Gwalior News: BAMS छात्रों ने कॉलेज-अस्पताल में की तालाबंदी, ₹9,383 स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बीएएमएस (BAMS) इंटर्न छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर धरना दिया। छात्रों का कहना है कि उन्हें दूसरे राज्यों और मध्य प्रदेश के एमबीबीएस इंटर्न की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड मिल रहा है। मांग पूरी नहीं होने पर छात्रों ने सामूहिक रूप से डिग्री छोड़ने तक की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश में हर महीने मिलते हैं ₹9,383
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बीएएमएस इंटर्न को हर महीने केवल 9,383 रुपये स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसके मुकाबले दूसरे राज्यों में मिलने वाली राशि काफी अधिक है।
छात्रों ने बताया कि तेलंगाना में करीब 29,792 रुपये, बिहार में 27,000 रुपये, दिल्ली में 23,500 रुपये और राजस्थान में 22,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न को 21,500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
छात्रों का कहना है कि एक ही प्रदेश में चिकित्सा की अलग-अलग पद्धतियों के इंटर्न के स्टाइपेंड में इतना अंतर उचित नहीं है।
NCISM के नियमों का दिया हवाला
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग के समर्थन में छात्र राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) के राजपत्र विनियम 15-B का हवाला दे रहे हैं। छात्रों के मुताबिक, इस विनियम में इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड को लेकर चिकित्सा पद्धतियों के बीच समानता रखने का प्रावधान है।
छात्रों का आरोप है कि कम स्टाइपेंड मिलने से आयुर्वेद के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव हो रहा है। वे लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
तालाबंदी के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर धरना शुरू किया। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जा सकता है। उन्होंने सामूहिक रूप से डिग्री छोड़ने तक की बात कही है।
अब निगाहें शासन और कॉलेज प्रबंधन पर हैं कि वे छात्रों की मांग पर क्या कदम उठाते हैं। वहीं, स्टाइपेंड में समानता को लेकर छात्रों द्वारा उठाए गए नियमों के दावों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है





