दमोह जिला अस्पताल में बीमार बेटे की मां से लगवाया पोंछा? वीडियो वायरल होने पर नर्सिंग स्टाफ और सफाई एजेंसी को नोटिस

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने अस्पताल की सफाई व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां अपने बीमार बेटे का इलाज कराने पहुंची एक महिला पुरुष वार्ड में पोंछा लगाती दिखाई दे रही है। महिला का आरोप है कि वार्ड में गंदगी फैलने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने उसे फर्श साफ करने के लिए कहा था। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और संबंधित कर्मचारियों सहित सफाई एजेंसी से जवाब मांगा है।
बीमार बेटे को लेकर अस्पताल पहुंची थी महिला
जानकारी के मुताबिक, तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली हल्की बहू अपने बीमार बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची थी। महिला ने बताया कि उसके बेटे को दस्त की शिकायत थी। इलाज के दौरान पुरुष वार्ड के फर्श पर गंदगी फैल गई। महिला का आरोप है कि इसके बाद उसे ही फर्श साफ करने के लिए कहा गया, जिसके चलते उसने पोंछा लगाया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, महिला से किन परिस्थितियों में सफाई कराई गई और उसे ऐसा करने के लिए किसने कहा, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सफाई पर हर महीने खर्च होते हैं 8 से 9 लाख रुपये
मामले ने अस्पताल की सफाई व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से तीन सुपरवाइजर और 52 सफाईकर्मियों सहित कुल 55 कर्मचारी तैनात हैं।
अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब 8 से 9 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सफाई के लिए कर्मचारियों की तैनाती है और इस पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो वार्ड में गंदगी साफ करने की जिम्मेदारी मरीज की मां पर क्यों आई?
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि घटना के समय वार्ड में सफाईकर्मी मौजूद थे या नहीं और सफाई व्यवस्था की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
नर्सिंग स्टाफ और सफाई एजेंसी को कारण बताओ नोटिस
वीडियो वायरल होने के बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने बताया कि संबंधित ड्यूटी नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।
सिविल सर्जन के मुताबिक, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में सफाई व्यवस्था, कर्मचारियों की ड्यूटी और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि वार्ड में सफाईकर्मी उपलब्ध थे या नहीं और महिला को पोंछा लगाने के लिए किसने कहा था।
सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज के साथ स्वच्छ वातावरण और सम्मानजनक व्यवहार मिलना भी जरूरी है। अब मामले में अस्पताल प्रबंधन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।





