MPPSC की ₹25 हजार लेट फीस पर हाईकोर्ट का फैसला: अभ्यर्थी की याचिका खारिज

भोपाल। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की भर्ती परीक्षाओं में तय समय के बाद आवेदन करने पर लगने वाली भारी लेट फीस का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में ₹25,000 लेट फीस की व्यवस्था के बाद राहत मांगने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले में निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन नहीं करने के तथ्य को महत्वपूर्ण माना।
क्या था मामला?
यह मामला Assistant Professor (Political Science) Selection Examination, 2022 से जुड़ा था। MPPSC ने आवेदन के लिए सामान्य शुल्क के साथ एक समयसीमा तय की थी। इसके बाद विलंब शुल्क के साथ आवेदन के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था।
न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, अभ्यर्थियों के लिए सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की अंतिम तारीख के बाद ₹3,000 लेट फीस और उसके बाद ₹25,000 लेट फीस के साथ आवेदन का विकल्प उपलब्ध कराया गया था। संबंधित याचिकाकर्ता ने निर्धारित अवधि में आवेदन नहीं किया था।
हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
याचिकाकर्ता ने अदालत से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। उसका कहना था कि वह निर्धारित अवधि में ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में पाया कि ₹25,000 लेट फीस के साथ आवेदन करने के लिए भी पर्याप्त समय उपलब्ध था। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता उस अवधि में आवेदन नहीं कर सका, लेकिन तत्काल कोई प्रतिनिधित्व भी रिकॉर्ड पर नहीं था। बाद में उसने अदालत का रुख किया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने 10 अक्टूबर 2025 को याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यदि अभ्यर्थी निर्धारित समयसीमा में आवेदन नहीं करता है तो केवल बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाने के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता को आवेदन के लिए निर्धारित अवधि उपलब्ध थी और ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी समस्या होने का दावा भी रिकॉर्ड से पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुआ।
2026 की MPPSC State Service Main परीक्षा में भी ₹25,000 लेट फीस
MPPSC की State Service Main Examination 2026 के लिए भी विलंब शुल्क की व्यवस्था की गई थी। उपलब्ध परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार सामान्य आवेदन अवधि के बाद ₹3,000 लेट फीस और उसके बाद ₹25,000 लेट फीस के साथ आवेदन का प्रावधान रखा गया था।
इसलिए अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख और आयोग की ओर से जारी संबंधित नोटिफिकेशन की शर्तों को ध्यान से देखना जरूरी है। अलग-अलग परीक्षाओं में आवेदन की तारीखें और लेट फीस की समयसीमा अलग हो सकती है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है संदेश?
हाईकोर्ट के इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित समयसीमा का पालन महत्वपूर्ण है। यदि किसी अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी समस्या आती है तो उसे समय रहते आयोग को इसकी जानकारी देने और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जरूरत है।
हालांकि, इस फैसले को यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर MPPSC परीक्षा में ₹25,000 की लेट फीस पर हाईकोर्ट ने सामान्य रूप से फैसला दे दिया है। लेट फीस से संबंधित नियम संबंधित भर्ती और उसके नोटिफिकेशन के आधार पर देखे जाएंगे।





