India News: ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली कोर्ट ने फिर जारी किया जमानती वारंट, 2018 के मानहानि केस में 15 दिन में दूसरी बार कार्रवाई

India News: ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली कोर्ट ने फिर जारी किया जमानती वारंट, 2018 के मानहानि केस में 15 दिन में दूसरी बार कार्रवाई
नई दिल्ली। चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 के मानहानि मामले में उनके खिलाफ एक बार फिर जमानती वारंट जारी किया है। शनिवार को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राहुल जैन की अदालत ने यह आदेश दिया। पिछले 15 दिनों में यह दूसरी बार है जब अदालत ने ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
यह मामला विकास संस्कृत्यायन उर्फ विकास पांडे की ओर से दाखिल मानहानि की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी को लेकर उन्होंने अदालत में मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
17 अक्टूबर को भी जारी हुआ था वारंट
इससे पहले दिल्ली की अदालत ने 17 अक्टूबर को भी ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। सुनवाई के दौरान नोटिस तामील कराने गए अधिकारी ने अदालत को बताया था कि ध्रुव राठी का घर बंद मिला।
इसके बाद अदालत ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित उनके पते पर नए समन जारी करने के निर्देश दिए थे। अब शनिवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बार फिर उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
वकील ने अदालत को बताया कि ऑस्ट्रिया में रहते हैं राठी
शिकायतकर्ता विकास पांडे की ओर से पेश अधिवक्ता समक्ष शर्मा ने अदालत को बताया कि ध्रुव राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राठी दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए भारत आए थे।
अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि ध्रुव राठी को पहली बार जुलाई 2019 में समन जारी किया गया था। इसके बावजूद उनकी पेशी को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
2018 से चल रहा है मानहानि का मामला
ध्रुव राठी के खिलाफ यह मामला वर्ष 2018 में दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। विकास पांडे ने आरोप लगाया था कि राठी के यूट्यूब वीडियो से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है। ध्रुव राठी के खिलाफ जारी जमानती वारंट उनकी पेशी सुनिश्चित करने की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे मानहानि के आरोप सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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