MP GAD Order: मध्यप्रदेश में संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की साल में चार बैठकें अनिवार्य, लापरवाही पर सामान्य प्रशासन विभाग सख्त

MP GAD Order: मध्यप्रदेश में संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की साल में चार बैठकें अनिवार्य, लापरवाही पर सामान्य प्रशासन विभाग सख्त

भोपाल। मध्यप्रदेश में संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की नियमित बैठकें आयोजित नहीं करने पर सामान्य प्रशासन विभाग ने नाराजगी जताई है। विभाग ने प्रदेश के सभी प्रमुख सचिवों और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर हर तीन महीने में इन समितियों की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत साल में कम से कम चार बैठकें करना अनिवार्य होगा। साथ ही बैठकों में लिए गए निर्णयों और उनकी कार्यवाही का विवरण भी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजना होगा। शासन के पहले से जारी निर्देशों के बावजूद कई विभागों में नियमित बैठकें नहीं होने के कारण यह कदम उठाया गया है।

पहले के निर्देशों की अनदेखी पर नाराजगी

सामान्य प्रशासन विभाग के संज्ञान में आया है कि प्रदेश के कई विभागों और जिलों में संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही हैं। जबकि शासन की ओर से पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि इन समितियों की बैठक हर तीन महीने में आयोजित की जाए। इसके बावजूद कई अधिकारियों ने निर्धारित समय पर बैठकें नहीं बुलाईं। इसी लापरवाही को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने दोबारा निर्देश जारी किए हैं।

अवर सचिव रवि मालवीय ने जारी किया पत्र

सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव रवि मालवीय की ओर से प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिवों और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि हर तीन महीने में एक बैठक होना आवश्यक है। इस तरह सालभर में चार बैठकें आयोजित की जाएंगी। बैठकों में लिए गए निर्णयों की जानकारी भी विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

समितियों का क्या है काम?

संयुक्त परामर्शदात्री समितियों का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न विषयों पर समन्वय स्थापित करना और संबंधित समस्याओं का समाधान करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिला स्तर पर इन समितियों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित सदस्य शामिल होते हैं। बैठकों में शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सामने आने वाली समस्याओं पर विचार किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संबंधित विषयों का समय पर निराकरण करना और विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाना है।

सक्षम अधिकारियों को मौके पर करना होगा निराकरण

सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार, बैठकों में शामिल सक्षम अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों का निराकरण करना होगा। जिन समस्याओं का समाधान बैठक के दौरान संभव है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य मामलों में संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठकों के फैसलों का देना होगा हिसाब

शासन ने केवल बैठक आयोजित करने तक ही निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। अब इन बैठकों में हुई कार्यवाही और लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का विवरण भी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। इससे विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि निर्धारित बैठकें आयोजित की जा रही हैं या नहीं और उनमें किन विषयों पर निर्णय लिए गए हैं। साथ ही बैठकों में सामने आने वाली समस्याओं और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा भी की जा सकेगी।

प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने की तैयारी

सामान्य प्रशासन विभाग के नए निर्देशों का उद्देश्य समितियों की बैठकों को नियमित बनाना और लंबित विषयों के निराकरण में तेजी लाना है। शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। अब विभागों और जिला प्रशासन को हर तीन महीने में बैठक आयोजित करने के साथ उसकी कार्यवाही और निर्णयों का विवरण भी शासन को उपलब्ध कराना होगा।

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