धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर संत समाज में विवाद, साध्वी हर्षा रिछारिया बोलीं- व्यासपीठ से भाषा में संयम जरूरी

धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर संत समाज में विवाद, साध्वी हर्षा रिछारिया बोलीं- व्यासपीठ से भाषा में संयम जरूरी
भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयानों को लेकर धार्मिक जगत में विवाद शुरू हो गया है। करवा चौथ को 'खसम पूजन दिवस' कहने और युवाओं को नारी से दूरी बनाने की सलाह देने वाले उनके बयानों पर साध्वी हर्षा रिछारिया ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि व्यासपीठ पर बैठने वाले संतों और कथावाचकों को अपनी भाषा और शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए।
करवा चौथ पर टिप्पणी को लेकर जताई नाराजगी
साध्वी हर्षा रिछारिया (हर्षानंद गिरी) ने एक वीडियो जारी कर धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंच से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे किसी की धार्मिक आस्था या सनातन परंपराओं को ठेस पहुंचे।
करवा चौथ का उल्लेख करते हुए साध्वी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे पवित्र पर्व के लिए हल्के या आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
नारी और कन्या पूजन को लेकर भी उठाए सवाल
साध्वी हर्षा ने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने युवाओं को नशे और नींद के साथ नारी से भी दूर रहने की सलाह दी थी। साध्वी ने सवाल किया कि यदि मंच से नारी को गलत संदर्भ में पेश किया जाता है, तो फिर सनातन धर्म में कन्या पूजन की परंपरा का क्या औचित्य रह जाता है?
गौरतलब है कि धीरेंद्र शास्त्री ने दतिया के पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद युवाओं को नशे, नींद और नारी से दूरी बनाने की सीख दी थी। इसके बाद शिवपुरी जिले के करैरा में कथा के दौरान उन्होंने करवा चौथ को लेकर 'खसम पूजन दिवस' टिप्पणी की थी। अब साध्वी हर्षा रिछारिया की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला धार्मिक जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
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