MP High Court: 497 शिक्षकों को छठे वेतनमान का लाभ देने के आदेश, पालन नहीं हुआ तो प्रमुख सचिव को होना पड़ेगा पेश

जबलपुर। मध्य प्रदेश में 497 शिक्षकों को छठे वेतनमान और पुरानी सेवा अवधि का लाभ देने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर दिया है। पूर्व में पारित आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई तक आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने यह निर्देश अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। याचिका जबलपुर निवासी राजेश कुमार पांडेय सहित 497 शिक्षकों ने दायर की है।
2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने की मांग
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनकी प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत विभाग में हुई थी। वर्ष 2006 में उनका संविलियन अध्यापक संवर्ग में किया गया, जबकि वर्ष 2018 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया।
शिक्षकों का कहना है कि राज्य सरकार ने छठे वेतनमान का लाभ वर्ष 2016 से देने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें वर्ष 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। याचिका के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को सरकार की एसएलपी खारिज कर दी थी।
इसके बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की।
चार सप्ताह बाद भी आदेश का पालन नहीं
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे। मौजूदा सुनवाई में शिक्षकों की ओर से बताया गया कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है।
याचिकाकर्ताओं के पक्ष को सुनने के बाद अदालत ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पैरवी की। अब अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अदालत के आदेश का पालन करती है या प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ता है।





