुख्य बिंदु यह रहेगा कि परियोजना के निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी और सरकारी राशि के इस्तेमाल में कोई आपराधिक अनियमितता हुई या नहीं।
EOW जांच के बाद कई सवालों के जवाब बाकी
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में जिस परियोजना में घरेलू कनेक्शन, पाइपलाइन, मोटर पंप और पानी की टंकी जैसे काम शामिल थे, उसमें रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर मिलने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
फिलहाल EOW ने FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगी। नामजद आरोपियों का पक्ष भी जांच के दौरान सामने आना बाकी है।





