MP Nikay Chunav 2027: जनगणना और परिसीमन के बीच चुनाव टलने के कयास, 6 महीने की देरी की चर्चा

भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन जनगणना, परिसीमन और वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया के बीच चुनाव कार्यक्रम को लेकर नई स्थिति बनती दिखाई दे रही है। ऐसे में नगरीय निकाय चुनावों की समयसीमा आगे बढ़ने की संभावना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, चुनाव छह महीने टलेंगे, इसकी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2027 के नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों से संबंधित प्रक्रिया जारी है। हालिया रिपोर्टों में जून 2027 में 413 नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित बताए गए हैं।
जनगणना के बाद परिसीमन का सवाल
मध्य प्रदेश में जनगणना-2027 की प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार मकान सूचीकरण का चरण 2026 में पूरा किया गया है, जबकि जनसंख्या की वास्तविक गणना 1 से 28 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है।
यही वजह है कि नए जनगणना आंकड़ों के आधार पर प्रशासनिक सीमाओं और वार्डों के पुनर्गठन को लेकर समयसीमा महत्वपूर्ण हो गई है। चुनाव से पहले वार्ड परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मध्य प्रदेश के नगरपालिका कानून में वार्डों के गठन और पुनर्गठन को लेकर यह प्रावधान है कि कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो महीने पहले यह प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो राज्य निर्वाचन आयोग मौजूदा परिसीमन के आधार पर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
जुलाई 2027 में खत्म होना है मौजूदा निकायों का कार्यकाल
प्रदेश के मौजूदा नगरीय निकायों का कार्यकाल 2027 में समाप्त होना प्रस्तावित है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी 2022-2027 के नगरीय निकायों के कार्यकाल की जानकारी उपलब्ध है।
हालिया रिपोर्टों में 2027 के नगरीय निकाय चुनाव जून 2027 में प्रस्तावित बताए गए हैं। आयोग ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और 413 नगरीय संस्थाओं के लिए प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
प्रदेश में 413 नगरीय निकाय
मध्य प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकाय हैं। इनमें:
- 16 नगर निगम
- 99 नगर पालिका परिषद
- 298 नगर परिषद
शामिल हैं। यह आंकड़ा मध्य प्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के दस्तावेज में भी दर्ज है।
इन निकायों में 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम तय होने से पहले परिसीमन, वार्ड गठन, आरक्षण और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
क्या 6 महीने टल सकते हैं चुनाव?
यही सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल छह महीने की देरी को लेकर कोई आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम या आदेश सामने नहीं आया है।
अगर नए जनगणना आंकड़ों के आधार पर व्यापक परिसीमन की जरूरत पड़ती है और यह प्रक्रिया चुनाव की प्रस्तावित समयसीमा तक पूरी नहीं हो पाती, तो चुनाव कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है। लेकिन मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग मौजूदा परिसीमन के आधार पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
इसलिए फिलहाल चुनाव छह महीने आगे बढ़ने की बात को संभावना या प्रशासनिक आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मतदाता सूची का काम भी जारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण की तैयारियों के लिए 2026 में निर्देश जारी किए हैं। आयोग की वेबसाइट पर नगरीय निकायों की मतदाता सूची से संबंधित कार्यक्रम और अन्य चुनावी तैयारियां भी उपलब्ध हैं।
इससे संकेत मिलता है कि 2027 के चुनावों को लेकर निर्वाचन मशीनरी की तैयारियां फिलहाल जारी हैं।
पहले भी स्थगित हुए हैं निकाय उपचुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 में नगरीय निकायों के उपचुनावों के लिए कार्यक्रम जारी किया है। आयोग की वेबसाइट पर 31 अगस्त 2026 को नगरीय निकायों के उपचुनाव संबंधी निर्वाचन कार्यक्रम दर्ज है।
हालांकि, उपचुनावों के स्थगन और 2027 के आम नगरीय निकाय चुनावों की समयसीमा को सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। दोनों की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
अब निगाह परिसीमन और चुनाव कार्यक्रम पर
2027 के नगरीय निकाय चुनावों को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बिंदु जनगणना, परिसीमन और वार्ड आरक्षण की समयसीमा है। यदि इन प्रक्रियाओं में अपेक्षा से अधिक समय लगता है तो चुनाव कार्यक्रम में बदलाव की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव टालने या छह महीने की देरी का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। इसलिए अंतिम स्थिति परिसीमन और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं की प्रगति के साथ ही स्पष्ट होगी।





