“रिश्वत” वाली सीडी में आईएएस मैडम का नाम : एसपी साहब ने सरकार से की एडीपीओ की शिकायत : विधायक की शिकायत से हटे कलेक्टर मैडम के प्रिय डिप्टी कलेक्टर

“रिश्वत” वाली सीडी में आईएएस मैडम का नाम : एसपी साहब ने सरकार से की एडीपीओ की शिकायत : विधायक की शिकायत से हटे कलेक्टर मैडम के प्रिय डिप्टी कलेक्टर

1."रिश्वत" वाली सीडी में आईएएस मैडम का नाम

सरकार तक एक शिकायत के साथ ऐसी सीडी पहुंची है, जिसमें दो बड़े अफसरों के बीच कथित बातचीत का जिक्र है। बातचीत में कहा जा रहा है कि यदि किसी अधिकारी का तबादला कराना है तो विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहीं आईएएस मैडम से “लेन-देन” करना होगा। सीडी और शिकायत सरकार तक पहुंचने के बाद मैडम की ओर से भेजी गई तबादला सूची को फिलहाल रोक दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मैडम से वरिष्ठ एक अधिकारी को सौंपी गई है। हालांकि, विभागीय सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ अधिकारी ने अभी तक मामले की औपचारिक जांच शुरू नहीं की है। ऐसे में शिकायत फिलहाल वरिष्ठ अफसर की फाइलों में दबी हुई है। यह आईएएस अधिकारी सीधी भर्ती के जरिए सेवा में आई हैं।

2. एसपी साहब ने सरकार से की एडीपीओ की शिकायत

एक बड़े जिले में एसपी के तौर पर पदस्थ ईमानदार छवि वाले दमदार आईपीएस का एडीपीओ साहब से विवाद सामने आया है। एसपी साहब की शिकायत है कि एडीपीओ उनसे अपेक्षित तालमेल नहीं रखते। यही नहीं, गंभीर मामलों में जब एसपी साहब उनसे चर्चा करना चाहते हैं तो उन्हें समय तक नहीं दिया जाता। एसपी साहब का मानना है कि पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय नहीं होने का सीधा फायदा आरोपियों को मिल रहा है। ऐसे में उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि मौजूदा एडीपीओ को हटाकर किसी अन्य अधिकारी की पदस्थापना की जाए। एसपी साहब की दलील है कि यदि पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल हो तो गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी के साथ दोषसिद्धि की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। अब देखना यह है कि सरकार इस शिकायत पर क्या फैसला करती है।

3. विधायक की शिकायत से हटे कलेक्टर मैडम के प्रिय डिप्टी कलेक्टर

आदिवासी बहुल जिले में पदस्थ प्रमोटी आईएएस कलेक्टर मैडम अपने खास डिप्टी कलेक्टर को तबादला आदेश के बाद भी रिलीव करने को तैयार नहीं थीं। उधर, सत्ताधारी दल से जुड़े एक विधायक लगातार मैडम से डिप्टी कलेक्टर को रिलीव करने का आग्रह कर रहे थे। जब विधायक जी के निर्देशों पर अमल नहीं हुआ तो उन्होंने सीधे सरकार का दरवाजा खटखटा दिया। विधायक जी ने सरकार को बताया कि पहले उन्होंने जिले में पदस्थ सीधी भर्ती वाली कलेक्टर मैडम को हटवाया और इसके बाद डिप्टी कलेक्टर का भी तबादला कराया। लेकिन नई कलेक्टर मैडम डिप्टी कलेक्टर को रिलीव करने के लिए तैयार नहीं हैं। विधायक जी ने नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया कि नई कलेक्टर मैडम तो पुरानी मैडम से भी “बड़ी वाली” निकलीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने डिप्टी कलेक्टर को एकतरफा रिलीव करने के आदेश सीधे राज्य शासन से जारी करवा दिए। अब कलेक्टर मैडम की पसंद और विधायक जी की नाराजगी के बीच आखिरकार सरकार का आदेश भारी पड़ गया।

4. कोर्ट के मामलों से परेशान चल रहे हैं सीनियर आईपीएस

मृदुभाषी और सरल स्वभाव वाले एक सीनियर आईपीएस इन दिनों लगातार कोर्ट के मामलों में उलझे हुए हैं। साहब की परेशानी की वजह उनकी शाखा के खिलाफ अदालत में धड़ाधड़ दायर हो रही याचिकाएं हैं। आलम यह है कि इन याचिकाओं के जवाब तैयार करवाते-करवाते साहब खासे परेशान बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि साहब की इस शाखा में नई पदस्थापना कुछ महीने पहले ही हुई है। जिन मामलों को लेकर एक के बाद एक याचिकाएं दायर हो रही हैं, वे सभी साहब के आने से पहले के बताए जा रहे हैं। यानी फैसले पहले हुए और जवाबदेही अब साहब के हिस्से आ गई है। साहब की स्थिति पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है—“करे कोई, भरे कोई।” बताया जाता है कि साहब भी अपनी शाखा की मौजूदा स्थिति को लेकर यही बात कहते नजर आ रहे हैं।

5. युवा आईएएस की सक्रियता बनी चर्चा का विषय

हाल ही में एक बड़े नगर निगम में आयुक्त की जिम्मेदारी संभालने वाले युवा आईएएस की सक्रियता इन दिनों शहर में खूब चर्चा बटोर रही है। साहब की कार्यशैली लोगों को इतनी पसंद आ रही है कि सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता की तारीफ होती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि साहब केवल नगर निगम कार्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के अलग-अलग वर्गों के लोगों के बीच खुद पहुंच रहे हैं। बुद्धिजीवियों, व्यापारियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और अपने-अपने इलाकों की दिक्कतों के बारे में सीधे जानकारी ले रहे हैं।

6. लंबी विदेश यात्रा पर युवा आईपीएस

आर्थिक नगरी में पदस्थ एक युवा आईपीएस इन दिनों करीब दो सप्ताह की विदेश यात्रा पर हैं। बताया जाता है कि साहब ने कामकाज की व्यस्तताओं से थोड़ा ब्रेक लिया है और इस बार परिवार के साथ यूरोप की सैर पर निकले हैं। साहब की यात्रा में स्विट्जरलैंड, चेक गणराज्य और फ्रांस जैसे देश शामिल हैं। कार्यक्रम के मुताबिक करीब दो सप्ताह तक चलने वाली इस यात्रा में वे यूरोप के अलग-अलग शहरों और प्रमुख पर्यटन स्थलों का आनंद लेंगे। बताया जाता है कि यात्रा का मकसद पूरी तरह परिवार के साथ समय बिताना और घूमना-फिरना है। अब साहब के लौटने के बाद ही पता चलेगा कि यूरोप की यह यात्रा उन्हें कामकाज की अगली पारी के लिए कितना तरोताजा कर पाती है।

7. कर्मचारियों की जिद से परेशान प्रमुख सचिव साहब

एक प्रमुख सचिव साहब इन दिनों अपने ही विभाग के कर्मचारियों की मांगों को लेकर परेशान बताए जा रहे हैं। दरअसल, विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विभाग के मुखिया होने के नाते अब उन्हें मनाने और मामला सुलझाने की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव साहब के कंधों पर है। साहब की ओर से कर्मचारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। उन्हें समझाने के साथ मांगों पर विचार करने और समाधान का भरोसा भी दिया गया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। हर कोशिश के बाद मामला फिर वहीं आकर खड़ा हो जा रहा है। अब साहब की चिंता केवल आंदोलन खत्म कराने तक सीमित नहीं है। उन्हें आशंका है कि मामला लंबा खिंचा तो सरकार की नजर में इसका असर उनकी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। वैसे भी साहब के पास इस विभाग के अलावा कुछ महत्वपूर्ण अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी हैं। ऐसे में कर्मचारियों की जिद ने प्रमुख सचिव साहब की परेशानी जरूर बढ़ा दी है।

8. कमिश्नर आए विपक्षी नेताओं के निशाने पर

एक बड़े विभाग में कमिश्नर के तौर पर पदस्थ प्रमोटी आईएएस इन दिनों विपक्षी नेताओं के निशाने पर हैं। मामला विभाग द्वारा कंप्यूटर खरीदी के लिए जारी की गई करीब 80 करोड़ रुपये की निविदा से जुड़ा बताया जा रहा है। निविदा की शर्तों को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं, जिससे दो कथित चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके। विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में कंपनियों के साथ-साथ साहब के कथित हितों का भी ध्यान रखा गया। खास बात यह है कि विभाग के अंदर से ही किसी व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर निविदा से जुड़े दस्तावेज विपक्षी नेताओं तक पहुंचाए जाने की बात सामने आ रही है। दस्तावेज हाथ लगने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस मामले को लेकर साहब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फिलहाल मामला गरम है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हालांकि, कमिश्नर साहब की ओर से पूरे प्रकरण पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

9. सातों दिन ऑफिस पहुंचने वाले एसपी साहब

प्रदेश के एक छोटे से आदिवासी बहुल जिले में पदस्थ एसपी साहब की कार्यशैली अपने कई साथी कप्तानों से अलग बताई जा रही है। प्रदेश के कुछ जिलों में जहां एसपी के सप्ताह में कुछ ही दिन कार्यालय पहुंचने और बाकी समय बंगले से बने शिविर कार्यालय के जरिए कामकाज संचालित करने की बातें सामने आती रहती हैं, वहीं इस जिले के एसपी साहब का तरीका बिल्कुल अलग बताया जाता है। साहब सप्ताह के सातों दिन कार्यालय पहुंचते हैं और नियमित रूप से कामकाज की निगरानी करते हैं। खास बात यह भी है कि वे केवल अपनी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अधीनस्थ पुलिस कर्मचारियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते हैं। बताया जाता है कि पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर जिले के अलग-अलग थानों में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाते हैं। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये साहब सीधी भर्ती वाले नहीं, बल्कि **प्रमोटी आईपीएस** हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कार्यशैली को लेकर विभाग में अलग तरह की चर्चा बनी हुई है।

10. कमिश्नर साहब का साफ संदेश—मुझसे सिर्फ ऑफिस टाइम में बात करें

एक महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ कमिश्नर साहब ने अपने कामकाज को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था बना रखी है। साहब ने अपने अधीनस्थों और विभाग से जुड़े लोगों को साफ संदेश दिया है कि किसी आधिकारिक काम के सिलसिले में उनसे कार्यालयीन समय में ही संपर्क किया जाए। बताया जाता है कि कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद साहब आधिकारिक फोन कॉल रिसीव नहीं करते और मोबाइल पर भेजे गए व्हाट्सऐप संदेशों का जवाब भी नहीं देते। इतना ही नहीं, अवकाश के दिनों को लेकर भी उनकी व्यवस्था स्पष्ट है। छुट्टी के दिन किसी आधिकारिक काम के सिलसिले में फोन या संदेश करने से बचने को कहा गया है। साहब का मानना है कि कार्यालयीन काम के लिए एक निर्धारित समय होना चाहिए और उसके बाद व्यक्तिगत समय को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए। साहब की इस व्यवस्था से कुछ लोग हैरान हैं तो कुछ इसे काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल विभाग में कमिश्नर साहब का यह संदेश बिल्कुल साफ है—ऑफिस का काम ऑफिस टाइम में ही।

Abhishek Dubey

लेखक के बारे में

Abhishek Dubey

Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

View all posts by Abhishek Dubey →