आदेश से पहले आईएएस की पत्नी ने खोला पोस्टिंग का राज : कमिश्नर के कारण विधायक पर भारी पड़े टीआई : आठ लाख लेकर सचिव मैडम लेडी अफसर को करेंगी बहाल

1. आदेश से पहले आईएएस की पत्नी ने खोला पोस्टिंग का राज
एक प्रमोटी आईएएस की नई पोस्टिंग का राज आदेश जारी होने से चार दिन पहले ही घर की दहलीज पार कर गया। छोटे शहर से बड़े शहर की नगर सरकार की कमान मिलने वाली थी। साहब को इसकी भनक लग चुकी थी, सो उन्होंने सबसे पहले यह खुशखबरी अपनी धर्मपत्नी को सुनाई। लेकिन मैडम से यह राज ज्यादा देर तक संभल नहीं पाया।नई जिम्मेदारी की खुशी ऐसी चढ़ी कि मोबाइल पर अपनों को खबर देने से लेकर घर आने वाले मेहमानों तक के सामने पोस्टिंग का पूरा किस्सा खुलने लगा। मैडम की उत्सुकता में खबर धीरे-धीरे घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर लोगों तक पहुंच गई।चार दिन बाद जब सरकार का आधिकारिक आदेश जारी हुआ, तो पोस्टिंग की खबर किसी के लिए नई नहीं थी। कई लोगों को पहले से ही पता था कि साहब को बड़े शहर की नगर सरकार की कमान मिलने वाली है।साहब की नई कुर्सी का जश्न तो बाद में हुआ, मैडम ने उससे पहले ही खबर का ढोल बजा दिया।
2. कमिश्नर के कारण विधायक पर भारी पड़े टीआई
एक बड़े शहर में पिछले दिनों टीआई और विधायक जी के बीच ऐसा मामला उलझा कि पुलिस महकमे में हलचल मच गई। हुआ यूं कि टीआई ने विधायक जी के एक समर्थक के साथ मारपीट कर दी। समर्थक के साथ हुई इस घटना से नाराज विधायक जी ने जमकर हंगामा किया। मामला बढ़ा तो कमिश्नर साहब को टीआई को लाइन अटैच करना पड़ा।लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी था। टीआई साहब भी रसूख के मामले में कम नहीं निकले। कुछ ही दिनों में लाइन से निकलकर दूसरे थाने की कमान हासिल कर ली। अब इस नई पोस्टिंग में दो खास बातें हैं। पहली, नया थाना पहले के मुकाबले ज्यादा मलाईदार माना जा रहा है। दूसरी, यह थाना विधायक जी के अपने विधानसभा क्षेत्र में ही आता है, जबकि पुराना थाना दूसरे विधानसभा क्षेत्र में था।यानी जिस टीआई को विधायक जी के हंगामे के बाद लाइन में जाना पड़ा था, वह अब उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में नई कुर्सी संभाल रहा है। नए आदेश ने विधायक जी का पारा चढ़ा दिया है।
3. आठ लाख लेकर सचिव मैडम लेडी अफसर को करेंगी बहाल
एक बड़े जिले में कुछ दिन पहले हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री ने कुछ अफसरों को सस्पेंड कर दिया था। इनमें एक महिला अफसर भी शामिल हैं। सस्पेंशन के बाद मैडम ने मंत्रालय में अपने विभाग की सचिव मैडम तक पहुंच बनाई और बहाली के लिए जुगाड़ तलाशने लगीं।बताया जाता है कि विभाग की सचिव मैडम ने बहाली के लिए 8 लाख रुपये का ऑफर दिया। महिला अफसर ने भी बिना देर किए ऑफर स्वीकार कर लिया और टोकन राशि जमा कर दी।इसके बाद जब सचिव मैडम ने अपने बाबू से महिला अफसर की फाइल मंगवाई, तो बाबू ने फाइल में कई नकारात्मक टिप्पणियां लिख दीं। यह देखकर मैडम नाराज हो गईं और बाबू को फटकार लगाते हुए फाइल में सकारात्मक टिप्पणी करने के निर्देश दिए।अब फाइल का रुख बदलने के बाद महिला अफसर की बहाली की उम्मीद बढ़ गई है।
4. सोशल मीडिया पर कानूनी सलाह दे रहे हैं रिटायर्ड आईपीएस
आईपीएस की नौकरी से रिटायर होने के बाद भी साहब की सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। वर्दी में रहते हुए अपनी फिटनेस के लिए पहचाने जाने वाले साहब ने अब वकालत के क्षेत्र में नई पारी शुरू की है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म पर अपने अकाउंट बनाकर लोगों से सीधा जुड़ाव भी बना लिया है।साहब अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लोगों को कानूनी सलाह दे रहे हैं। इतना ही नहीं, देश और प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों पर भी बेबाकी से अपनी राय रख रहे हैं। इन मामलों के अलग-अलग पहलुओं को समझाते हुए कानूनी बारीकियों पर अपनी बात सामने रखते हैं, जिससे लोगों को मामलों को समझने में मदद मिलती है।खास बात यह है कि रिटायरमेंट के बाद भी साहब ने खुद को सीमित रखने के बजाय अपने अनुभव और कानूनी समझ को लोगों तक पहुंचाने का रास्ता चुना है। पुलिस सेवा का लंबा अनुभव, फिटनेस के प्रति अनुशासन और अब कानून के क्षेत्र में सक्रियता—साहब की यह नई पारी उन्हें एक अलग पहचान दे रही है।
5. युवा आईएएस को जहां से हटाया फिर वहीं पहुंचे
एक युवा आईएएस अफसर के साथ ऐसा संयोग हुआ है, जो कम ही देखने को मिलता है। दरअसल, साहब को कुछ समय पहले एक संचालनालय से रातों-रात हटा दिया गया था। इस अचानक हुए फेरबदल को लेकर तरह-तरह की बातें भी हुईं। इसके बाद साहब को एक निगम में पदस्थ कर दिया गया, जहां जैसे-तैसे उन्हें काम मिला।अभी साहब को काम संभाले दो दिन ही बीते थे कि सरकार उनके ही जूनियर को उनका सीनियर बनाकर ले आई। ऐसे में साहब के लिए वहां बने रहना मुश्किल हो गया और उन्हें हटाना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि नई जगह तलाशने के बजाय साहब को फिर उसी संचालनालय में बैठा दिया गया, जहां से उन्हें कुछ समय पहले रातों-रात हटाया गया था।यानी जिस जगह से शुरुआत में अचानक विदाई हुई थी, कुछ समय बाद हालात ऐसे बने कि साहब की वापसी वहीं हो गई। इसे कहते हैं प्रशासनिक संयोग, जहां अफसर की कुर्सी का चक्कर घूम-फिरकर वहीं आ पहुंचा, जहां से कहानी शुरू हुई थी।
6. खदानों से इफरात कमाई के कारण हटीं थी कलेंक्टर मैडम
पिछले दिनों सरकार ने एक जिले में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ प्रमोटी आईएएस मैडम को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ कर दिया। मैडम ने इसे सरकार का रूटीन फैसला बताया। उनका कहना था कि वैसे भी उन्हें राजधानी में अपने परिवार के पास आना था। लेकिन असली कहानी तब सामने आई, जब जिले के खनिज अधिकारी को भी हटा दिया गया।बताया जाता है कि मैडम के कार्यकाल में धड़ल्ले से रॉयल्टी जारी की जा रही थी। यहां तक कि जुगाड़ के जरिए पड़ोसी जिले की रॉयल्टी भी जारी किए जाने की बात सामने आई। इस मामले की शिकायतें जब सरकार तक पहुंचीं, तो पहले कलेक्टर मैडम को हटाया गया और बाद में खनिज अधिकारी की भी विदाई हो गई।अब मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब खनिज अधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए मैडम को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को हटाए जाने के पीछे की वजह को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। मैडम जिस फैसले को रूटीन बता रही थीं, खनिज अधिकारी के आरोपों के बाद उसी फैसले के पीछे की कहानी कुछ और ही नजर आने लगी है।
7. महापौर और कमिश्नर मैडम के बीच जमकर चल रही खींचतान
एक मलाईदार नगर निगम में महापौर और कमिश्नर के बीच बिल्कुल नहीं बन रही है। शुरुआत में दोनों के बीच फाइलों को लेकर तनातनी चल रही थी, लेकिन अब मामला बैठकों तक पहुंच गया है। बैठकों में दोनों के बीच खुलकर बहस और आरोप-प्रत्यारोप होने लगे हैं।महापौर का आरोप है कि कमिश्नर विकास कार्यों में अड़ंगे लगा रही हैं, जबकि कमिश्नर का तर्क है कि महापौर बिना पूरी प्रक्रिया का पालन किए फैसले ले लेती हैं। ऐसे में उन्हें फाइलों पर आपत्ति दर्ज करनी पड़ती है। पिछले दिनों दोनों के बीच हुई बहस का वीडियो भी वायरल हो गया, जिसके बाद यह खींचतान और चर्चा में आ गई।दिलचस्प बात यह है कि महापौर विपक्षी पार्टी से आती हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल के नेता भी दोनों के बीच चल रही इस खींचतान को देखकर फिलहाल मजा ले रहे हैं। उधर, नगर निगम में विकास कार्यों से जुड़े फैसलों के बीच दोनों महिला जनप्रतिनिधि और अधिकारी की यह तकरार कब थमेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
8. रिटायर्ड आईएएस ने हिंदुओं को दी सीख सऊदी अरब की घटना का दिया हवाला
सोशल मीडिया पर जमकर सक्रिय रहने वाले और एक संवैधानिक संस्था के मुखिया रह चुके रिटायर्ड आईएएस ने पिछले दिनों हिंदुओं को एक सीख दी। उन्होंने भारत में मिलने वाली धार्मिक और सामाजिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सऊदी अरब की एक घटना का जिक्र किया।उनका कहना है कि यह अच्छी बात है कि हम भारत में रहते हैं, जहां मंदिरों में जाकर नृत्य कर सकते हैं, गरबा आयोजनों में फिल्मी गानों पर डांस कर सकते हैं और अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं। इसके लिए उन्होंने सऊदी अरब की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक मस्जिद में एक कपल द्वारा आपत्तिजनक हरकत किए जाने पर दोनों को मृत्युदंड दिए जाने की बात सामने आई। उनका सवाल है कि इस घटना के विरोध में किसी संगठन ने आवाज क्यों नहीं उठाई? रिटायर्ड आईएएस की इस टिप्पणी के जरिए धार्मिक स्थलों की मर्यादा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अलग-अलग देशों के कानूनों को लेकर बहस छिड़ सकती है।
9. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गलत आंकड़े देना प्रमोटी आईएएस को पड़ा भारी
पिछले दिनों मुखिया जी और बड़े साहब की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग काफी गर्मागर्मी वाली रही। बैठक में कई कलेक्टर बड़े साहब के निशाने पर रहे। एक छोटे जिले में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ प्रमोटी आईएएस को आंकड़ों की गलत जानकारी देना भारी पड़ गया। बड़े साहब ने उन्हें जमकर फटकार लगाई और आगे से पूरी तैयारी के साथ बैठक में शामिल होने की हिदायत दी।इस फटकार के बाद से प्रमोटी आईएएस काफी डरे हुए हैं। इसकी वजह भी है। साहब को सरकार ने लंबे समय तक लूप लाइन में पदस्थ रखा था। अब बड़ी मुश्किल से कलेक्टरी मिली है। ऐसे में यदि यह कुर्सी भी चली गई, तो साहब को लूप लाइन में ही रहते हुए रिटायर होना पड़ सकता है। यही वजह है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मिली फटकार ने साहब की चिंता बढ़ा दी है।
10. प्रमुख सचिव से मुख्यमंत्री की नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही
एक प्रमुख सचिव से मुख्यमंत्री की नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। कोई बैठक हो या चर्चा, मुख्यमंत्री साहब से सवाल-जवाब जरूर करते हैं। लेकिन पता नहीं साहब बैठक में बिना तैयारी के पहुंचते हैं या घबरा जाते हैं, वे सवालों के जवाब ही नहीं दे पाते।पिछली बैठक में भी कुछ ऐसा ही हुआ। मुख्यमंत्री ने साहब पर सवालों की बौछार कर दी, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद से माना जा रहा है कि साहब के विभागों का बोझ हल्का किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो प्रमुख सचिव के पास विभागों की जिम्मेदारी कम हो सकती है।





