रिटायर्ड एसीएस के करोड़ों रुपये डकार गया कारोबारी : “ईमानदार” एसपी साहब ने शुरू की ठेकेदार से मासिक बंदी : घोटालेबाज अफसर को बचाने आईएएस पर नहीं चला मंत्री का रसूख

1. रिटायर्ड एसीएस के करोड़ों रुपये डकार गया कारोबारी
एक एसीएस साहब को लगा था कि रिटायरमेंट के बाद वो सुकूनभरी जिंदगी काटेंगे। लेकिन एक कारोबारी ने उनकी सारी तमन्नाओं पर पानी फेर दिया है। मामला ग्वालियर के एक कारोबारी के पास अटके करोड़ों रुपये का बताया जा रहा है। चर्चा है कि साहब कई बार ग्वालियर जाकर कारोबारी को समझा चुके हैं कि भाई, अब तो पैसा लौटा दो! लेकिन कारोबारी हैं कि टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे। जब खुद के समझाने से बात नहीं बनी तो साहब ने जान-पहचान वालों से भी फोन करवा लिए। मगर लगता है कारोबारी ने भी ठान रखी है कि साहब की कोई सिफारिश काम नहीं आने देंगे। अब देखिए किस्मत का खेल! नौकरी में रहते हुए साहब के पास लोगों की समस्याएं लेकर पहुंचने वालों की लाइन लगती होगी। अब अपनी समस्या लेकर साहब को खुद चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फर्क बस इतना है कि पहले लोग साहब से मिलने के लिए इंतजार करते थे, अब साहब किसी के फोन उठाने का इंतजार कर रहे हैं। ब्यूरोक्रेसी में चर्चा है कि साहब को अब समझ आ रहा होगा कि कुर्सी का रौब अपनी जगह और उधार दिए पैसे की वसूली अपनी जगह। कुर्सी रहते सिस्टम चलता है, लेकिन पैसा फंस जाए तो अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं।
2. “ईमानदार” एसपी साहब ने शुरू की ठेकेदार से मासिक बंदी
बड़े जिले में तैनात एसपी साहब अब तक अपने अधीनस्थों को वसूली के मामले में सख्त हिदायत देते रहे हैं। मातहतों को साफ संदेश था कि किसी पुलिसकर्मी की वसूली की शिकायत मिली तो खैर नहीं। लेकिन अब साहब की अपनी कार्यशैली को लेकर ही सवाल उठने लगे हैं। आरोप हैं कि जिले के बड़े शराब कारोबारी से कथित मासिक बंदी लेकर उसे संरक्षण दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि शराब ठेकेदार दुकानों के पास खुलेआम अहाते संचालित कर रहा है। जब भी कोई पुलिसकर्मी वहां बैठे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचता है, तो कुछ ही देर में साहब के करीबी पुलिसकर्मी का फोन आ जाता है। संदेश साफ होता है—कार्रवाई छोड़ो और वापस लौट जाओ। ऊपर से आने वाले इस कथित फरमान के आगे मैदानी पुलिसकर्मी भी बेबस नजर आते हैं। नतीजा यह कि कार्रवाई की तैयारी करने वाली पुलिस के कदम बीच रास्ते में ही रुक जाते हैं। अब सवाल यह है कि जिस वसूली पर साहब खुद सख्ती की बात करते थे, उसी के आरोपों पर उनकी निगाह कब पड़ेगी?
3. घोटालेबाज अफसर को बचाने आईएएस पर नहीं चला मंत्री का रसूख
निगम में जीएम साहब की अपनी ही अलग सल्तनत चल रही थी। संविदा की नौकरी थी लेकिन रुतबा ऐसा कि मानो निगम उन्हीं के इशारे पर चलता हो। करोड़ों के घोटालों के आरोपों के बावजूद साहब का बाल भी बांका नहीं हो रहा था। वजह भी बड़ी दिलचस्प थी। साहब खुद को मंत्रीजी का खास बताते थे और इसी रसूख के दम पर बाकी अफसरों को भी ठेंगे पर रखते थे। लेकिन साहब की इस सल्तनत में उस वक्त भूचाल आ गया जब निगम की कमान एक युवा आईएएस के हाथों में पहुंची। एमडी की कुर्सी संभालते ही उनके सामने जीएम साहब की कारगुजारियों से जुड़ी फाइल पहुंच गई। फिर क्या था फाइल चली तो सीधे सेवा समाप्ति तक जा पहुंची। जीएम साहब को बचाने के लिए मंत्रीजी की सिफारिश भी पहुंची। अब तक जिस नाम का रौब दिखाकर साहब अपनी गाड़ी चला रहे थे वही नाम उन्हें बचाने के लिए मैदान में उतर आया। मगर युवा आईएएस ने किसी की परवाह नहीं की और सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।
4. डीआईजी साहब की फेसबुक पोस्ट से उठे सवाल
पुलिस मुख्यालय में पदस्थ युवा डीआईजी साहब की एक फेसबुक पोस्ट ने सबका ध्यान खींच लिया है। साहब ने लिखा कि भ्रष्ट व्यक्ति को पता होता है कि कौन भ्रष्ट है और कौन ईमानदार, लेकिन एक ईमानदार व्यक्ति ही दूसरे ईमानदार की नीयत पर शक करता है। अब पोस्ट तो साहब ने फेसबुक पर लिख दी, लेकिन इसके मायने तलाशने का काम शुरू हो गया है। पुलिस महकमे में कुछ लोग यह समझने में लगे हैं कि आखिर ईमानदारी पर अचानक इतना जोर देने की नौबत क्यों आई? क्या किसी ने साहब की नीयत पर सवाल उठा दिया या फिर किसी खास अनुभव ने उन्हें यह लिखने के लिए प्रेरित किया? सबसे दिलचस्प सवाल तो यही है कि अगर साहब की पोस्ट किसी खास वाकये से जुड़ी है, तो वह किरदार कौन है जिसने एक ईमानदार अफसर को दूसरे ईमानदार पर शक करने वाली बात लिखने पर मजबूर कर दिया? फिलहाल पोस्ट खुली किताब है, लेकिन उसके पीछे की कहानी का अगला पन्ना क्या है, यह जानने की
5. मंत्रीजी के धरने ने कलेक्टर का तबादला अटका दिया
राजधानी से सटे एक जिले के कलेक्टर साहब को हटवाने के लिए केंद्रीय मंत्रीजी ने पूरी ताकत लगा दी। कलेक्टर की कार्यशैली से मंत्रीजी इतने परेशान थे कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोल दिया। आरोप था कि साहब न तो फोन उठाते हैं और न ही क्षेत्र की जनता के कामों को तवज्जो देते हैं। कई बार कोशिश के बाद भी जब बात नहीं बनी तो मंत्रीजी धरने पर बैठ गए। मंत्रीजी को उम्मीद थी कि उनके विरोध से सरकार पर दबाव बनेगा और कलेक्टर की विदाई का श्रेय भी उन्हीं के खाते में आएगा। लेकिन सियासत का गणित कुछ ऐसा बिगड़ा कि बाजी ही पलट गई। दिलचस्प बात यह थी कि कलेक्टर साहब खुद भी जिले से विदाई चाहते थे और सरकार भी उनका तबादला करने की तैयारी में थी। आखिरकार तबादला सूची जारी हुई और कई जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए। मगर जिस कलेक्टर को हटवाने के लिए मंत्रीजी ने इतना जोर लगाया था, उनका नाम सूची से गायब था। अब मंत्रीजी के धरने का नतीजा ऐसा निकला कि बाकी कलेक्टर तो नई कुर्सियों पर पहुंच गए, लेकिन निशाने पर आए साहब अपनी जगह जमे रह गए। जिसे हटवाने निकले थे, उसी की कुर्सी बच गई। इसे कहते हैं—तबादले की लड़ाई में विरोध भी कभी-कभी कवच बन जाता है!
6. एसपी मैडम का अलग अंदाज बना चर्चा का विषय
एक बड़े और संवेदनशील जिले में पदस्थ युवा एसपी मैडम नवरात्रि के दौरान अपने अलग अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। आमतौर पर सख्त पुलिसिंग की जिम्मेदारी संभालने वाली मैडम गरबा पंडाल में युवतियों के साथ गरबा खेलती नजर आईं। इतना ही नहीं, उन्होंने युवतियों के साथ फोटो सेशन भी कराया। सोशल मीडिया पर उनकी इन तस्वीरों को खूब पसंद किया जा रहा है। लेकिन मैडम का दिन सिर्फ गरबा और तस्वीरों तक सीमित नहीं रहा। उत्सव में शामिल होने के बाद वे रात में ही ड्यूटी पर निकल पड़ीं और कई थानों का निरीक्षण कर पुलिस व्यवस्था का जायजा लिया। यानी एक तरफ त्योहार की रौनक में लोगों के साथ कदमताल और दूसरी तरफ वर्दी की जिम्मेदारी निभाने का अंदाज। जिला पुलिस के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां पहले पदस्थ रहे कई एसपी अलग-अलग विवादों के कारण कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। ऐसे माहौल में मैडम की सहजता, सक्रियता और जनता के बीच उनकी मौजूदगी को सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है।
7. कलेक्टर के तबादले की खुशी में रातभर जागे सांसदजी लेकिन बाजी पलट गई
एक बड़े जिले के सांसदजी और युवा कलेक्टर साहब के बीच इन दिनों पटरी नहीं बैठ रही है। सांसदजी प्रदेश की राजधानी से लेकर दिल्ली तक साहब को हटाने के लिए जोर लगा चुके हैं, लेकिन कलेक्टर की कुर्सी है कि छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही। इसी बीच एक दिन सांसदजी को खबर मिली कि रात में आईएएस अफसरों की तबादला सूची जारी होने वाली है और उसमें कलेक्टर साहब का नाम भी शामिल है। फिर क्या था, सांसदजी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने करीबी समर्थकों को भी बता दिया कि आखिरकार उन्होंने कलेक्टर को निपटा ही दिया। आमतौर पर जल्दी सोने वाले सांसदजी उस रात तबादला सूची के इंतजार में देर तक जागते रहे। रात करीब साढ़े 11 बजे सूची आई तो सांसदजी ने सबसे पहले अपने जिले के कलेक्टर का नाम तलाशा। लेकिन नाम नदारद! जिस खुशी में रातभर नींद उड़ गई थी, वह कुछ ही पलों में काफूर हो गई। अब समर्थकों को भी समझ नहीं आ रहा कि सांसदजी को क्या जवाब दें। वैसे सांसदजी तक पहुंची खबर पूरी तरह गलत भी नहीं थी। कलेक्टर साहब का नाम सूची में था, लेकिन जिस जिले में उनकी पोस्टिंग होनी थी, वहां के कलेक्टर का तबादला ऐन वक्त पर नहीं हो पाया। लिहाजा पूरी कवायद के बीच साहब का नाम भी कट गया। अब सांसदजी को अगली सूची का इंतजार करना होगा और समर्थकों को फिलहाल दिलासा देकर काम चलाना होगा।
8. कलेक्टर बनते-बनते रह गईं मैडम
पिछले दिनों जारी आईएएस अफसरों की तबादला सूची में एक युवा मैडम का नाम भी शामिल था। मैडम को कलेक्टर बनाकर जिले की कमान सौंपी जानी थी, लेकिन ऐन वक्त पर पूरा मामला अटक गया। दिलचस्प बात यह रही कि सरकारी आदेश आने से पहले ही सोशल मीडिया पर मैडम को कलेक्टर बना दिया गया और जिला भी आवंटित कर दिया गया। कुछ पत्रकारों ने तो खबर को अखबार से लेकर वेबसाइट तक पर जगह दे दी। यानी कुर्सी मिलने से पहले ही मैडम की नई पारी का ऐलान हो गया। लेकिन असली पेच कहीं और फंसा था। जिस जिले में मैडम की पोस्टिंग होनी थी, वहां के मौजूदा कलेक्टर का तबादला आखिरी वक्त पर रुक गया। नतीजा यह हुआ कि मैडम का कलेक्टर बनने का मामला भी फिलहाल टल गया। अब सोशल मीडिया पर बधाइयां देने वालों को भी इंतजार करना पड़ रहा है। वैसे प्रशासनिक हलकों में मैडम की अगली पोस्टिंग को लेकर उम्मीद बनी हुई है। माना जा रहा है कि अगली तबादला सूची में उन्हें जिले की कमान मिल सकती है। फिलहाल मैडम को कलेक्टर की कुर्सी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
9. शिकायतों ने छीन ली युवा कलेक्टर की कुर्सी
पहली ही पोस्टिंग में बड़ा और संवेदनशील जिला मिलना किसी भी युवा आईएएस के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन एक साहब के लिए यही मौका ज्यादा दिन नहीं टिक पाया। पिछले दिनों जारी तबादला सूची में उन्हें जिले से हटाकर मंत्रालय में ऐसे विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई, जिसे प्रशासनिक हलकों में लूप लाइन माना जाता है। साहब की कार्यशैली को लेकर जिले में शुरुआत से ही शिकायतों का सिलसिला चल रहा था। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधीनस्थ अफसरों तक की शिकायत थी कि साहब कामकाज में अपेक्षित रुचि नहीं लेते, कार्यालय में कम समय देते हैं और फोन भी आसानी से रिसीव नहीं करते। जिले के दौरे भी गिनती के ही होते थे। ऐसे में लोगों की समस्याएं लेकर पहुंचने वालों को निराशा हाथ लगती रही। धीरे-धीरे शिकायतें बढ़ती गईं और मामला सरकार तक पहुंच गया। आखिरकार तबादला सूची में साहब की जिले से विदाई हो गई। पहली बार में ही बड़े जिले की कमान संभालने वाले युवा आईएएस को अब मंत्रालय में बैठकर काम करना होगा। जिले में उनकी पारी छोटी रही, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह संदेश जरूर छोड़ गई कि बड़ी कुर्सी मिलने के साथ जिम्मेदारियों पर खरा उतरना भी जरूरी है।
10. बुके देकर निकले मंत्रीजी मुखिया जी पूछते रह गए कहां गए
महाकौशल के एक कद्दावर मंत्रीजी के गृह जिले में पिछले दिनों प्रदेश के मुखिया जी का दौरा हुआ। प्रोटोकॉल के मुताबिक मंत्रीजी हेलीपैड पहुंचे और मुखिया जी को बुके देकर स्वागत भी किया। लेकिन इसके बाद मंत्रीजी ऐसे गायब हुए कि पूरे कार्यक्रम में कहीं नजर ही नहीं आए। मुखिया जी ने जब प्रशासनिक अफसरों से लेकर वहां मौजूद नेता और जनप्रतिनिधियों से मंत्रीजी के बारे में पूछा तो किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। गृह जिले का कार्यक्रम और अपने ही मंत्रीजी नदारद! यह बात वहां मौजूद लोगों को भी खटक गई। उधर, मंत्रीजी ने अपने समर्थकों को इसकी वजह भी बता दी। उनका कहना था कि प्रशासन ने कार्यक्रम की सूचना और जानकारी ठीक से नहीं दी थी। ऐसे में उन्होंने पूरे कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा। अब वजह सूचना की कमी थी या मंत्रीजी की कोई और नाराजगी, यह तो वही जानें। लेकिन मुखिया जी के स्वागत में बुके थमाने के बाद पूरे कार्यक्रम से गायब रहने का उनका अंदाज जरूर चर्चा का विषय बन गया।





