Bhopal Shahi Kabristan Land: शाही कब्रिस्तान की जमीन वक्फ की नहीं, सरकारी होने का दावा; 1959 से रिकॉर्ड में सरकारी दर्ज

भोपाल। शाही कब्रिस्तान की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रशासन की जांच में जमीन के सरकारी होने की बात सामने आई है। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील के विरोध और हंगामे के बाद जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। प्रशासन के मुताबिक, रिकॉर्ड में संबंधित जमीन वक्फ की संपत्ति के बजाय सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है।
1959 से सरकारी दर्ज है खसरा नंबर 208/1
प्रशासन द्वारा जांचे गए रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा नंबर 208/1 की करीब 29.87 एकड़ जमीन वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी। प्रशासन का कहना है कि बाद के रिकॉर्ड में भी जमीन का दर्जा सरकारी ही बना रहा।
वर्ष 2026-27 के ताजा राजस्व दस्तावेजों और मेट्रो से जुड़े भूमि रिकॉर्ड में भी संबंधित जमीन को सरकारी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसके आधार पर प्रशासनिक स्तर पर जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का दावा किया गया है।
वक्फ को सिर्फ प्रबंधन का अधिकार मिलने की बात
जांच में सामने आए प्रशासनिक दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 1958 में इस जमीन के संबंध में वक्फ को प्रबंधन और देखरेख का अधिकार दिया गया था। हालांकि, प्रशासन के अनुसार इससे जमीन का मालिकाना हक वक्फ को हस्तांतरित नहीं हुआ था।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने और वक्फ को केवल प्रबंधन का अधिकार दिए जाने के आधार पर प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी संपत्ति है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद में संबंधित पक्षों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों का पूरा संदर्भ महत्वपूर्ण रहेगा।





