पंडिताई करते-करते “पुरोहित” जी बन बैठे कलेक्टर के दलाल : एसपी की जनप्रतिनिधियों के फोन से दूरी, नक्सल प्रभावित जिले की चाहत : बंगले के काम के लिए पीएस मैडम ने लिया डिमोशन

पंडिताई करते-करते “पुरोहित” जी बन बैठे कलेक्टर के दलाल : एसपी की जनप्रतिनिधियों के फोन से दूरी, नक्सल प्रभावित जिले की चाहत : बंगले के काम के लिए पीएस मैडम ने लिया डिमोशन
1 पंडिताई करते-करते "पुरोहित जी" बन गए कलेक्टर साहब के दलाल
एक आदिवासी जिले के कलेक्टर साहब के बंगले पर पिछले दिनों गणेश प्रतिमा की स्थापना हुई। चतुर्थी से लेकर गणेश विसर्जन तक दोनों समय पूजा-अर्चना और आरती की जिम्मेदारी एक स्थानीय पंडिताई करने वाले ‘पुरोहित’ जी को सौंपी गई। पूजा-पाठ के बहाने कलेक्टर साहब के बंगले पर लगातार आवाजाही ने ‘पुरोहित’ जी की नजदीकियां कुछ ऐसी बढ़ाईं कि अब उनकी पहचान महज पूजा कराने वाले पंडित की नहीं रह गई है। कहा जा रहा है कि क्षेत्र की जनता को कोई काम हो तो ‘पुरोहित’ जी के दरबार में पहुंचना शुरू हो गया है। साहब से नजदीकी का हवाला देकर काम कराने की उम्मीद भी जताई जाती है और कई मामलों में ‘पुरोहित’ जी खुद ही पैरवी करते नजर आते हैं। जाहिर है, पंडित हैं तो दक्षिणा भी लेते हैं। लेकिन दक्षिणा का एक बड़ा हिस्स कलेक्टर साहब को देना होता है।
2 एसपी की जनप्रतिनिधियों के फोन से दूरी, नक्सल प्रभावित जिले की चाहत
एक बड़े जिले के युवा एसपी साहब इन दिनों अपनी बदली हुई कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि साहब ने अचानक जनप्रतिनिधियों के फोन उठाना लगभग बंद कर दिया है। क्षेत्र के एक तेजतर्रार सांसद ने पिछले दिनों साहब को लगातार करीब दस बार कॉल किया, लेकिन इनमें से एक भी कॉल रिसीव नहीं हुई। यही नहीं, साहब के ऑफिस में बैठने का सिलसिला भी अब पहले जैसा नहीं रहा। साहब की इस बदली हुई कार्यशैली के पीछे की वजह जानने की कोशिश की गई तो एक अलग ही कहानी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, साहब ने हाल ही में पुलिस मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात कर कभी नक्सल प्रभावित रहे जिले में पदस्थापना की इच्छा जताई है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में उन्हें सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। अब साहब को शायद मौजूदा जिले की जिम्मेदारियों से ज्यादा अगली पोस्टिंग की चिंता सता रही है। यही वजह है कि उन्होंने अचानक फोन और ऑफिस—दोनों से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
3 बंगले के काम के लिए पीएस मैडम ने लिया डिमोशन
एक संस्थान के संचालक, जो प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं, पिछले दिनों लंबे अवकाश पर चले गए। उनके अवकाश पर जाते ही संस्थान का अतिरिक्त प्रभार एक प्रमुख सचिव स्तर की मैडम को सौंप दिया गया। मंत्रालय में यह देखकर कई अफसर हैरान रह गए कि आखिर पीएस स्तर की मैडम को अतिरिक्त सचिव स्तर के इस चार्ज में इतनी दिलचस्पी क्यों है? मामले की पड़ताल हुई तो इसकी वजह कुछ और ही निकली। बताया जाता है कि लंबे समय से मैडम के सरकारी बंगले का एक काम अटका हुआ था। संचालक साहब से कई बार कहने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। संयोग से संचालक साहब अवकाश पर गए और मैडम को उनका प्रभार मिल गया। फिर क्या था, मैडम ने चार्ज संभालते ही फाइल पर तेजी दिखाई, स्वीकृति हुई और बंगले का अटका काम भी शुरू हो गया। अब काम शुरू हो गया है तो भुगतान की चिंता संचालक साहब और ठेकेदार की होगी। मैडम के लिए फिलहाल इतना ही काफी है कि जिस काम के लिए अतिरिक्त सचिव स्तर का चार्ज लिया, वह काम आखिरकार पटरी पर आ गया।
4 ट्रांसफर के दो हफ्ते बाद भी रिलीव नहीं कर रहे एसीएस
एक प्रमोटी आईएएस इन दिनों अपने ट्रांसफर के बाद भी नई पदस्थापना पर ज्वाइन नहीं कर पाने को लेकर परेशान बताए जा रहे हैं। साहब का करीब दो सप्ताह पहले तबादला हो चुका है, लेकिन मौजूदा विभाग के एसीएस उन्हें रिलीव करने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। जब भी साहब रिलीव होने की बात करते हैं, एसीएस हर बार ‘देखते हैं’ कहकर बात टाल देते हैं। बताया जा रहा है कि साहब को एक संभाग में जमीनों से जुड़े मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी दी गई है। इधर, एसीएस ने उन्हें रोकने के लिए काम का ऐसा सिलसिला बना दिया है कि एक टास्क पूरा होते ही दूसरा टास्क थमा दिया जाता है। ऐसे में ट्रांसफर आदेश जारी होने के बावजूद साहब की रवानगी फिलहाल अटकी हुई है।
5 विपक्ष के कारण बच गई युवा आईएएस की कलेक्टरी
एक बड़े जिले में युवा कलेक्टर की पदस्थापना को अभी ज्यादा समय नहीं बीता था कि जिले में एक बड़ी घटना सामने आ गई। मामला इतना गंभीर रहा कि केंद्र में नेता प्रतिपक्ष को खुद जिले का दौरा करना पड़ा और इसके बाद सियासी हलचल भी तेज हो गई। घटनाक्रम के बाद सरकार के स्तर पर कलेक्टर को हटाकर मंत्रालय भेजने की चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष के दौरे के बाद समीकरण बदल गए। अब कलेक्टर को हटाने से सरकार के सामने एक अलग तरह की राजनीतिक स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। यदि इस समय कलेक्टर को हटाया जाता है तो इसे विपक्ष सरकार की गलती स्वीकार करने के तौर पर प्रचारित कर सकता है। ऐसे में फिलहाल सरकार ने कलेक्टर को हटाने का फैसला टाल दिया है और साहब की कलेक्टरी बचती नजर आ रही है।
6 आईएएस मैडम को चाहिए कलेक्टरी
एक प्रमोटी आईएएस मैडम ने पिछले दिनों बड़े साहब से मुलाकात की। मुलाकात का मकसद साफ था—मैडम अब फील्ड पोस्टिंग चाहती हैं और सीधे शब्दों में कहें तो उन्हें कलेक्टर बनना है। मैडम ने बड़े साहब के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि आईएएस अवार्ड हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उन्हें किसी जिले की कमान संभालने का मौका नहीं मिला। मैडम ने आग्रह किया कि भले ही छोटा जिला दिया जाए, लेकिन कम से कम एक बार उन्हें कलेक्टरी का अवसर जरूर दिया जाए, ताकि वे फील्ड में अपनी कार्यक्षमता साबित कर सकें। बताया जा रहा है कि बड़े साहब ने भी मैडम की बात को गंभीरता से सुना और उनके आग्रह पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।
7 मुख्यमंत्री की नजर में फेल हो चुके हैं यह पीएस
प्रदेश सरकार ने लोगों के शासकीय काम जल्द पूरे करने के मकसद से एक अभियान शुरू किया है। इसी अभियान की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने पूछा कि अभियान की जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी गई है। बड़े साहब ने जैसे ही एक बड़े विभाग के पीएस का नाम लिया, मुख्यमंत्री ने तुरंत सवाल किया—“इनसे हो पाएगा क्या?” इसके बाद मुख्यमंत्री ने दो एसीएस को अभियान की जिम्मेदारी सौंपते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब आप इसे संभाल लें। दरअसल, पीएस को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी की एक वजह पहले से ही सामने आ चुकी है। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री ने गांव के लोगों को सौगात देते हुए एक योजना की शुरुआत की थी। लेकिन करीब दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पीएस उस योजना को जमीन पर लागू नहीं करा सके। ऐसे में मुख्यमंत्री का भरोसा कम होना और अभियान की जिम्मेदारी दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
8 मंत्री जी की रात की बैठकों से परेशान अफसर
एक मंत्री जी की कार्यशैली से उनका पूरा विभाग परेशान बताया जा रहा है। हालात यह हैं कि मंत्री जी के पास कोई फाइल जाती है तो या तो उस पर ‘चर्चा’ लिखकर वापस भेज दी जाती है या फिर फाइल को अपने पास ही पेंडिंग रख लिया जाता है। धीरे-धीरे मंत्री जी के पास फाइलों का अच्छा-खासा अंबार लग गया है। दूसरी ओर, मंत्री जी को बैठकें लेने का भी खासा शौक है। कई बार बैठक का सिलसिला देर रात 12 बजे तक चलता रहता है। स्थिति यह है कि कुछ अफसर बीच में ही बैठक छोड़कर निकल जाते हैं, लेकिन मंत्री जी की बैठक जारी रहती है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी लंबी बैठकों के बावजूद ठोस नतीजा निकलने के बजाय उनमें ज्यादातर ज्ञान की गंगा ही बहती रहती है। नतीजा यह कि अफसर देर रात तक बैठकों में उलझे रहते हैं और फाइलों का ढेर अपनी जगह बना रहता है।
9 बैंक के अफसरों पर नाराज हुए एसीएस
पंजाब-चंडीगढ़ में बैंक के एक अधिकारी पर महिला मित्रों पर पैसे खर्च करने के लिए कथित घोटाला करने का मामला सामने आने के बाद इसकी गूंज प्रदेश में भी सुनाई दी। पिछले दिनों स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की बैठक में जब यह मुद्दा उठा तो एक एसीएस बैंक अधिकारियों पर खासे नाराज हो गए। एसीएस ने कहा कि बैंक के ही कुछ अधिकारियों की कार्यशैली के कारण इस तरह के घोटालों की गुंजाइश बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बैंक अधिकारी सरकारी अफसरों को अपने बैंक में सरकारी फंड ट्रांसफर कराने के बदले कमीशन देने तक का ऑफर करते हैं। इसी तरह के लालच में आकर कई बार सरकारी अफसर फंड ट्रांसफर के मामलों में फंस जाते हैं। एसीएस की नाराजगी और सख्त तेवर देखकर बैठक में मौजूद बैंक अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा।
10 जनप्रतिनिधियों की नाराजगी से कलेक्टर साहब की विदाई तय!
एक युवा कलेक्टर की जल्द ही जिले से विदाई की तैयारी बताई जा रही है। इसकी वजह जिले के अधिकांश जनप्रतिनिधियों की कलेक्टर साहब से नाराजगी है। बताया जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों ने साहब के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उनकी शिकायत है कि कलेक्टर साहब काम करना तो दूर, उनका मोबाइल तक रिसीव नहीं करते। हालांकि, जनप्रतिनिधियों की शिकायत का दूसरा पहलू भी है। सूत्र बताते हैं कि कई बार उनसे ऐसे काम कराने का आग्रह किया जाता है, जो नियमों के दायरे से बाहर होते हैं और साहब ऐसे मामलों में हामी भरने के बजाय नियमों का हवाला देते हैं। यही वजह अब उनके लिए भारी पड़ती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही साहब को मौजूदा जिले से हटाकर किसी दूसरी जगह भेज सकती है। फिलहाल प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि उन्हें ‘हीरा की नगरी’ की कमान सौंपी जा सकती है।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →