पत्नी के इवेंट को भव्य बनाने IAS पति ने संभाली कमान : नक्सलमुक्त जिले के कप्तान बनने का सपना रह गया अधूरा : डायरेक्टर की सुस्ती पर सचिव साहब का चढ़ा पारा

पत्नी के इवेंट को भव्य बनाने IAS पति ने संभाली कमान : नक्सलमुक्त जिले के कप्तान बनने का सपना रह गया अधूरा : डायरेक्टर की सुस्ती पर सचिव साहब का चढ़ा पारा
1. पत्नी के इवेंट को भव्य बनाने IAS पति ने संभाली कमान
राजधानी में दिसंबर महीने में होने वाले एक बड़े इवेंट की तैयारियां अभी से जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी आयोजन की कमान एक आईएएस अफसर की पत्नी के हाथों में है। लेकिन इस बार इवेंट को खास और यादगार बनाने के लिए मैडम को अकेले मशक्कत नहीं करनी पड़ रही। उनके आईएएस पति ने खुद मैदान में उतरकर पूरा मोर्चा संभाल लिया है। साहब फिलहाल दिल्ली में डेप्युटेशन पर पदस्थ हैं, लेकिन पत्नी के इस सालाना आयोजन के लिए दिल्ली से प्रदेश की राजधानी तक दौड़ लगा रहे हैं। पिछले दिनों साहब खास तौर पर कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने राजधानी पहुंचे। यहां उन्होंने सरकारी अमले के साथ बाकायदा बैठक की और आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में साहब ने यह भी बताया कि कार्यक्रम के लिए एक मंत्री ने अपनी सहमति दे दी है, जबकि मुख्यमंत्री के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। इसके बाद तो आयोजन को भव्य बनाने के निर्देशों की झड़ी लग गई। सरकारी अमले को साफ संदेश दे दिया गया कि कार्यक्रम में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। अब दिसंबर में होने वाले इस निजी आयोजन की तैयारियों में सरकारी मशीनरी की सक्रियता देखकर कई लोगों की भौंहें भी तन गई हैं। सवाल यह है कि दिल्ली में पदस्थ साहब को अपनी पत्नी के आयोजन के लिए इतनी मशक्कत क्यों करनी पड़ रही है और सरकारी अमला भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरी ताकत क्यों झोंक रहा है? फिलहाल इतना जरूर है कि मैडम का इवेंट अभी हुआ नहीं है, लेकिन साहब की सक्रियता ने उसे पहले ही राजधानी के चर्चित आयोजनों में शामिल कर दिया है।
2. नक्सलमुक्त जिले के कप्तान बनने का सपना रह गया अधूरा
एक बड़े जिले के एसपी साहब इन दिनों अपनी ही पोस्टिंग को लेकर असमंजस में पड़ गए हैं। साहब की लंबे समय से इच्छा थी कि उन्हें नक्सलमुक्त हुए जिले की कमान मिल जाए। इसके लिए उन्होंने बाकायदा पुलिस मुख्यालय में अपनी तरफ से पूरी बिसात बिछाई थी। पिछले दिनों पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी दावेदारी भी पेश कर दी। वहां से मिले सकारात्मक संकेतों के बाद तो साहब ने मान लिया था कि अगली पारी अब नए जिले से ही शुरू होगी। साहब का भरोसा इतना बढ़ गया कि उन्होंने मौजूदा जिले में कामकाज से भी लगभग हाथ खींच लिया। बोरिया-बिस्तर बांधने की तैयारी शुरू हो गई और जिले के जनप्रतिनिधियों के फोन तक उठने बंद हो गए। जिन्हें साहब पहले तत्काल फोन वापस करते थे, उनके कॉल अब इंतजार ही करते रह गए। इधर, पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नक्सलमुक्त जिले के कप्तान के लिए उनका नाम प्रस्तावित कर दिया। साहब को लगने लगा कि अब तो बस आदेश निकलने की औपचारिकता बाकी है। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट सरकार के स्तर पर आया। सरकार ने साहब के नाम पर सहमति देने से ही इनकार कर दिया। अब साहब की सारी तैयारियां धरी रह गईं। न नए जिले की कमान मिली और न ही पुरानी जगह से जाने का रास्ता साफ हुआ। उधर, जिस जिले की कप्तानी के लिए साहब इतने दिनों से जोड़-तोड़ कर रहे थे, वहां अब नए कप्तान की तलाश शुरू हो गई है। फिलहाल यह जिला नक्सलमुक्त होने के साथ ही पुलिस कप्तान मुक्त हो गया है।
3. डायरेक्टर की सुस्ती पर सचिव साहब का चढ़ा पारा
मिस्टर कूल के नाम से पहचाने जाने वाले सचिव स्तर के एक आईएएस इन दिनों अपने ही विभाग के संचालक से खासे नाराज चल रहे हैं। मामला विभागीय कामकाज में ढिलाई का है। संचालक साहब प्रमोटी आईएएस हैं और सचिव साहब उन्हें कई बार साफ-साफ समझा चुके हैं कि जो टास्क दिए गए हैं, उन्हें समयसीमा में पूरा किया जाए। लेकिन समझाइश का असर संचालक साहब पर होता नजर नहीं आया। हर बार काम की प्रगति पूछने पर कोई न कोई पेंच सामने आ जाता। आखिरकार पिछले दिनों सचिव साहब का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में ही संचालक साहब को सार्वजनिक रूप से आईना दिखा दिया। संदेश में साफ लिखा कि आपको जो काम सौंपा गया था, उसमें कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। अब आप खुद टेबल-टेबल पर जाकर उस काम की फाइल पास करवाएं। सचिव साहब का यह संदेश पूरे विभाग में चर्चा का विषय बन गया। अब तक शांत रहने वाले साहब ने इस बार ग्रुप में ही ऐसी क्लास लगा दी कि संचालक साहब को जवाब देते नहीं बन रहा। उधर, संचालक साहब की अपनी अलग परेशानी है। वे अपने करीबी लोगों से कहते फिर रहे हैं कि क्या अब एक बाबू के हिस्से का काम भी आईएएस अधिकारियों को ही करना पड़ेगा? यानी सचिव साहब को काम पूरा चाहिए और संचालक साहब को लगता है कि फाइलों के पीछे भागना उनके पद की गरिमा के खिलाफ है।
4. डीजीपी बनने से पहले ही आईपीएस मैडम को मिल गई बधाई
प्रदेश के मौजूदा डीजीपी इसी महीने के अंत में रिटायर होने जा रहे हैं। ऐसे में नए डीजीपी की कुर्सी को लेकर पुलिस महकमे में हलचल तेज है। मेरिट के आधार पर तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भी तैयार हो चुका है। खास बात यह है कि इस पैनल में एक महिला आईपीएस अधिकारी का नाम भी शामिल है। अब फैसला सरकार को करना है कि प्रदेश पुलिस की कमान किसके हाथों में सौंपी जाए। लेकिन सरकार के फैसले से पहले ही एक कांग्रेसी नेता ने अपनी तरफ से नतीजा घोषित कर दिया। नेता जी का उत्साह ऐसा था कि उन्होंने आईपीएस मैडम को डीजीपी बनने की अग्रिम बधाई तक दे डाली। इतना ही नहीं, मैडम के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिख दिया कि आदरणीय दीदी को डीजीपी बनने की बहुत-बहुत बधाई। बस फिर क्या था, नेता जी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर पहुंचते ही लोगों के हाथ एक नया मसाला लग गया। अब लोग पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर कर नेता जी के मजे ले रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि क्या डीजीपी की नियुक्ति का आदेश जारी होने से पहले ही उन्हें इसकी जानकारी मिल गई, तो कोई कह रहा है कि नेता जी ने तो चयन समिति से भी पहले अपना फैसला सुना दिया। वहीं दूसरी ओर अब तक तय नहीं हो सका है कि अगला डीजीपी कौन होगा।
5. एसपी साहब के सामने सांसद पत्नी ने भी की धांय-धांय
दशहरे पर शस्त्र पूजा के दौरान सरकारी बंदूक से फायरिंग का मामला हो तो कानून का शिकंजा कितना कसता है, इसकी एक मिसाल पड़ोसी राज्य में देखने को मिली। वहां सरकारी बंदूक से गोलियां चलाने वाली एक एसपी मैडम को नोटिस थमा दिया गया। लेकिन अपने प्रदेश में तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। आदिवासी बहुल जिले में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ तो जिले के एसपी साहब ने सरकारी बंदूक से खुद भी गोलियां दागीं और कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि सांसद को भी फायरिंग का मौका दे दिया। सांसद साहब ही नहीं, उनकी पत्नी ने भी बंदूक थामकर धांय-धांय गोलियां चला दीं। कार्यक्रम में सरकारी बंदूक से हुई इस फायरिंग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। वीडियो देखकर लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर सरकारी हथियार से इस तरह फायरिंग की अनुमति किसने दी? खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम में जिले के पुलिस कप्तान खुद मौजूद थे, वहां सांसद और उनकी पत्नी तक ने निशानेबाजी का प्रदर्शन कर दिया। मामला सार्वजनिक होने के बाद भी किसी तरह की पूछताछ या नोटिस की खबर सामने नहीं आई। अब इसकी तुलना पड़ोसी राज्य की कार्रवाई से होने लगी है। वहां एसपी मैडम को नोटिस मिल गया और यहां सरकारी बंदूक से फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में दिखाई दिया। हालांकि, कुछ समय बाद जारी हुई तबादला सूची में एसपी साहब को जिले से हटा दिया गया। लेकिन यह बदलाव नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फायरिंग वाले वायरल वीडियो से भी इसका कोई संबंध नहीं था,
6. जनसुनवाई में कलेक्टर मैडम पर नाराज हुए विधायक जी
एक छोटे जिले की कलेक्टर मैडम और सत्ताधारी दल के आदिवासी विधायक जी के बीच चल रही खटास अब खुलकर सामने आने लगी है। विधायक जी लंबे समय से मैडम के कामकाज से नाराज हैं। पहले उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कलेक्टर मैडम की शिकायतों का पूरा पुलिंदा सौंपा था। उम्मीद थी कि ऊपर तक बात पहुंचने के बाद हालात सुधर जाएंगे, लेकिन जब शिकायतों का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया तो विधायक जी ने खुद ही मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। पिछले दिनों जनसुनवाई के दौरान इसका दिलचस्प नजारा देखने को मिला। एक व्यक्ति अपनी पत्नी की परेशानियों को लेकर आवेदन देने पहुंचा था। उसका कहना था कि वह लंबे समय से जनसुनवाई में चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार उसे कभी एक सरकारी दफ्तर तो कभी दूसरे कार्यालय भेज दिया जाता है। उस दिन भी कलेक्टर मैडम जनसुनवाई में मौजूद नहीं थीं। परेशान व्यक्ति ने अपनी व्यथा विधायक जी को सुना दी। फिर क्या था, विधायक जी को मैडम के कामकाज पर सवाल उठाने का एक और मौका मिल गया। विधायक जी ने मौके पर ही अपनी नाराजगी जाहिर की और बाकायदा वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि जब एक आम आदमी अपनी समस्या लेकर बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है तो उसकी सुनवाई आखिर कौन करेगा? अब यह मामला सिर्फ एक फरियादी की परेशानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विधायक और कलेक्टर के बीच चल रही तनातनी भी सार्वजनिक हो गई है। उधर, कलेक्टर मैडम फिलहाल इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन विधायक जी के तेवर बता रहे हैं कि उनकी नाराजगी अभी ठंडी नहीं हुई है।
7. विधायक की चरण वंदना से जागी एडिशनल एसपी की चुनावी महत्वाकांक्षा
करीब सवा साल बाद रिटायर होने जा रहे एक एडिशनल एसपी साहब के मन में इन दिनों वर्दी उतारकर सियासत की पिच पर उतरने का ख्याल जोर मार रहा है। अब तक पुलिस महकमे में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे साहब को अचानक विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का रास्ता नजर आने लगा है। दिलचस्प बात यह है कि इस राजनीतिक महत्वाकांक्षा के पीछे कोई लंबी राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक वायरल वीडियो की भूमिका बताई जा रही है। दरअसल, साहब जिस जिले में पदस्थ हैं, वहां के विधायक जी ने एक सार्वजनिक मौके पर उनकी चरण वंदना कर दी। किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बस फिर क्या था, वीडियो वायरल होते ही साहब के चाहने वालों और मित्रों ने उनकी लोकप्रियता के कसीदे पढ़ना शुरू कर दिए। किसी ने सलाह दी कि साहब को अगला विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए, तो किसी ने यहां तक कह दिया कि उनकी लोकप्रियता के सामने बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों को भी पसीना आ सकता है। साहब को यह भी समझाया गया कि वे जिस समाज से आते हैं, उसका इलाके में अच्छा खासा वोटबैंक है। अगर समाज का समर्थन मिल गया तो चुनावी राह आसान हो सकती है। विधायक जी की चरण वंदना वाले वीडियो को भी उनकी लोकप्रियता का प्रमाण बताकर पेश किया जाने लगा। कल तक जो लोग साहब को पुलिस की वर्दी में देखने के आदी थे, वे अब उन्हें विधानसभा के मंच पर देखने के सपने दिखाने लगे हैं। अब इन सलाहों का असर साहब पर कितना हुआ है, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि रिटायरमेंट से पहले ही साहब के मन में नई पारी खेलने की इच्छा जाग गई है। पुलिस की नौकरी में अब गिनती के महीने बचे हैं और इधर समर्थकों ने चुनावी तैयारी का सपना दिखाना शुरू कर दिया है। लगता है साहब के लिए अब अगला सवाल पोस्टिंग का नहीं, बल्कि चुनावी टिकट का होने वाला है।
8. कलेक्टर के आदेश आते ही एडिशनल कमिश्नर की कोर्ट से मिल जाता है स्टे
एक बड़े जिले में इन दिनों कलेक्टर साहब और एडिशनल कमिश्नर राजस्व के बीच अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। कलेक्टर साहब जिले में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए एक के बाद एक आदेश जारी कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही ये मामले एडिशनल कमिश्नर की अदालत पहुंचते हैं, आदेशों पर स्टे लग जाता है। नतीजा यह है कि कलेक्टर साहब की कार्रवाई और एडिशनल कमिश्नर साहब के स्थगन आदेशों के बीच अलग ही मुकाबला चल रहा है। पिछले दिनों अवैध रूप से पटाखों का कारोबार करने वाले एक कारोबारी के खिलाफ कलेक्टर साहब ने कार्रवाई का आदेश दिया। कारोबारी ने देर नहीं की और मामला लेकर एडिशनल कमिश्नर की अदालत पहुंच गया। वहां से उसे तत्काल स्टे मिल गया। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कलेक्टर साहब ने अरबों रुपये कीमत की जमीन को सरकारी घोषित कर संबंधित संस्था से वापस लेने की कार्रवाई शुरू की थी। लेकिन यह मामला भी एडिशनल कमिश्नर की अदालत पहुंचा और वहां उस पर भी स्टे लग गया। अब कलेक्टर साहब के आदेशों का हश्र देखकर जिले के प्रशासनिक अमले में भी सवाल उठने लगे हैं। वैसे एडिशनल कमिश्नर साहब का राजस्व मामलों में पुराना रिकॉर्ड भी कम दिलचस्प नहीं है। जब वे एक बेहद छोटे जिले के कलेक्टर हुआ करते थे, तब सरकारी जमीन को निजी घोषित करने का मामला सामने आया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से ही उन्हें हटाने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हुई, जो आज तक लंबित बताई जाती है। अब साहब एडिशनल कमिश्नर के पद पर हैं और राजस्व न्यायालय में बैठकर कलेक्टरों के आदेशों पर स्टे दे रहे हैं। उनके बारे में तो यहां तक कहा जाता है कि जब प्रमोशन की उम्मीद ही नहीं बची तो फिर आदेशों और नाराजगियों की परवाह क्यों की जाए।
9. नाराज कलेक्टर ने मंडी सचिव की जीप में कराई "अरेस्टिंग"
आमतौर पर बेहद शांत और कूल रहने वाले सीधी भर्ती के एक आईएएस अफसर का पिछले दिनों ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला कि जिले के अफसर और कर्मचारी भी हैरान रह गए। कलेक्टर साहब एक मंडी सचिव पर इतने नाराज हो गए कि उसे सरकारी जीप में ही बैठाकर रखने के निर्देश दे दिए। दरअसल, साहब पिछले दिनों जिला मुख्यालय स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार एक कृषि उपज मंडी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंडी सचिव से रोजाना आने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और फसलों की आवक समेत कुछ जानकारियां मांग लीं। लेकिन सचिव महोदय किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। बस फिर क्या था, हमेशा शांत रहने वाले कलेक्टर साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पहले तो उन्होंने सचिव को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद मौके पर मौजूद तहसीलदार को निर्देश दे दिए कि सचिव को उसकी सरकारी जीप में ही बैठाकर रखा जाए। जब तक वह मांगी गई सारी जानकारी तैयार नहीं कर लेता, तब तक उसे मंडी से जाने नहीं दिया जाए। कलेक्टर साहब का यह अंदाज देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी सन्न रह गए। अब पूरे जिले में साहब के इस बदले हुए मिजाज के खूब किस्से सुनाए जा रहे हैं। खासकर वे अफसर ज्यादा सतर्क हो गए हैं, जो अब तक साहब के शांत स्वभाव को उनकी नरमी समझकर बिना तैयारी के बैठकों और निरीक्षण में पहुंच जाते थे।
10. सात साल तक एक ही कुर्सी पर जमी रहीं IAS मैडम अब हुईं रिटायर
ब्यूरोक्रेसी में जहां आईएएस अधिकारियों की कुर्सियां कुछ महीनों में बदल जाती हैं, वहीं एक प्रमोटी आईएएस मैडम ने सात साल तक एक ही संस्थान में एक ही पद पर जमे रहने का अनोखा रिकॉर्ड बना दिया। अब मैडम रिटायर हो गई हैं, लेकिन उनका यह सात साल का कार्यकाल लंबे समय तक याद किया जाएगा। खास बात यह है कि इस दौरान कई बार उनके कामकाज को लेकर सवाल उठे, विवाद भी हुए और उन्हें हटाने की चर्चाएं भी चलीं, लेकिन मैडम की कुर्सी पर कोई आंच नहीं आई। संस्थान में मैडम का रसूख कुछ ऐसा रहा कि सरकारें बदलीं, अफसर बदले और विभागीय समीकरण भी बदलते रहे, लेकिन उनकी पोस्टिंग जस की तस बनी रही। एक ही संस्थान में लगातार सात साल तक एक ही पद पर बने रहना अपने आप में किसी रिकॉर्ड से कम नहीं है। मैडम के कार्यकाल में कई ऐसे मौके भी आए जब उनके कामकाज को लेकर संस्थान के भीतर असहज स्थिति बनी, लेकिन हर बार मामला शांत हो गया और मैडम अपनी कुर्सी पर बरकरार रहीं। अब रिटायरमेंट के बाद संस्थान में उनके जाने को लेकर भी दो तरह के नजारे हैं। कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें मैडम की विदाई से राहत महसूस हो रही है, तो कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें उनके जाने का मलाल है। यानी मैडम की विदाई पर संस्थान में खुशी और गम दोनों का माहौल है। बहरहाल, मैडम तो सात साल तक एक ही कुर्सी संभालने के बाद विदा हो गईं, लेकिन उनके कार्यकाल की कहानी अब भी संस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है।
Abhishek Dubey

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