MP Weather Update: मध्य प्रदेश में 15-16 अक्टूबर को बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में दिन में गर्मी और रात में ठंडक

MP Weather Update: मध्य प्रदेश में 15-16 अक्टूबर को बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में दिन में गर्मी और रात में ठंडक
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदल रहा है। अक्टूबर के बीच एक बार फिर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 15 और 16 अक्टूबर को उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, 13 और 14 अक्टूबर को अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।
भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई शहरों में दिन के समय गर्मी और रात में ठंडक का असर बना रह सकता है। उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान में इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में मौसम बदल सकता है। संभावित बारिश से ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदेश से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है। इसके बावजूद अलग-अलग मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अक्टूबर में भी बारिश की स्थिति बन रही है। पिछले सप्ताह पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंडक तीनों तरह के मौसम का रुझान देखने को मिला है। इस बार भी महीने की शुरुआत में दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के साथ कुछ इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है।
इस मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश
मध्य प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा, लेकिन पूरे सीजन में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। जून से सितंबर के बीच प्रदेश में 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 4 फीसदी कम बारिश हुई।
पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के आंकड़ों में अंतर भी देखने को मिला। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 फीसदी की कमी रही।
जून में कम बारिश से बिगड़ा पूरे सीजन का गणित
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन बाद में मानसून कमजोर पड़ने के कारण कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।
जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश होने के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। मानसून के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुई मौसम प्रणाली से बारिश के आंकड़े में सुधार जरूर हुआ, लेकिन पूरे सीजन का औसत सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाया।
कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य से 5 से 21 फीसदी तक कम बारिश हुई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी अधिक व्यापक रही। आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा सहित कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। कुछ जिलों में यह कमी 9 से 51 फीसदी तक रही।
प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में कमी दर्ज की गई। ऐसे में अक्टूबर में होने वाली बारिश से मौसम में बदलाव तो आ सकता है, लेकिन पूरे मानसून सीजन की कमी की कितनी भरपाई होगी, यह बारिश की मात्रा पर निर्भर करेगा।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →