भोपाल शराब ठेका मामला: 2.75 करोड़ की एफडीआर फर्जी मिलने पर आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा निलंबित

भोपाल शराब ठेका मामला: 2.75 करोड़ की एफडीआर फर्जी मिलने पर आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा निलंबित
मध्य प्रदेश में भोपाल के शराब ठेके से जुड़े मामले में आबकारी विभाग ने जिला आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया है। रायचूरा उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी भी रह चुके हैं। विभागीय जांच में शराब ठेके के लिए जमा कराई गई 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर फर्जी पाई गई। इसके अलावा लाइसेंस जारी करने और हस्तांतरण की प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी किया। दो सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट में रायचूरा की भूमिका में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं पाए जाने का उल्लेख है। यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 का है।
बैंक ने एफडीआर जारी करने से किया इनकार
जांच रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के शराब समूह बीपीएल/एफ-14 (पीएंडटी चौराहा) के ठेके के लिए 2,75,53,535 रुपये की ई-एफडीआर जमा कराई गई थी। इसके साथ 20 मई 2024 की सत्यापन रिपोर्ट भी लगाई गई थी। अक्टूबर 2026 में बैंक से सत्यापन कराने पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि संबंधित एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि सत्यापन रिपोर्ट लाइसेंसी के ई-मेल से मिली थी। वहीं, बैंक को सत्यापन के लिए भेजे गए पत्र की तामील का रिकॉर्ड नहीं मिला।
नियमों के मुताबिक, प्रतिभूति की शेष 50 प्रतिशत राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन एफडीआर 12 मई को जमा की गई। इसके बावजूद देरी पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संबंधित बैंक उस समय निर्धारित नियमों के तहत प्रतिभूति स्वीकार करने के लिए मान्य श्रेणी में नहीं था।
लाइसेंस हस्तांतरण में भी मिलीं अनियमितताएं
जांच में मेसर्स मां माइंस के शराब लाइसेंस के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। आवेदन 10 जुलाई 2024 को मिला था, जबकि कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को हस्तांतरण का आदेश जारी किया।
रिपोर्ट के अनुसार, फर्म की पंजीकृत पार्टनरशिप डीड के बिना ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके अलावा विजय सिंह के नाम पर 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उन्हें फर्म का साझेदार नहीं बताया गया था। उनके व्यक्तिगत बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक भी स्वीकार किए गए।
आरोपों के बाद ओएसडी पद से हटाए गए थे रायचूरा
दीपम रायचूरा को इससे पहले उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी पद से हटा दिया गया था। यह कार्रवाई हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद की गई थी। उस समय जांच के निर्देश भी दिए गए थे।
अब विभागीय जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त के आदेश में कुल सात बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
निलंबन अवधि में रायचूरा का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। हालांकि, विभागीय जांच के निष्कर्ष प्रथम दृष्टया हैं और इन्हें अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →